
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राज्य महासचिव डॉ. सीमा जैन ने आज विधानसभा में पेश किए गए राजस्थान राज्य बजट 2026-27 को महिलाओं के लिए ‘निराशाजनक’ और ‘आंकड़ों का मायाजाल’ करार दिया है। समिति का मानना है कि बजट में राज्य की आधी आबादी की बुनियादी समस्याओं महंगाई, सुरक्षा और बेरोजगारी को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
डॉ. जैन ने कहा कि रसोई गैस, बिजली और खाद्य पदार्थों की आसमान छूती कीमतों से महिलाएं सबसे ज्यादा त्रस्त हैं। बजट में ‘सब्सिडी’ और ‘राहत’ के नाम पर केवल पुरानी योजनाओं को नया नाम दिया गया है, जिससे गृहिणियों को कोई वास्तविक राहत नहीं मिली है।
प्रदेश में बढ़ते महिला अपराधों के बावजूद, पुलिस तंत्र के सुदृढ़ीकरण और ‘फास्ट ट्रैक’ अदालतों के लिए कोई ठोस वित्तीय प्रावधान नहीं किया गया है। केवल विज्ञापनों में सुरक्षा का दावा करने से जमीनी हकीकत नहीं बदलेगी। बजट में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा सहयोगिनियों और मिड-डे मील कर्मियों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की उम्मीद थी, जिसे सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। मनरेगा में महिला श्रमिकों के लिए अतिरिक्त कार्य दिवसों की घोषणा न करना ग्रामीण महिलाओं के साथ अन्याय है। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों के बजट में कटौती कर निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने की नीति महिलाओं की पहुंच से बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य को दूर ले जाएगी।
डॉ. सीमा जैन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने महिलाओं की इन बुनियादी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति पूरे प्रदेश में जिला स्तर पर आंदोलन छेड़ेगी।)

















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