
बीकानेर।प्रख्यात साहित्यकार एवं पांडुलिपि संरक्षण के अग्रदूत श्री अगरचंद जी नाहटा की पुण्यतिथि के अवसर पर अभय जैन ग्रन्थालय में श्रद्धांजलि सभा एवं उनके साहित्य, दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियों तथा पुस्तकों की भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में श्री नाहटा द्वारा रचित एवं संग्रहित अमूल्य साहित्य को प्रदर्शित किया गया, जिसे साहित्यकारों, शोधार्थियों एवं आम जन ने गहन रुचि से देखा। भारतीय प्राच्यविद्या को संरक्षित करने के लिए श्री अगर चन्द जी नाहटा का त्याग और अगरचन्द जी नाहटा की सफ़लता के पीछे उनके भतीजे भंवर जी नाहटा का त्याग अलौकिक व अद्वितीय है। श्री अगरचन्द नाहटा जी ने श्री जिनकृपाचन्द सूरि जी के सहयोग से अभय जैन ग्रन्थालय की स्थापना कर भारत की ज्ञान राशि का अलौकिक संग्रह किया । नाहटा जी के इन प्रयासों का सम्मान करते हुए ज्ञान भारतम् मिशन ने अपना अभिन्न हिस्सा बनाया है ।
श्रद्धांजलि सभा में इतिहासकार डॉ. रितेश व्यास, साहित्य प्रेमी सुधा आचार्य एवं राजस्थानी साहित्यकार गोरी शंकर प्रजापत ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने श्री अगरचंद जी नाहटा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने न केवल साहित्य सृजन किया, बल्कि दुर्लभ पांडुलिपियों को संजोकर भारतीय ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण कार्य किया। वक्ताओं ने उनके जीवन को साहित्य एवं संस्कृति के प्रति समर्पित एक आदर्श जीवन बताया।
इस अवसर पर श्री नाहटा के पड़-पौत्र एवं अभय जैन ग्रन्थालय के निदेशक ऋषभ नाहटा ने भावुक शब्दों में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि उनके पड़दादा का जीवन ज्ञान, अनुशासन और सेवा की मिसाल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आज अभय जैन ग्रन्थालय में पांडुलिपि संरक्षण एवं डिजिटलीकरण का जो कार्य हो रहा है, वह उनके द्वारा बोए गए संस्कारों और दृष्टि का ही परिणाम है। ऋषभ नाहटा ने भविष्य में भी इस ज्ञान परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने एवं शोधार्थियों के लिए इसे और अधिक सुलभ बनाने का संकल्प व्यक्त किया।इसी के साथ जयपुर से लिपि एवं पांडुलिपि विशेषज्ञ जयप्रकाश शर्मा ने वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़ कर नाहटा जी के पांडुलिपि के क्षेत्र में उनके योगदान को सराहते हुए श्री नाहटा जी को राजस्थान की धरती पर ज्ञान गंगा का वाहक बताया ।
कार्यक्रम का संचालन लव कुमार देराश्री द्वारा किया गया। संचालन करते हुए उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा, उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल महापुरुषों को स्मरण करने का माध्यम हैं, बल्कि समाज को अपनी बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक करने का भी कार्य करते हैं।
इसी के साथ मोहित बिस्सा ने बताया कि ज्ञान भारतम् मिशन, कला एवं संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके अंतर्गत अभय जैन ग्रन्थालय की प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण ,डिजिटलीकरण (डिजिटाइजेशन) एवं प्रकाशन का कार्य निरंतर किया जा रहा है जिससे पांडुलिपि संरक्षण एवं शोध कार्यों को नई गति मिली है इसी के साथ अभय जैन ग्रंथालय अन्य ग्रंथालय एवं व्यक्तिगत संग्रह के ग्रंथों को संरक्षित करने के लिए संकल्पित है।
कार्यक्रम में लक्ष्मीकांत उपाध्याय, नवरत्न चोपड़ा, जसवंत सिंह, वीरेंद्र, रामदेव ओझा ,गौरव आचार्य सहित अनेक साहित्यप्रेमी, विद्वान एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में पांडुलिपियों को सुरक्षित रखने और भावी पीढ़ियों तक इस अमूल्य ज्ञान को पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। श्री अगर चन्द नाहटा जी की इस पुण्यतिथि पर ज्ञान भारतम् मिशन नई दिल्ली के प्रोजेक्ट डायरेक्टर श्री अनिर्बाण दाश , विश्वगुरुदीप आश्रम शोध संस्थान के उपाध्यक्ष महामण्डलेश्वर स्वामी ज्ञानेश्वर पुरी जी महाराज , वैदिक हैरिटेज एवं पाण्डुलिपि शोध संस्थान जयपुर के समन्वयक डॉ. सुरेन्द्र कुमार शर्मा ने श्री नाहटा जी के द्वारा भारतीय संस्कृति व ज्ञान को सुरक्षित कर उसको आगे बढ़ाने के प्रयासों व योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की ।














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