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एन.आर.सी.सी. की विशेषज्ञ टीम द्वारा जैसलमेर के सम क्षेत्र में पशु स्वास्थ्य शिविर आयोजित

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बीकानेर।राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा भारत सरकार की अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत जैसलमेर जिले के ग्राम सम में आज दिनांक 03 जनवरी 2026 को पशु स्वास्थ्य शिविर-सह-कृषक-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजित शिविर में ग्राम सम के 78 पशुपालकों ने सहभागिता करते हुए अपने पशुओं—ऊँट (309), गाय (74), भेड़ (419) एवं बकरी (289) सहित कुल 1091 पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार सेवाओं का लाभ उठाया। साथ ही ऊँटों में उपचार हेतु आवश्यक दवाइयाँ एवं परामर्श प्रदान किया गया।
इस अवसर पर केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राकेश रंजन ने पशुपालकों को संबोधित करते हुए कहा कि पशुओं के स्वास्थ्य एवं उत्पादन पर सतत ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने पशुपालन प्रबंधन में किसी भी प्रकार की समस्या या असंतुलन महसूस होने पर विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए वैज्ञानिक उपायों को अपनाने पर जोर दिया, ताकि रोग नियंत्रण के साथ-साथ पशुधन की कार्यक्षमता और उत्पादकता बनी रह सके। डॉ. रंजन ने एनआरसीसी द्वारा ऊँटनी के दूध से निर्मित विभिन्‍न उत्‍पादों एवं पर्यटन विकास की दिशा में किए जा रहे व्‍यावहारिक प्रयासों की भी जानकारी दी।
इस अवसर पर केन्द्र के वैज्ञानिकों के माध्यम से निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने पशुपालकों को भारत सरकार की अनुसूचित जाति उप-योजना का अधिकाधिक लाभ लेने एवं वैज्ञानिक पशुपालन अपनाकर उत्पादन व आय बढ़ाने का संदेश दिया। उन्होंने ऊँटनी के दूध के औषधीय महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए जैसलमेर जैसे ऊँट-बहुल क्षेत्रों में ऊँटनी दुग्ध आधारित उद्यमिता एवं मूल्य-संवर्धित उत्पादों को आजीविका का प्रभावी माध्यम बताया।
केन्द्र के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. काशी नाथ ने पशुपालकों को जानकारी देते हुए बताया कि शिविर में परीक्षण किए गए पशुओं में मौसमी प्रभाव के कारण परजीवी संक्रमण एवं सामान्य श्वसन संबंधी रोग पाए गए, जिनका आवश्यक उपचार किया गया। उन्होंने पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने हेतु संतुलित पोषण पर जोर देते हुए खनिज मिश्रण, नमक की ईंटें एवं एन.आर.सी.सी. द्वारा तैयार करभ पशु आहार के नियमित उपयोग की सलाह दी।
कार्यक्रम के दौरान एस.सी.एस.पी. उप-योजना के नोडल अधिकारी श्री मंजीत सिंह ने योजना की प्रमुख विशेषताओं एवं इसके माध्यम से पशुपालकों को मिलने वाले लाभों की जानकारी साझा की। वहीं केन्द्र के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री अखिल ठुकराल एवं वित्त एवं लेखा अधिकारी श्री आशीष पित्ती ने उप-योजना के तहत उपलब्ध सहायता एवं एन.आर.सी.सी. द्वारा प्रदान की जा रही विभिन्न सुविधाओं के बारे में विस्तार से बताया। शिविर के सुचारु संचालन में श्री हरजिन्दर ने पशुपालकों के पंजीकरण, उपचार समन्वय एवं आहार वितरण कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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