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राजकीय महारानी सुदर्शन कन्या महाविद्यालय बीकानेर में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई तृतीय व चतुर्थ के सात दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन

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बीकानेर।राजकीय महारानी सुदर्शन कन्या महाविद्यालय बीकानेर में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई तृतीय व चतुर्थ के सात दिवसीय विशेष शिविर के चतुर्थ दिवस पर विविध गतिविधियों का आयोजन।
महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई तृतीय व चतुर्थ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 7 दिवसीय विशेष शिविर के चतुर्थ दिवस पर विविध सत्रों का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम कार्यक्रम अधिकारियों अंजू सांगवा व सुनीता बिश्नोई और स्वयं सेविकाओं ने मिलकर लक्ष्य गीत गाकर सरस्वती वंदना की।
प्रथम सत्र में शारीरिक शिक्षण के अंतर्गत प्रशिक्षक प्रीतम सेन के नेतृत्व में स्वयं सेविकाओं को मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण दिया,जिसके बाद शक्ति सिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में छात्राओं ने ताईक्वांडों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। तत्पश्चात स्वयंसेविकाओं ने नाश्ता किया।
दूसरे सत्र में राज्य आपदा प्रतिसाद बल राजस्थान ‘जी’ मुख्यालय से आए दल ने ‘आपदा प्रबंधन’ विषय पर व्याख्यान देते हुए स्वयंसेविकाओं को महत्वपूर्ण जानकारी दी साथ ही
हृदयाघात, पानी में डूबना, घर पर cylinder में आग लग जाना, सड़क पर कोई अनहोनी होना, किसी भी प्रकार की शारीरिक चोट लगना आदि दुर्घटनाएं होने पर घटना स्थल पर की जाने वाली सहायता और कार्यवाही का अभ्यास किया। स्वयंसेविकाओं ने आपदा प्रतिसाद टीम के नेतृत्व में CPR देना और cylinder की आग बुझाने का अभ्यास किया। प्राचार्य डॉ नवदीप सिंह बैंस ने अपने उद्बोधन में आपदा प्रबंधन की शिक्षा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए स्वयंसेविकाओं को महत्वपूर्ण विधियों को सीखकर अपने घर और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को जागरुक करने के लिए प्रोत्साहित किया। प्राचार्य ने सेवा, समर्पण की भावना को सर्वोत्तम बताते हुए स्वयंसेविकाओं को समाज और राष्ट्र सेवा को अपने जीवन का ध्येय बनाने का आह्वान किया। आज के द्वितीय वक्ता डॉ विवेक व्यास,असिस्टेन्ट प्रोफेसर एस.के राजस्थान ऐग्रिकल्चरल यूनिवर्सिटी बीकानेर ने ‘Leadership development through transactional analysis’ विषय पर व्याख्यान दिया। प्रबल नेतृत्व क्षमता के साथ मूल्य समर्थित व्यवहार पर बल देते हुए उन्होंने बताया कि व्यक्ति के बोलने का लहजा कैसा है? ये नेतृत्व गुण के लिए बहुत महत्वपूर्ण पहलू है। उन्होंने सेविकाओं का एक पर्सनैलिटी टेस्ट लिया, जिसके नतीजों से उन्होंने कुशल नेतृत्व क्षमता की विशेषताएं समझाई। उनके अनुसार तनाव से मुक्त रहने के लिये अपने आप को खेलों से जोड़िए। कोई भी एक शौक जीवन में अपनाएं चाहे वो भक्ति हो, चाहे पेंटिंग हो,या कुछ और। आगे उन्होंने बताया कि भरोसा नेतृत्व की नींव है। अच्छा लीडर बनने के लिए हमें अपनी टीम पर सबसे पहले भरोसा करना होगा, साथ ही कुशल नेतृत्व के लिए अच्छा पाठक होना भी अतिआवश्यक है। अच्छे नेतृत्व के गुण बताते हुए उन्होंने कहा कि सदैव आगे की सोचे,दूसरों के प्रभाव से बाहर निकलें,अपनी दुनिया को खुले नजरिए से देखें, बुद्धिमान लोगों के संपर्क में रहें। समझदार लोगों से मिले और उनके गुणों को अपनाए। ‘करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान’ उक्ति के उदाहरण से उन्होंने बताया कि अभ्यास ही सफलता की कुंजी होता है।
तीसरे सत्र में नशा मुक्ति, बेटी बचाओ, जागरुक गणतंत्र आदि विषयों पर पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई।
चतुर्थ सत्र में भोजन करने के पश्चात स्वयंसेविकाओं और कार्यक्रम अधिकारियों ने कच्ची बस्तियों में जाकर सार्वजनिक पार्क में साफ़ सफ़ाई की,घर-घर जाकर लोगों को कचरा निर्धारित स्थान पर ही फेंकने की अपील करते हुए अपने घर और गली को कचरे से मुक्त रखने हेतु जागरुक किया।

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