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जनसेवा ही कर्मयोग का मूल मंत्र-डॉ. राणे

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बीकानेर। आईसीएआर–केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर में एक दिवसीय राष्ट्रीय कर्मयोगी जनसेवा प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संस्थान के कार्मिकों में जनसेवा की भावना, कार्यकुशलता, उत्तरदायित्व तथा नागरिक-केंद्रित शासन की समझ को सुदृढ़ करना रहा।
मुख्य अतिथि एवं संस्थान के निदेशक डॉ. जगदीश राणे ने अपने संबोधन में सरकारी सेवाओं में निष्ठा, पारदर्शिता और सेवा-भाव के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कर्मयोग केवल दायित्व-निर्वहन नहीं, बल्कि जनहित के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिक, तकनीकी, प्रशासनिक एवं कुशल श्रेणी के कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। सत्रों के दौरान मिशन कर्मयोग की अवधारणा, कार्य-दक्षता, नैतिक मूल्य, उत्तरदायित्व तथा प्रभावी सार्वजनिक सेवा वितरण जैसे विषयों पर सार्थक विमर्श किया गया।
कार्यक्रम के लीड ट्रेनर के रूप में श्री इंद्र भूषण कुमार, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, आईसीएआर–केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर ने मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने सरकारी सेवाओं में कर्मयोगी दृष्टिकोण, सतत क्षमता निर्माण एवं सुशासन की भूमिका पर विस्तार से विचार रखे।
समग्र रूप से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरक सिद्ध हुआ। प्रतिभागियों से प्राप्त सकारात्मक प्रतिक्रिया ने इसकी प्रासंगिकता और प्रभावशीलता को रेखांकित किया।

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