
बीकानेर।देश की रेडियो विरासत को संरक्षित करने और भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। बीकानेर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद दुर्लभ और ऐतिहासिक रेडियो सेटों को सुरक्षित रखने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रेडियो म्यूजियम की स्थापना की मांग उठी है। इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजकर 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर इसकी औपचारिक घोषणा करने का आग्रह किया गया है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि सौराष्ट्र क्षेत्र के एक रेडियो प्रेमी के पास अकेले करीब 400 पुराने रेडियो सेट मौजूद हैं, जिनकी जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आई। देशभर में ऐसे कई रेडियो संग्राहक हैं, जिन्होंने अपने स्तर पर दुर्लभ रेडियो सेटों का संग्रह किया है, लेकिन निजी स्तर पर इनकी देखरेख, संरक्षण और प्रदर्शन एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
राष्ट्रीय रेडियो म्यूजियम की आवश्यकता बताते हुए देश के विभिन्न हिस्सों के रेडियो संग्राहकों के नाम भी सामने आए हैं, जिनमें बीकानेर के दिनेश माथुर का नाम प्रमुख रूप से शामिल है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के रायपुर, गुजरात के सौराष्ट्र, असम और कर्नाटक जैसे राज्यों के संग्राहकों द्वारा वर्षों से संजोए गए रेडियो सेटों का भी उल्लेख किया गया है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि रेडियो केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि आज़ादी के आंदोलन, आपातकालीन सूचनाओं, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता में इसकी ऐतिहासिक भूमिका रही है। यदि राष्ट्रीय स्तर पर रेडियो म्यूजियम स्थापित किया जाता है, तो देश की यह तकनीकी और सांस्कृतिक विरासत एक ही स्थान पर संरक्षित हो सकेगी। साथ ही, पुराने रेडियो सेटों को देखकर नई पीढ़ी प्रेरित होकर आधुनिक तकनीक में भी नवाचार कर सकेगी।
रेडियो प्रेमियों का मानना है कि 13 फरवरी, विश्व रेडियो दिवस, इस घोषणा के लिए सबसे उपयुक्त अवसर है। इससे न केवल रेडियो के ऐतिहासिक महत्व को वैश्विक मंच पर रेखांकित किया जा सकेगा, बल्कि बीकानेर जैसे शहरों में वर्षों से संजोई जा रही रेडियो विरासत को भी राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या केंद्र सरकार इस मांग पर सकारात्मक कदम उठाते हुए देश की रेडियो परंपरा को संरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय रेडियो म्यूजियम की दिशा में कोई ठोस निर्णय लेती है या नहीं।
















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