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US में हाई लेवल मीटिंग करेंगे NSA डोभाल, परमाणु समझौते के बाद दूसरी सबसे अहम बैठक

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल इनीशिएटिव फॉर क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (ICET) पर पहली हाई लेवल मीटिंग के तहत अपने अमेरिकी समकक्ष जेक सुलिवन सहित शीर्ष अमेरिकी नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण बातचीत करेंगे. अधिकारियों, स्कॉलर्स और उद्योग के विशेषज्ञों का मानना ​​है कि भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के बाद यह वार्ता भारत-अमेरिका संबंधों में अगला, बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है. डोभाल आईसीईटी के लिए सोमवार को वाशिंगटन पहुंचेंगे.
आईसीईटी (ICET) बैठक के एजेंडे को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है. इस बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी 31 जनवरी को व्हाइट हाउस में दोनों पक्षों के बीच बैठक की समाप्ति के बाद दिए जाने की संभावना है. भारत और अमेरिका को उम्मीद है कि यह बैठक दोनों देशों के कॉरपोरेट क्षेत्रों के बीच एक विश्वसनीय भागीदार पारिस्थितिकी तंत्र के विकास की नींव रखेगी, ताकि स्टार्टअप की संस्कृति से फल-फूल रही सार्वजनिक-निजी साझेदारी पर जोर देने वाले दोनों देश वैज्ञानिक अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तानाशाही हुकूमतों के कारण उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकें.
टॉफ ऑफिशियल्स के साथ अमेरिका पहुंचे डोभाल
मई 2022 में तोक्यो में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की द्विपक्षीय मुलाकात के बाद जारी एक संयुक्त बयान में पहली बार आईसीईटी का जिक्र किया गया था. डोभाल असामान्य रूप से बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिका पहुंच रहे हैं, जिसमें सचिव स्तर के पांच अधिकारी और उन भारतीय कंपनियों का कॉरपोरेट नेतृत्व शामिल है, जो भारत में कुछ अत्याधुनिक अनुसंधान कर रहे हैं.
ISRO अध्यक्ष, पीएम के वैज्ञानिक सलाहकर भी पहुंचे
एनएसए के साथ अमेरिका जाने वाले सचिव स्तर के पांच अधिकारियों में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष एस सोमनाथ, प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद, रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार जी सतीश रेड्डी, दूरसंचार विभाग के सचिव के राजाराम और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के महानिदेशक समीर वी कामत शामिल हैं.
किफायती टेक्नॉलिजी प्रदान कराना है लक्ष्य
आईसीईटी के तहत दोनों देशों ने सहयोग के छह क्षेत्रों की पहचान की है. दोनों देशों के बीच सहयोग सह-विकास और सह-उत्पादन के सिद्धांत पर आधारित होगा, जिसे धीरे-धीरे क्वाड (अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान का रणनीतिक समूह), फिर नाटो (उत्तर एटलांटिक संधि संगठन) फिर यूरोप और बाकी दुनिया में विस्तारित किया जाएगा. इसका मकसद बाकी दुनिया को ऐसी अत्याधुनिक टेक्नॉलिजी प्रदान करना है, जो तुलनात्मक रूप से काफी सस्ती हों. भारत और अमेरिका ने आईसीईटी के तहत सहयोग के लिए जिन छह क्षेत्रों की पहचान की है, उनमें वैज्ञानिक अनुसंधान एवं विकास, क्वांटम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमता), रक्षा नवाचार, अंतरिक्ष तथा 6जी और सेमीकंडक्टर जैसी उन्नत संचार पद्धतियां शामिल हैं.

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