बीकानेर, 4 अप्रैल। राजस्थान ललित कला अकादमी एवं पंडित जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. रजनीश हर्ष ने शनिवार को श्री अगरचंद भैरोंदान सेठिया जैन पारमार्थिक सेवा संस्थान का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान में चल रहे पांडुलिपि संरक्षण, सूचीकरण एवं डिजिटलीकरण कार्यों का अवलोकन किया।
निरीक्षण के दौरान संस्थान के अध्यक्ष सुरेन्द्र सेठिया ने संस्थान की गतिविधियों एवं उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी और बताया कि वर्तमान में यह कार्य संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत किया जा रहा है। इस परियोजना का क्लस्टर सेंटर विश्वगुरुदीप आश्रम शोध संस्थान, जयपुर है। इस पहल के माध्यम से प्राचीन पांडुलिपियों को आधुनिक तकनीक की सहायता से सुरक्षित एवं संरक्षित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 15,000 पृष्ठों का सफलतापूर्वक स्कैनिंग कार्य पूर्ण किया जा चुका है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
डॉ. रजनीश हर्ष ने संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने संस्थान के प्रयासों को प्रेरणादायक बताया।
संस्थान द्वारा किए जा रहे ये प्रयास न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश में सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।












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