संतृप्ति अभियान के माध्यम से हितधारकों को बैंकों एवं सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए चलाया अभियान..

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बीकानेर, 8 अगस्त। भारत सरकार तथा सहकारिता विभाग के निर्देशानुसार अधिकाधिक हितधारकों को बैंकों से जोड़ते हुए कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए नाबार्ड द्वारा ग्राम पंचायत राशीसर में शुक्रवार को संतृप्ति अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इंडियन बैंक शाखा प्रबंधक अमित कटारिया द्वारा पशुपालकों के लिए संचालित योजना इण्डडीजी डेयरी केसीसी के माध्यम से प्रति पशु 11 हजार 100 रुपए का ऋण का लाभ लेने के संबंध जानकारी दी।
नाबार्ड जिला विकास प्रबंधक रमेश ताम्बिया ने बताया कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उघमिता विकास कार्यक्रम, पीएम इंन्टर्नशीप योजना, कुसुम योजना तथा ग्रामीण युवाओं के लिए नाबार्ड की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बैंक खाताधारकों को एक ही स्थान पर सभी बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध करवाना तथा बकाया केवाईसी को पूरा करते हुए खाताधारकों के बंद खातों को पुनः चालू करना है।
इसी प्रकार खाताधारकों को भारत सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजना, पीएम जन-धन योजना से जोड़ा गया। भारत सरकार की नाबार्ड के माध्यम से कृषको के लिए 1 लाख करोड़ रुपए की कृषि अवसंरचना निधि तथा पशुपालकों के लिए 15 हजार करोड़ की पशुपालन कृषि अवसंरचना विकास निधि संबंध में जानकारी देकर कृषकों को जागरुक किया गया।
कृषि अवसंरचना निधि तथा पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ) योजना किसानों के लिए महत्वपूर्ण योजना है। इसका उद्देश्य पशुपालन क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकसित करना है। इसका मुख्य लक्ष्य दूध और प्रसंस्करण, पशु आहार उत्पादन सहित अन्य संबंधित गतिविधियों के लिए ऋण प्रदान करना है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता और रोजगार को बढ़ावा दिया जा सकें। पशु चारा संयंत्र की स्थापना के लिए व्यक्तिगत उद्यमियों, निजी कंपनियों, एमएसएमई, डेयरी सहकारी समितियां व किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और धारा 8 कंपनियों द्वारा निवेश को बढ़ावा देने के लिए अनुमोदित किया गया है। इन दोनों ही योजनाओं के लाभार्थियों द्वारा बैंक में नियमित चुकौती पर 3 प्रतिशत प्रति वर्ष का ब्याज अनुदान देय होगा। ब्याज अनुदान अधिस्थगन सहित 8 वर्ष की चुकौती अवधि तक प्रदान किया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन महावीर जालप ने किया। इस दौरान रामनारायण चौहोन, चंपाला कालवा, बनवारी लाल गोदारा, किशन लाल गोदारा, राम कुमार गोदारा तथा रामचंद चौहान ने विभिन्न योजनाओं पर विचार साझा किए।

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