चांद-मंगल मिशन के लिए बने स्टारशिप का कामयाब टेस्ट:दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट के साथ स्टारशिप स्पेस में गया, फिर हिंद महासागर में उतरा

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चांद-मंगल मिशन के लिए बने स्टारशिप का कामयाब टेस्ट:दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट के साथ स्टारशिप स्पेस में गया, फिर हिंद महासागर में उतरा

टेक्सास

चांद-मंगल मिशन के लिए बने दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट स्टारशिप का चौथा टेस्ट सक्सेसफुल रहा। इसे आज यानी, 5 जून को टेक्सास के बोका चिका से शाम 6.20 बजे लॉन्च किया गया। इसमें स्टारशिप को स्पेस में ले जाने के बाद वापस पृथ्वी पर लाया गया और पानी में लैंडिंग कराई जाएगी।

इस बार के टेस्ट का मेन गोल यह देखना था कि स्टारशिप पृथ्वी के वातावरण में एंट्री के दौरान सर्वाइव कर पाती है या नहीं। स्पेसएक्स ने X पर पोस्ट कर बताया कि पानी में लैंडिंग सक्सेसफुल रही। स्टारशिप के रोमांचक चौथे उड़ान परीक्षण के लिए पूरी स्पेसएक्स टीम को बधाई!

दुनिया के दूसरे सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने इस रॉकेट को बनाया है। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट और सुपर हैवी बूस्टर को कलेक्टिवली ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। इस व्हीकल की ऊंचाई 397 फीट है। ये पूरी तरह से रीयूजेबल है और 150 मीट्रिक टन भार ले जाने में सक्षम है। स्टारशिप सिस्टम 100 लोगों को एक साथ मंगल ग्रह पर ले जा सकेगा।

लॉन्चिंग के करीब 7 मिनट बाद सुपर हैवी बूस्टर की गल्फ ऑफ मैक्सिको में लैंडिंग हुई।

लॉन्चिंग के करीब 7 मिनट बाद सुपर हैवी बूस्टर की गल्फ ऑफ मैक्सिको में लैंडिंग हुई।

01 घंटे 05 मिनट 48 सेकेंड का था चौथा टेस्ट
यह मिशन 1:05 घंटे का था। इस टेस्ट में स्टारशिप को स्पेस में ले जाया गया, फिर पृथ्वी पर वापस लाकर पानी पर लैंड कराया गया। यह एक रीयूजेबल ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम है। स्टारशिप में 6 रैप्टर इंजन लगे हैं, जबकि सुपर हैवी में 33 रैप्टर इंजन है।

  • 00:00:02 लिफ्टऑफ
  • 00:01:02 मैक्स क्यू (रॉकेट पर पीक मैकेनिकल स्ट्रेस)
  • 00:02:41 सुपर हेवी MECO (अधिकांश इंजन बंद)
  • 00:02:45 हॉट-स्टेजिंग (स्टारशिप रैप्टर इग्निशन और स्टेज सेपरेशन)
  • 00:02:49 सुपर हेवी बूस्टबैक बर्न स्टार्टअप
  • 00:03:52 सुपर हेवी बूस्टबैक बर्न शटडाउन
  • 00:03:54 हॉट-स्टेज जेटीसन
  • 00:06:39- सुपर हेवी ट्रांसोनिक
  • 00:06:43- सुपर हेवी लैंडिंग बर्न स्टार्टअप
  • 00:07:04- सुपर हेवी लैंडिंग बर्न शटडाउन
  • 00:08:23- स्टारशिप इंजन कटऑफ
  • 00:47:25- स्टारशिप एंट्री
  • 01:03:11- स्टारशिप ट्रांसोनिक
  • 01:04:01- स्टारशिप सबसोनिक
  • 01:05:38- लैंडिंग फ्लिप
  • 01:05:43- लैंडिंग बर्न
  • 01:05:48- एक्साइटिंग लैंडिंग!

तीसरा टेस्ट: रीएंट्री के बाद स्टारशिप से संपर्क टूटा
स्पेसएक्स ने कहा कि स्टारशिप रीएंट्री के दौरान सर्वाइव नहीं कर पाई, लेकिन उसने उड़ान के दौरान कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। वहीं एलन मस्क ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस साल आधा दर्जन स्टारशिप उड़ान भरेंगी।

  • स्टारशिप ने ऑर्बिट में पहुंचने के बाद पेलोड डोर को खोला और बंद किया।
  • रॉकेट के भीतर दो टैंकों के बीच कई टन तरल ऑक्सीजन को मूव किया।
  • स्टारशिप की पृथ्वी के वातावरण में रीएंट्री कराई, लेकिन संपर्क टूट गया।
तीसरे टेस्ट में लॉन्चिंग के 46 मिनट बाद स्टारशिप ने पृथ्वी के वातावरण में रीएंट्री की थी, जब रॉकेट 65 Km ऊपर था तब उसका संपर्क टूट गया।

तीसरे टेस्ट में लॉन्चिंग के 46 मिनट बाद स्टारशिप ने पृथ्वी के वातावरण में रीएंट्री की थी, जब रॉकेट 65 Km ऊपर था तब उसका संपर्क टूट गया।

दूसरा टेस्ट: स्टेज सेपरेशन के बाद खराबी आ गई थी
स्टारशिप का दूसरा टेस्ट 18 नवंबर 2023 को शाम करीब 6:30 बजे किया गया था। लॉन्चिंग के करीब 2.4 मिनट बाद सुपर हैवी बूस्टर और स्टारशिप का सेपरेशन हुआ। बूस्टर को वापस पृथ्वी पर लैंड होना था, लेकिन 3.2 मिनट बाद 90 Km ऊपर यह फट गया।

वहीं स्टारशिप तय प्लान के अनुसार आगे बढ़ गया। करीब 8 मिनट बाद पृथ्वी से 148 Km ऊपर स्टारशिप में भी खराबी आ गई, जिस कारण उसे नष्ट करना पड़ा। फ्लाइट टर्मिनेशन सिस्टम के जरिए इसे नष्ट किया गया था।

दूसरे टेस्ट में रॉकेट और स्टारशिप को अलग करने के लिए पहली बार हॉट स्टैगिंग प्रोसेस का इस्तेमाल किया गया था, जो पूरी तरह सक्सेसफुल रही थी। सभी 33 रैप्टर इंजनों ने भी लॉन्च से सेपरेशन तक ठीक से फायर किया था।

स्पेसएक्स ने स्टारशिप को टेक्सास के बोका चिका में स्टारबेस से लॉन्च किया था।

स्पेसएक्स ने स्टारशिप को टेक्सास के बोका चिका में स्टारबेस से लॉन्च किया था।

33 रैप्टर इंजनों की पावर से स्टारशिप ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी थी।

33 रैप्टर इंजनों की पावर से स्टारशिप ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी थी।

हॉट स्टैगिंग प्रोसेस के जरिए रॉकेट बूस्टर और स्टारशिप को अलग किया गया था।

हॉट स्टैगिंग प्रोसेस के जरिए रॉकेट बूस्टर और स्टारशिप को अलग किया गया था।

बूस्टर को वापस पृथ्वी पर लैंड होना था, लेकिन 90 Km ऊपर यह फट गया था

बूस्टर को वापस पृथ्वी पर लैंड होना था, लेकिन 90 Km ऊपर यह फट गया था

पहला टेस्ट: लॉन्चिंग के 4 मिनट बाद विस्फोट हो गया था
20 अप्रैल 2023 को स्टारशिप का पहला ऑर्बिटल टेस्ट किया गया था। इस टेस्ट में बूस्टर 7 और शिप 24 को लॉन्च किया गया था। उड़ान भरने के 4 मिनट बाद ही मेक्सिको की खाड़ी के पास 30 किलोमीटर ऊपर स्टारशिप में विस्फोट हो गया था।

स्टारशिप के फेल होने के बाद भी एलन मस्क और एम्प्लॉइज खुशी मना रहे थे। ऐसा इसलिए क्योंकि रॉकेट का लॉन्च पैड से उड़ना ही बड़ी सफलता थी। मस्क ने लॉन्चिंग से दो दिन पहले कहा था- सफलता शायद मिले, लेकिन एक्साइटमेंट की गारंटी है।

स्टारशिप ने 20 अप्रैल को पहली टेस्ट उड़ान भरी थी। इसके 4 मिनट बाद मेक्सिको की खाड़ी के करीब 30 किलोमीटर ऊपर इसमें विस्फोट हो गया था।

स्टारशिप ने 20 अप्रैल को पहली टेस्ट उड़ान भरी थी। इसके 4 मिनट बाद मेक्सिको की खाड़ी के करीब 30 किलोमीटर ऊपर इसमें विस्फोट हो गया था।

स्टेज सेपरेशन में आई थी परेशानी
स्पेसएक्स ने कहा था- सेपरेशन स्टेज से पहले ही इसका एक हिस्सा अचानक अलग हो गया, जबकि यह तय नहीं था। इस तरह के एक टेस्ट के साथ हम जो सीखते हैं, उससे सफलता मिलती है। आज का टेस्ट हमें स्टारशिप की रिलायबिलिटी में सुधार करने में मदद करेगा। टीमें डेटा को रिव्यू करना जारी रखेंगीं और अगले फ्लाइट टेस्ट की दिशा में काम करेंगीं।

स्टारशिप सिस्टम

  • हाइट: 397 फीट
  • डायामीटर: 9 मीटर
  • पेलोड कैपेसिटी: 100-150 मीट्रिक टन

स्टारशिप क्या-क्या कर सकता है?

  • पेलोड डिलीवरी
  • मून मिशन्स
  • अर्थ-टु-अर्थ ट्रांसपोर्टेशन
  • इंटरप्लेनेटरी ट्रांसपोर्टेशन

स्टारशिप इंसानों को मंगल पर पहुंचाएगा
ये लॉन्चिंग इसलिए अहम है, क्योंकि ये स्पेसशिप ही इंसानों को इंटरप्लेनेटरी बनाएगा। यानी इसकी मदद से पहली बार कोई इंसान पृथ्वी के अलावा किसी दूसरे ग्रह पर कदम रखेगा। मस्क 2029 तक इंसानों को मंगल ग्रह पर पहुंचाकर वहां कॉलोनी बसाना चाहते हैं। स्पेसशिप इंसानों को दुनिया के किसी भी कोने में एक घंटे से कम समय में पहुंचाने में भी सक्षम होगा।

मंगल ग्रह पर कॉलोनी बसाने की क्या जरूरत?
मंगल ग्रह पर कॉलोनी बसाने की जरूरत पर एलन मस्क कहते हैं- ‘पृथ्वी पर एक लाइफ एंडिंग इवेंट मानवता के अंत का कारण बन सकता है, लेकिन अगर हम मंगल ग्रह पर अपना बेस बना लेंगे तो मानवता वहां जीवित रह सकती है।’ करोड़ों साल पहले पृथ्वी पर डायनासोर का भी अंत एक लाइफ एंडिंग इवेंट के कारण ही हुआ था। वहीं, प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग ने भी 2017 में कहा था कि अगर इंसानों को सर्वाइव करना है तो उन्हें 100 साल के भीतर विस्तार करना होगा।

आर्टेमिस प्रोग्राम का हिस्सा है स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट
इस मिशन का सक्सेसफुल होना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम का हिस्सा है। इसके जरिए 5 दशक बाद चंद्रमा पर मनुष्यों की वापसी होगी। स्टारशिप चंद्रमा पर मिशन के अंतिम चरण को पूरा करेगा। एस्ट्रोनॉट को स्पेसक्राट से लूनर ऑर्बिट तक ले जाएगा और चंद्रमा पर लैंडिंग भी कराएगा।

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