NIA ने अटैच किए स्कूल के दो फ्लौर, चौंकाने वाली है वजह

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NIA ने अटैच किए स्कूल के दो फ्लौर, चौंकाने वाली है वजह

NIA ने बताया कि स्कूल में मुस्लिम युवाओं को भड़काने के लिए ट्रेनिंग कैंप्स का आयोजन किया जाता था।

केंद्रीय जांच एजेंसी NIA ने रविवार को पुणे स्थित एक स्कूल के दो फ्लोर सीज कर दिए। जांच एजेंसी ने स्कूल के खिलाफ यह एक्शन कैंपस का इस्तेमाल मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथी बनाने वाले कैंप आयोजित करने के लिए लिया। इतना ही नहीं, स्कूल कैंपस में आयोजित किए जाने वाले इन कैंप्स में एक विशेष संगठन और समुदाय के नेताओं के खिलाफ अटैक करने और टारगेट कीलिंग्स की भी ट्रेनिंग दिए जाने का आरोप है।

NIA की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, एंटी टेरर एजेंसी ने ब्लू बेल स्कूल की इमारत के चौथे और पांचवे फ्लोर को सीज कर दिया। NIA की तरफ से बताया कि गया कि स्कूल की इमारत का इस्तेमाल PFI के द्वारा आंतकी गतिविधियों की तैयारी करने के लिए किया जाता था।

NIA के अनुसार, PFI इस कैंपस में भोलेभाले मुस्लिम युवाओं को रिकूट करती थी। इतना ही नहीं, सीज किए गए कैंपस में मुस्लिम युवाओं को 2047 तक भारत में इस्लामिक शासन की स्थापना का विरोध करने वालों को और उन पर हमला करने के लिए उन्हें सशस्त्र और निहत्ये प्रशिक्षण भी दिया जाता था।आपको बता दें कि NIA ने इस साल 18 मार्च को दिल्ली में एक स्पेशल कोर्ट में 20 आरोपियों के खिलाफ एक चार्जशीट फाइल की थी। इस आरोपियों में PFI का नाम भी शामिल था। स्कूल के दो फ्लोर्स को सीज किए जाने का फैसला पिछले साल 22 सीतंबर को किए गए सर्च ऑपरेशन के बाद लिया। इस सर्च ऑपरेशन के दौरान NIA के कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए थे। इस दस्तावजों के जरिए ही यह पता चला कि इस प्रॉपर्टी का इस्तेमाल PFI द्वारा अपने कैडर को आर्म्स ट्रेनिंग दिए जाने के लिए किया जाता था।NIA ने बताया कि ट्रेनिंग कैप्स के जरिए PFI निर्दोष मुस्लिम युवाओं को सरकार और एक विशेष समुदाय के नेताओं और संगठनों के खिलाफ भड़काने का काम करता था। ट्रेनिंग कैंप्स में नए रिकूट्स को चाकू, हंसिया जैसे हथियार चलाना सिखाया जाता था, जिससे समुदाय विशेष के नेताओं के खिलाफ हमले किए जा सके। जांच एजेंसी ने कहा कि आरोपियों की पहचान PFI के सीनियर कैडर, NEC सदस्य, अकाउंटेंट, PFI के बैंक खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं के रूप में की गई है। मामले में अन्य आरोपी व्यक्तियों और संदिग्धों की भूमिका का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है। आपको बता दें कि PFI को सितंबर 2022 में सरकार ने बैन कर दिया था।

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