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सामाजिक एकता एवं पारिवारिक परम्पराओं का प्रतीक उत्सव है गणगौर पर्व

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आलेख : लव कुमार देराश्री


बीकानेर शहर अपनी संस्कृति एवं सामाजिक समरसता के कारण पूरे भारत वर्ष में प्रसिद्ध है। यहाँ चैत्र माह शुक्ल पक्ष चतुर्थी को गणगौर का मेला लगता है। यह मेला एक सुन्दर संदेश देता है। चौतीणा कुआ पर शाही लवाजमे के साथ राजपरिवार की गणगौर पहुँचती है साथ ही नगर की सारी गणगौर प्रतिमा को भी वहा लाया जाता है लक्ष्मीनाथ जी मन्दिर, भादाणी पंचायत, हिडाऊजी देराश्री परिवार एवं मंदिरो, ट्रस्टों एवं पंचायत की गणगौर वहा पर विराजमान होती है। राजा रायसिंह जी के मंत्री कर्मचन्द बछावत द्वारा भादाणी समाज को प्रतिमा दी गई। उसका पूजन आज भी समाज के हर घर मे बारी बारी अर्थात् बारीदारी से होता है। भादाणी समाज के हजारो व्यक्ति होने वाली ऐतिहासिक दौड़ में हिस्सा लेते है
गणगौर पर्व सिर्फ आस्था का ही नही अपितु सामाजिक एकता का
भी प्रतीक है। परम्पराओ को भी इस पर्व में निभाया जाता है
हिडाऊ जी देराश्री परिवार मे हिडाऊ मेरी रम्मत के उस्ताद पं गणपत जी देराश्री गणगौर पर्व पर रम्मत एवं गीत गायन का आयोजन
किया करते थे आज भी गणगौर के आगे गीत एवं नृत्य परम्परा
निभाई जाती है
यह पर्व सिर्फ 16 दिन लड़कियों के गवर पूजन जितना नहीं है इस पर्व के माध्यम से हमारे पूर्वज समाज की एकताआपसी प्रेम सिखाते है। अपनी संस्कृति को बचाना और आने वाली पीढी को अवगत कराना सिखाता है

लव कुमार देराश्री

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