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CBI में ज्वाइनिंग के लिए DIG का FAKE लेटर:CRPF से बर्खास्त सिपाही गिरफ्तार, दो साल से लापता होने के बाद अचानक ज्वाइन करने पहुंचा

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CBI में ज्वाइनिंग के लिए DIG का FAKE लेटर:CRPF से बर्खास्त सिपाही गिरफ्तार, दो साल से लापता होने के बाद अचानक ज्वाइन करने पहुंचा
केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल ( CRPF) कैंप बंगरसिया में बर्खास्त काॅन्स्टेबल DIG का फर्जी ज्वाइनिंग लेटर लेकर सेक्टर कार्यालय में ज्वाइन करने पहुंच गया। उसने डीआईजी के आदेश में लिखा कि उसे ज्वाइनिंग कराकर सीबीआई में पदस्थ किया जाए। लेटर में सील, साइन स्कैन किए हुए लगे मिलने पर अधिकारियों को संदेह हुआ। जांच में पाया गया कि मुख्यालय ने इस तरह का कोई ज्वाइनिंग लेटर जारी नहीं किया है। न ही ड्यूटी ज्वाइन के लिए मुख्यालय से आदेश किया गया है। अधिकारियों ने बर्खास्त सिपाही को तुरंत ही पकड़ लिया। इसके बाद मिसरोद पुलिस के हवाले कर दिया। जानकारी के मुताबिक, नागेन्द्र प्रसाद गौतम सीआरपीएफ आईजी ऑफिस एमपी सेक्टर बंगरसिया कैंप में इंस्पेक्टर हैं। उन्होंने पुलिस को दिए शिकायती आवेदन में बताया कि हीरापुर, जिला धनबाद, झारखंड निवासी विक्रम सोलंकी एमपी सेक्टर मुख्यालय के अधीन 155 बटालियन में सिपाही के पद पर पदस्थ रहा है। दो साल पहले वह अचानक गैरहाजिर हो गया। ज्वाइन के लिए उसे विभाग की तरफ से कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन उसने कभी लेटर रिसीव नहीं किया।

न ही विभाग को गैरहाजिर होने की सूचना दी। 19 जनवरी को अनुशासनिक प्राधिकारी कमाण्डेंट ने उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया। 22 दिसंबर को दोपहर करीब साढ़े 12 बजे सिपाही सीआरपीएफ पुलिस महानिरीक्षक, मध्यप्रदेश सेक्टर का पत्र लेकर पहुंचा। मुख्यालय को रिपोर्ट किया। उसने सेक्टर कार्यालय में ज्वाइन कराने का अनुरोध किया। आदेश में लिखा कि उसे सीबीआई में पदस्थ किया जाता है।
अधिकारियों को उसके पत्र से संदेह हुआ। तुरंत ही साइबर टीम से जांच कराई गई। पता चला कि विभाग की तरफ से इस तरह का कोई आदेश जारी नहीं किया गया। सख्ती करने पर उसने गुनाह कबूल लिया।

पत्नी के साथ मिलकर बनाया पत्र
आरोपी ने सीआरपीएफ अधिकारियों को पूछताछ के दौरान बताया कि आईजी के आदेश पर डीआईजी ने उसे अपील करने का पत्र मिला था। इसमें तत्कालीन डीआईजी के साइन, सील लगी थी। जिसे उसने स्कैन कर लिया। बाद में दूसरा लेटर बनाया। उसमें सीबीआई में ज्वाइनिंग का आदेश लिखकर स्कैन किए हुए डीआईजी के साइन, सील को पेस्ट कर दिया। आरोपी ने बताया कि उसकी पत्नी भी क्राइम ब्रांच में है। उसी ने ऐसा पत्र बनाने की सलाह दी थी। हालांकि पुलिस ने उसकी पत्नी को आरोपी नहीं बनाया है।
डीआईजी को दिखाई अकड़
विक्रम सोलंकी की जब करतूत पकड़ी गई तो वह अपनी गलती मानने को तैयार नहीं था। इंस्पेक्टर लेवल के अधिकारियों को धमकाता रहा। इसके बाद अधिकारी उसे डीआईजी के पास लेकर गए। वह उनके सामने भी अकड़ दिखाता रहा। डीआईजी ने जब सख्ती दिखाई तब टूट गया। बोला कि सर गलती हो गई है।

6 साल तक की नौकरी
सोलंकी करीब छह साल तक सीआरपीएफ में पदस्थ रहा है। बंगरसिया से पहले वह असम में भी पदस्थ रहा है। दो साल पहले अचानक गायब हो गया। उसका पता ही नहीं चला। हालही में उसकी पत्नी ने विभाग को पत्र लिखकर उसके बारे में बताया। पत्नी ने अपील के अनुरोध भी किया। इस पर विभाग ने सोलंकी को अपील के पत्र भेजा था। जिसे आरोपी ने स्कैन कर लिया।

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