ज्योतिषाचार्यमोहित बिस्सा

मकर संक्रांति भारतीय ज्ञान परंपरा का ऐसा पर्व है जिसमें ज्योतिष, विज्ञान और जीवन-दर्शन का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। ज्योतिषीय दृष्टि से मकर संक्रांति वह काल है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर शनि की मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे शास्त्रों में उत्तरायण का प्रारंभ माना गया है—“सूर्यः मकरं याति तदा संक्रांतिरुच्यते”—यह परिवर्तन आत्मचेतना (सूर्य) और कर्म-अनुशासन (शनि) के संतुलन का प्रतीक है, इसी कारण यह पर्व कर्म सुधार, दीर्घकालीन लक्ष्य निर्धारण और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़ा है। श्रीमद्भगवद्गीता में उत्तरायण काल को मोक्षदायी कहा गया है, इसलिए इस समय दान, स्नान, जप और व्रत का विशेष महत्व है।
वैज्ञानिक दृष्टि से भी मकर संक्रांति के बाद सूर्य की किरणें उत्तरी गोलार्ध पर अधिक प्रभावी होती हैं, जिससे दिन बड़े होने लगते हैं और मानव शरीर में सेरोटोनिन जैसे हार्मोन सक्रिय होकर मानसिक ऊर्जा, सकारात्मकता और कार्यक्षमता बढ़ाते हैं; यही कारण है कि परंपरा में सूर्य स्नान, तिल-गुड़ सेवन और खुले वातावरण में उत्सव मनाने की व्यवस्था की गई। आयुर्वेद के अनुसार तिल वातनाशक व ऊष्मादायक है और गुड़ पाचन तथा रक्तवर्धन में सहायक है, जो शीत ऋतु में शरीर के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है।
इस वर्ष मकर संक्रांति के साथ षट्-तिल एकादशी का संयोग इसे और अधिक पुण्यप्रद बनाता है; पद्मपुराण के अनुसार तिल से स्नान, दान, हवन, सेवन और दीपदान करने से पापक्षय तथा मानसिक-आध्यात्मिक शुद्धि होती है।
आइए जानते हैं मकर संक्रांति का पुण्य और महापुण्य काल समय-:
पुण्य काल का समय-:
- 14 जनवरी 2026, बुधवार, दोपहर 3:13 से अगले दिन 15 जनवरी को सुबह 08:00 बजे तक रहेगा। महापुण्य काल 14 जनवरी, दोपहर 3:13 से शाम 4:58 तक रहेगा/
*षटतिला एकादशी व्रत (14 जनवरी)-:
- यदि आप 14 जनवरी को पुण्य काल के दौरान किसी तरह का दान पुण्य करना चाहते हैं तो इस दिन तिल, फल एवं फलाहारी वस्तुओं से ही हो पाएगा, क्योंकि इस दिन षट्तिला एकादशी व्रत है अतः इस दिन किसी भी तरह का अनाज (अन्न) खाना व खिलाना वर्जित माना जाता है।
पुण्य काल का महत्व-: - मकर संक्रांति पर पुण्य का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन से स्वर्ग के द्वार खुल जाते हैं. मकर संक्रांति के पुण्य काल में गंगा स्नान, सूर्योपासना, दान, मंत्र जप करने व्यक्ति के जन्मों के पाप धुल जाते है//
▪️स्नान-:
- मकर सक्रांति वाले दिन सबसे पहले प्रातः किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए, यदि यह संभव ना हो सके तो अपने नहाने के जल में थोड़ा गंगाजल डालकर स्नान किया जा सकता है//
▪️सूर्योपासना-:
- प्रातः स्नान के बाद उगते हुए सूर्य नारायण को तांबे के पात्र में जल, गुड, लाल पुष्प, गुलाब की पत्तियां, कुमकुम आदि मिलाकर जल अर्पित करना चाहिए//
▪️मंत्र जप-:
- सूर्य उपासना के बाद में कुछ देर आसन पर बैठकर मंत्र, नाम जप, श्री गीता के पाठ इत्यादि करने चाहिए और अपने इष्ट देवी- देवताओं की भी उपासना करनी चाहिए//
▪️गाय के लिए दान-:
- पूजा उपासना से उठने के बाद गाय के लिए कुछ दान अवश्य निकालना चाहिए, जैसे- गुड, चारा इत्यादि//
▪️पितरों को भी करे याद-:
- इस दिन अपने पूर्वजों को प्रणाम करना ना भूलें, उनके निमित्त भी कुछ दान अवश्य निकालें। इस दिन पितरों को तर्पण करना भी शुभ होता है। इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है//
खिचड़ी का दान 15 जनवरी को करें-:
- खिचड़ी में चावल, दाल, घी और तिल जैसे तत्व होते हैं। ये केवल स्वादिष्ट ही नहीं होते बल्कि शरीर को ऊर्जा और पोषण भी देते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यह सूर्य देव से जुड़ा भोजन है. इसे खाने या जरूरतमंदों को देने से स्वास्थ्य और मानसिक शांति मिलती है। मकर संक्रांति के दिन यह दान देने का विशेष महत्व है लेकिन इस बार 14 जनवरी को षट्तिला एकादशी का व्रत भी रहेगा अतः एकादशी तिथि पर चावल खाना एवं खिलाना दोनों ही वर्जित होते हैं अतः यह दान 15 जनवरी को देना चाहिए |
आधुनिक युग और युवाओं के संदर्भ में मकर संक्रांति यह संदेश देती है कि जैसे सूर्य अपनी निश्चित दिशा में निरंतर आगे बढ़ता है, वैसे ही अनुशासन, प्रकृति-संयोजन और सकारात्मक सोच के साथ जीवन को नई दिशा दी जा सकती है; यह पर्व केवल परंपरा नहीं, बल्कि आज के तनावग्रस्त समाज के लिए ऊर्जा, संतुलन और पुनर्निर्माण का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक मार्गदर्शन है।
ज्योतिषाचार्य
मोहित बिस्सा














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