समर्पण से ही कला संरक्षित होती है : प्रो. मदन सिंह राठौड़, कुलगुरु, बृज विवि
जोधपुर, लोक जीवन आनन्द की अनुभूति है। जो व्यक्ति इसमें डूबता है वही प्राप्त कर सकता है। ये विचार महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. मदन सिंह राठौड़ ने थार लोक संस्कृति अध्ययन केन्द्र में परिचर्चा में व्यक्त किये। प्रो. राठौड़ ने कहा कि हमें विविध वर्णी लोक कलाओं को संरक्षित करने की आवश्यकता है। लोक संस्कृति सामाजिक समरसता उत्पन्न करती है और चुनौती को अवसर में परिवर्तित करती है।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के कुलगुरु प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि लोक संस्कृति को संरक्षित करना हमारा सामूहिक दायित्व है। इसमें हमारी पीढ़ियों का ज्ञान संचित है। थार का लोक संगीत विशेष पहचान रखता है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. रिछपाल सिंह ने कहा कि भारतीय परम्परा में संतों और भक्तों का विशेष महत्व है। उनकी मौखिक वाणी हमें मिलती है उस पर भी अध्ययन करना चाहिए।आभार व्यक्त करते हुए विधि संकाय के अधिष्ठाता प्रो. सुनील आसोपा ने कहा कि थार लोक संस्कृति अध्ययन केन्द्र विश्वविद्यालय के एक महत्त्वपूर्ण अध्ययन केन्द्र के रूप में विकसित हो यह सिंडिकेट की मंशा रही है उन्होंने आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। स्वागत व संयोजक लोक संस्कृति अध्ययन केन्द्र के निदेशक प्रो. महीपाल सिंह राठौड़ ने व्यक्त किया।










