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मुकदमों की पैरवी में सरकार के रवैये पर हाईकोर्ट सख्त:25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया, पूछा- कब तक यही हालात बने रहेंगे

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मुकदमों की पैरवी में सरकार के रवैये पर हाईकोर्ट सख्त:25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया, पूछा- कब तक यही हालात बने रहेंगे

जयपुर

हाईकोर्ट में दायर मुकदमों में सरकारी वकीलों के पेश नहीं होने और समय पर जवाब फाइल नहीं करने के मामले में हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। जस्टिस गणेश राम मीणा की कोर्ट ने मुख्य सचिव और प्रमुख शासन सचिव विधि से व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र पेश करके यह बताने के लिए कहा है कि कब तक अदालतों में यही हालात बने रहेंगे।

दरअसल, हाईकोर्ट मुकेश कुमार मीणा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान कोर्ट के सामने आया कि इस मामले में चिकित्सा विभाग ने पिछले 5 सालों मे जवाब ही पेश नहीं किया है। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई।

कोर्ट ने कहा कि कई बार अदालत समय पर जवाब पेश नहीं करने को लेकर सरकार पर जुर्माना भी लगा चुकी है, लेकिन उसके बाद भी सरकार ने लिटिगेशन सिस्टम को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।

सरकारी रवैये को लेकर राज्यपाल तक को लिखा
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हमने सरकार के इस तरह के रवैये को लेकर पहले भी एक केस के सिलसिले में राज्यपाल को लिखा था। हो सकता है राजभवन ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए उन्हें लिटिगेशन सिस्टम को सुधारने के लिए दिशा निर्देश भी दिए हो, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकारी मशीनरी को लिटिगेशन सिस्टम औऱ कोर्ट के आदेशों की परवाह ही नहीं है।

आज भी कोर्ट के सामने कई ऐसे केसेज हैं, जिनमें नोटिस जारी हो चुके हैं, लेकिन सरकार को रिप्रजेंट करने के लिए कोई नहीं है। ऐसे हालात को देखते हुए हम मुख्य सचिव और प्रमुख शासन सचिव विधि को निर्देश देते हैं कि वह व्यक्तिगत रूप से अपना-अपना शपथ पत्र पेश करके बताएं कि इस तरह के हालात कब तक बने रहेंगे। वहीं सरकार यह भी बताए कि उसने कोर्ट के सामने सरकारी वकीलों के समय पर उपस्थित रहने और याचिकाओं में समय पर जवाब देने को लेकर क्या कदम उठाए हैं।

जुर्माने के साथ जवाब के लिए अंतिम अवसर
याचिकाकर्ता के वकील तनवीर अहमद ने बताया कि शिकायतकर्ता ने साल 2018 में हाईकोर्ट में याचिका लगाकर कहा था कि उसे मेरिट में होने के बावजूद सहायक रेडियोग्राफर के पद पर नियुक्ति नहीं दी जा रही है। कोर्ट के नोटिस जारी करने के बाद 4 अक्टूबर 2018 को तत्कालीन अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) ने कोर्ट से जवाब के लिए समय मांगा था, लेकिन जब 18 सितंबर 2019 तक मामले में जवाब पेश नहीं हुआ तो याचिकाकर्ता ने अदालत में प्रार्थना पत्र लगाकर सरकार के जवाब देने के अवसर को बंद करने के लिए कहा, लेकिन कोर्ट ने याचिकाकर्ता के प्रार्थना पत्र को खारिज करते हुए सरकार को दो सप्ताह का समय देते हुए अगली तारीख को केस इंचार्ज को पेश होने के निर्देश दिए।

उसके बाद भी 7 दिसंबर 2023 तक मामले में ना तो कोई जवाब पेश किया गया, ना ही सरकार की ओर से कोई पेश हुआ। अगली तारीख पर कोर्ट जब इस मामले में विस्तृत आदेश लिखा रही थी। उस समय एएजी जीएस गिल कोर्ट के सामने उपस्थित हुए। उन्होंने फिर से जवाब के लिए समय देने का आग्रह किया, लेकिन इस बार अदालत एक दिन का भी समय देने की इच्छुक नहीं थी, लेकिन न्याय में हित कोर्ट ने 25 हजार के जुर्माने के साथ सरकार को 2 मई तक मामले में जवाब देने का अंतिम अवसर दिया है। वहीं कोर्ट ने यह राशि अगली तारीख से पहले याचिकाकर्ता को देने के निर्देश भी दिए हैं।

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