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बज्जू में नियम विरूद्ध आंवटित 7518 बीघा भूमि को निरस्त करे राज्य सरकार -अंशुमान सिंह भाटी

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जिला प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आई

285 भूमि आवंटन नियम विरूद्ध पाए गए

जिला प्रशासन ने 285 में से 268 आवंटनों के ही प्रस्ताव ही नियम 22(3) के अंतर्गत दिए

उक्त भूमि को वापिस अराजीराज दर्ज की जाए

बीकानेर । कोलायत विधायक अंशुमान सिंह भाटी ने बीकानेर के उपखंड क्षेत्र बज्जू में 2020 से 2023 के मध्य नियम विरूद्ध 7518 बीघा भूमि को नियम बाईस तीन के अंतर्गत तत्काल निरस्त कर संबंधित भूमि को पुनः अराजी राज दर्ज करने व इसके लिए दोषी उपखंड अधिकारी, तहसीलदार एवं संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के प्रावधानों के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग राज्य सरकार से की है।
विधायक अंशुमान सिंह भाटी राज्य विधानसभा में प्रक्रिया के नियम 295 के तहत विशेष उल्लेख प्रस्ताव पर अपने विचार रख रहे थे । भाटी ने कहा पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2020 से 2023 के दौरान उपखंड क्षेत्र बज्जू में कुल 392 भूमि आवंटन किए गए। इन आवंटनों में व्यापक अनियमितताएं एवं नियम विरूद्ध भूमि आवंटन प्रक्रियाओं, प्रक्रियाओं के कारण क्षेत्र की जनता में भारी रोष व्याप्त रहा। विधायक भाटी ने कहा इस गंभीर विषय को मैंने समय समय पर राजस्थान विधानसभा में उठाया। प्रकरण की जांच हेतु उप शासन सचिव राजस्व (ग्रुप-3) विभाग जयपुर द्वारा आदेश दिनांक 28/3/2025 द्वारा अतिरिक्त जिला कलेक्टर नगर बीकानेर की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई। समिति द्वारा दिनांक 11/9/2025 को प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट तथा मेरे द्वारा विधानसभा के प्रश्नों के उत्तर अनुसार कुल 392 भूमि आवंटन में से 285 भूमि आवंटन नियम विरूद्ध पाए गए। जांच समिति द्वारा 285 अनियमित भूमि आवंटन को राजस्थान उपनिवेशन नियम 1975 के नियम 22(3) के अंतर्गत निरस्त योग्य माना गया। इतना लंबे समय व्यतीत हो जाने के बावजूद जिला प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण आज दिनांक तक उन 285 में से 268 आवंटनों के ही प्रस्ताव जिला प्रशासन को नियम 22(3) के अंतर्गत प्रस्तुत किए गए हैं, जिन पर अपेक्षित कार्रवाई अभी भी लंबित है तथा आज दिनांक तक एक भी भूमि आवंटन निरस्त नहीं किया गया है। भाटी ने राज्य सरकार से 285 अनियमित कुल 7518 बीघा भूमि को नियम 22(3) के अंतर्गत तत्काल निरस्त कर संबंधित भूमि को पुनः अराजी राज दर्ज करने व दोषी उपखंड अधिकारी, तहसीलदार एवं संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के प्रावधानों के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की।

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