Chetak Corps’ Community Outreach: Students of Army Public School Bikaner Bring Warmth, Empathy and Human Connection to Apna Ghar Vridhashram
Bikaner | Rajasthan Sector —
In a compassionate extension of the Indian Army’s deep-rooted commitment to nation-building and social responsibility, the students and staff of Army Public School (APS) Bikaner, under the aegis of the Chetak Corps, conducted a special community service visit to Apna Ghar Vridhashram, an old-age home that shelters elderly residents from diverse backgrounds.
What began as a scheduled outreach initiative soon transformed into a heartfelt exchange of stories, emotions, memories and life lessons — a reminder that some of the most powerful national-service efforts unfold not on battlefields but within communities where empathy, dignity and human connection matter most.
A Visit Rooted in Military Values: Duty, Respect and Seva Bhav
The Indian Army’s philosophy of “Seva Parmo Dharma” (Service is the Highest Duty) is not merely a motto, but a lived culture.
Chetak Corps — known for its operational preparedness in the desert sector — has consistently extended its influence beyond strategic zones into the social fabric of Rajasthan through sustained civic engagements.
In this tradition, APS Bikaner designed the visit to ensure that young students experience the softer, human side of service: understanding the challenges elders face, recognising societal responsibilities, and cultivating values that shape responsible citizens of the future.
A Morning Filled with Conversations, Laughter and Life Stories
As the APS Bikaner students walked into the Vridhashram courtyard, they were welcomed not as visitors, but as extended family.
The elderly residents — many of whom seldom receive regular company — opened up with a warmth that transformed the atmosphere.
Students sat beside them, held their hands, listened to their stories, and even shared small details of their own lives.
Some elderly residents recounted their youthful memories of pre-independence India, some narrated experiences of hardship and resilience, while others simply enjoyed the presence of young faces bringing energy into their day.
For many students, this was the first direct encounter with the emotional world of senior citizens living away from their families. The interaction offered them a tangible understanding of kindness, gratitude, companionship, and the deeper meaning of respect for elders — values often discussed in classrooms but rarely experienced at such depth.
Empathy in Action: Students Reflect on What It Means to Care
Teachers accompanying the students observed a noticeable transformation.
Children who initially walked into the home with curiosity soon felt a deeper sense of responsibility and connection toward the residents. A few students expressed sentiments such as:
- “I never realised how many people feel lonely even when they are surrounded by others. Today I understood the importance of spending time with them.”
- “The stories they told us will stay with me forever. They have lived lives full of challenges and strength.”
These reflections demonstrated that the visit wasn’t just a symbolic gesture — it became a learning experience that touched emotional, moral and social dimensions simultaneously.
Strengthening the Bridge Between Civilians and the Military Community
Initiatives like these reinforce the Indian Army’s silent yet powerful role in shaping community bonds in places like Bikaner, Jaisalmer, and the broader desert frontier.
APS Bikaner, run under military leadership, ensures that students grow up not just with academic excellence but with values grounded in national duty, discipline and humanity.
By enabling young minds to serve society through real experiences, the Army nurtures citizens who are compassionate, socially aware, and aligned with the ethos of inclusive nation-building.
The Empowering Role of Old-Age Homes and the Need for Social Participation
Apna Ghar Vridhashram itself stands as a beacon of dignity for elderly individuals who require support, care and companionship.
Visits like these strengthen the morale of residents, give them a renewed sense of belonging, and remind them that society has not forgotten them.
The visit subtly highlighted an important social message — that caring for senior citizens is not the responsibility of institutions alone, but of the entire community.
Students returned with a stronger understanding of this collective duty.
Conclusion: A Day That Will Last in Memory
The APS Bikaner delegation left Apna Ghar Vridhashram with smiles, blessings, and heartfelt conversations etched into their memory.
For the students, the experience marked a rare moment where they saw the world through the eyes of age, loneliness, wisdom and hope.
For the residents, it was a day when laughter echoed again through the halls, and someone listened to their stories without hurry.
Through this initiative, Chetak Corps once again demonstrated that military life is not confined to uniformed duties alone — it is equally about fostering compassion, inspiring service, and strengthening the moral character of India’s youth.
The visit may have lasted a few hours, but its emotional impact is likely to endure for years.
By Defence Journalist Sahil | T.I.N. Network
चेेतक कोर की सामाजिक पहल—आर्मी पब्लिक स्कूल बीकानेर के छात्रों ने ‘अपना घर वृद्धाश्रम’ में बुजुर्गों के बीच बांटा अपनापन, संवेदना और मानवीय जुड़ाव
बीकानेर | राजस्थान सेक्टर —
भारतीय सेना की सेवा-भावना, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र-निर्माण की गहरी परंपरा उस समय और भी प्रभावशाली हो उठती है जब वह वर्दी की सीमा से बाहर निकलकर समाज के हर उस कोने तक पहुंचती है, जहाँ संवेदनाओं की जरूरत होती है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए चेेतक कोर के संरक्षण में आर्मी पब्लिक स्कूल (APS) बीकानेर के छात्रों और स्टाफ़ ने ‘अपना घर वृद्धाश्रम’ का विशेष दौरा किया — एक ऐसा स्थान, जहाँ जीवन के आखिरी पड़ाव पर खड़े बुजुर्ग, संवेदना और साथ की सबसे अधिक अपेक्षा करते हैं।
यह यात्रा केवल एक औपचारिक सामुदायिक कार्यक्रम नहीं थी; यह वह अनुभव था जिसने छात्रों, शिक्षकों और वृद्धाश्रम के निवासियों—सभी के दिलों में मानवीय रिश्तों का एक गहरा स्पर्श छोड़ा।
सेवा परमो धर्म: सेना के मूल्यों से जन्मी पहल
भारतीय सेना का मूल दर्शन ‘सेवा परमो धर्म’ केवल शब्दों में सीमित नहीं, बल्कि व्यवहार में उतरा हुआ जीवन-मूल्य है।
चेेतक कोर, जो पश्चिमी रेगिस्तानी सेक्टर में परिचालनिक तैयारी और सामरिक क्षमता के लिए जानी जाती है, हमेशा से समाज के प्रति अपनी संवेदनशील भूमिका निभाती आ रही है। बीकानेर जैसे शहरों में सेना की मौजूदगी अनुशासन, सुरक्षा और साथ ही सामाजिक सहभागिता का प्रतीक मानी जाती है।
APS बीकानेर द्वारा आयोजित यह दौरा इसी मूल्य-व्यवस्था का विस्तार था—जहाँ नवयुवाओं को न केवल राष्ट्र-निर्माण की अवधारणाओं से परिचित कराया गया, बल्कि उन्हें मनुष्यता की उस दुनिया के बीच रखा गया जहाँ किसी के दिन को बदलने के लिए केवल थोड़ा-सा समय, थोड़ा-सा साथ और थोड़ा-सा अपनापन ही काफी होता है।
एक सुबह, जो बन गई यादों, मुस्कानों और अनुभवों से भरी
जिस क्षण APS बीकानेर के छात्र ‘अपना घर’ वृद्धाश्रम के आंगन में प्रवेश किए, वातावरण किसी उत्सव जैसा महसूस होने लगा।
बुजुर्गों ने उन्हें आगंतुक के रूप में नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों की तरह स्वागत किया। बच्चों के कदमों में जो ऊर्जा थी, उसने वृद्धाश्रम के शांत गलियारों में एक नई जीवंतता भर दी।
छात्र बुजुर्गों के पास बैठे, उनकी पुरानी यादें सुनीं, उनके संघर्षों की कहानियाँ जानीं और उनके जीवन के अनुभवों में झांकने की कोशिश की।
कई बुजुर्गों ने अपने युवावस्था के दिन साझा किए—किस तरह आज़ादी के बाद का भारत था, किस तरह उन्होंने परिवार, समाज और कठिन परिस्थितियों से जूझते हुए जीवन बिताया।
कुछ बुजुर्ग अपनी अकेलापन भरी जिंदगी के बारे में खुलकर बात कर सके, क्योंकि बच्चों ने उनके सामने केवल जिज्ञासा नहीं, बल्कि सम्मान और सहानुभूति रखी।
छात्र भी अपने बारे में बताते रहे—अपनी पढ़ाई, सपनों और रोजमर्रा के अनुभवों के बारे में। यह संवाद दो पीढ़ियों के बीच का एक ऐसा सेतु बना जिसने उम्र की दूरी को मिटा दिया।
सहानुभूति की सीख—जो किताबों में नहीं मिलती
शिक्षकों ने महसूस किया कि कुछ ही समय में बच्चों में एक उल्लेखनीय बदलाव आया।
जो छात्र शुरुआत में जिज्ञासा या औपचारिकता के भाव से आए थे, उनकी आंखों में जल्द ही स्नेह, जिम्मेदारी और समझ की गहराई दिखाई दी।
कुछ छात्रों ने भावुक होकर कहा:
“आज समझ आया कि अकेलापन कैसा लगता है। केवल समय देने से भी किसी का दिन बदल सकता है।”
“इनकी जिंदगी में कितने संघर्ष रहे हैं, लेकिन उनमें जो मजबूती है, वह हमारी पीढ़ी को सीख देती है।”
इस तरह की अभिव्यक्तियाँ बताती हैं कि यह यात्रा केवल ‘कम्युनिटी सर्विस’ नहीं थी, बल्कि एक भावनात्मक और नैतिक शिक्षा थी—वह शिक्षा जो केवल वास्तविक अनुभव से ही मिलती है।
नागरिक–सैन्य संबंधों को मजबूत करने वाला अनूठा प्रयास
चेेतक कोर की ऐसी पहलें उस व्यापक भारतीय सैन्य परंपरा को दर्शाती हैं, जिसमें सेना केवल सीमाओं की सुरक्षा ही नहीं करती बल्कि समाज के ताने-बाने को भी मजबूत बनाती है।
APS बीकानेर जैसे सैन्य-संचालित विद्यालय बच्चों को न केवल गुणवत्ता वाली शिक्षा देते हैं, बल्कि उन्हें अनुशासन, कर्तव्य, संवेदनशीलता और समाज-सेवा की भावना से भी जोड़ते हैं।
इस यात्रा ने यह संदेश दिया कि भारतीय सेना की भूमिका केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं—बल्कि वह उन मूल्यों की संरक्षक भी है, जो देश को एक बेहतर समाज बनाते हैं।
वृद्धाश्रम—सम्मान, सहारा और सामाजिक सहभागिता का प्रतीक
‘अपना घर वृद्धाश्रम’ लंबे समय से ऐसे बुजुर्गों का सहारा है जिन्हें अपनेपन, सुरक्षा और देखभाल की आवश्यकता होती है।
APS छात्रों जैसी यात्राएँ उनके मनोबल को बढ़ाती हैं, उन्हें यह अहसास दिलाती हैं कि समाज ने उन्हें भुलाया नहीं है।
यह यात्रा एक सामाजिक संदेश भी देती है—कि बुजुर्गों की देखभाल केवल संस्थाओं का दायित्व नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
छात्र जब वापस लौटे, तो वे इस जिम्मेदारी को अधिक गहराई से समझ चुके थे।
निष्कर्ष: एक दिन, जिसकी गूँज लंबे समय तक रहेगी
APS बीकानेर के छात्र जब वृद्धाश्रम से लौटे, तो वे केवल मुस्कानें ही नहीं, बल्कि अनेक आशीर्वाद, जीवन के अनुभव और भावनात्मक जुड़ाव अपने साथ लेकर लौटे।
बुजुर्गों के लिए यह वह दिन था, जब उनके किस्सों को ध्यान से सुना गया, उनकी हँसी फिर से गूँजी और उनकी आँखों में अपनापन चमका।
चेेतक कोर की यह पहल साबित करती है कि सेना की असली ताकत केवल उसके हथियारों या रणनीतियों में नहीं, बल्कि उसके मानवीय मूल्यों में भी निहित है।
यह यात्रा भले कुछ घंटों की रही हो, लेकिन इसके भावनात्मक प्रभाव वर्षों तक महसूस किए जाएंगे—छात्रों के दिलों में, और उन बुजुर्गों के मनों में, जिनके लिए यह दिन लंबे समय बाद आया एक उजला सवेरा था।







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