बीकानेर, 4 अगस्त। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (उच्च शिक्षा) की स्थानीय इकाई, महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर द्वारा मंगलवार को “गुरुवंदन कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महासंघ के पश्चिम क्षेत्र प्रमुख एवं संगठन मंत्री प्रो. दिग्विजय सिंह, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य प्रो. उज्ज्वल गोस्वामी, विश्वविद्यालय इकाई की अध्यक्ष डॉ. संतोष कंवर शेखावत तथा इकाई सचिव डॉ. उमेश शर्मा द्वारा माँ सरस्वती एवं महर्षि वेदव्यास के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. उज्ज्वल गोस्वामी ने गुरु-शिष्य परम्परा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए महर्षि वेदव्यास के जीवन, कृतित्व एवं भारतीय ज्ञान परम्परा में उनके अप्रतिम योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान का संप्रेषक ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार-सृजन एवं जीवन मूल्यों का संवाहक भी होता है। साथ ही उन्होंने महासंघ की कार्यप्रणाली, शैक्षिक दृष्टिकोण एवं राष्ट्रीय विचारधारा पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि प्रो. दिग्विजय सिंह ने कहा कि गुरु जीवन में नैतिकता, संस्कार एवं चरित्र निर्माण का मूल आधार है। उन्होंने सनातन परम्परा के प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य अपनी क्षमता एवं पुरुषार्थ के बल पर असंभव को भी संभव बना सकता है, किन्तु जीवन में सही दिशा, उचित मार्गदर्शन तथा जिज्ञासाओं के समाधान के लिए एक योग्य गुरु का सान्निध्य अनिवार्य है। उन्होंने महर्षि भर्तृहरि के नीति-साहित्य का उल्लेख करते हुए श्रेष्ठ गुरु एवं सच्चे मित्र के गुणों का भी विवेचन किया।
प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य डॉ. अभिषेक वशिष्ठ ने विषय प्रवर्तन करते हुए गुरुवंदन कार्यक्रम की आवश्यकता एवं समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अपरिचित मार्ग पर जीपीएस (GPS) व्यक्ति को सही दिशा देकर उसके गंतव्य तक पहुँचाता है, उसी प्रकार गुरु भी जीवन-पथ पर उचित मार्गदर्शन प्रदान कर व्यक्ति के सामाजिक, नैतिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने परमहंस योगानन्द के विचारों का उल्लेख करते हुए गुरु के मानवीय एवं आध्यात्मिक महत्त्व को रेखांकित किया।
विश्वविद्यालय इकाई की अध्यक्ष डॉ. संतोष कंवर शेखावत ने स्वागत उद्बोधन एवं कार्यक्रम का संचालन करते हुए भारतीय दर्शन एवं संस्कृति में गुरु-परम्परा की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु-परम्परा ने भारतीय समाज, सभ्यता एवं संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन तथा मूल्याधारित जीवन के निर्माण में सदैव महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम के अंत में इकाई सचिव डॉ. उमेश शर्मा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भारतीय समाज एवं संस्कृति के संरक्षण में गुरु-परम्परा की सतत प्रासंगिकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के उपरांत अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के “एक शिक्षक–एक वृक्ष” अभियान के अंतर्गत विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण किया गया। इस अवसर पर प्रो. दिग्विजय सिंह, प्रो. उज्ज्वल गोस्वामी, डॉ. अभिषेक वशिष्ठ, प्रो. राजाराम चोयल सहित अन्य शिक्षकों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण, जैव-विविधता संवर्धन तथा हरित परिसर के निर्माण का संदेश दिया।
इस अवसर पर जिला अध्यक्ष प्रो. नरेन्द्र कुमावत, प्रो. अनिल छंगाणी, डॉ. सीमा शर्मा, डॉ. प्रगति सोबती, डॉ. फौजा सिंह, डॉ. प्रभुदान चारण, डॉ. यशवंत गहलोत, विश्वविद्यालय के अतिथि शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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