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ब्यूरोक्रेसी को अनूपगढ़ की ज्यादा चिंता:पीने को मिला 3000 क्यूसेक पानी, सिंचाई में जा रहा 800, गांवों में पौंड से हो रही सप्लाई

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ब्यूरोक्रेसी को अनूपगढ़ की ज्यादा चिंता:पीने को मिला 3000 क्यूसेक पानी, सिंचाई में जा रहा 800, गांवों में पौंड से हो रही सप्लाई

बीकानेर

अधिकारियों और नेताओं का अनूपगढ़ को 1500 क्यूसेक पानी देने का दबाव। - Dainik Bhaskar

अधिकारियों और नेताओं का अनूपगढ़ को 1500 क्यूसेक पानी देने का दबाव।

लाेकसभा चुनाव के कारण पानी पर पर्दे के पीछे सियासत का खेल चल रहा है। राजस्थान में नहरबंदी नहीं हाेगी। पानी की कमी पश्चिमी राजस्थान में न हो इसके लिए 3000 क्यूसेक पानी पीने के लिए दिया जा रहा है। इसमें 800 क्यूसेक पानी भाखड़ा याेजना में सिंचाई के काम लिया जा रहा। इसके कारण नतीजा यह है कि बीकानेर, जैसलमेर समेत कई जिलाें के गांवाें काे पाैंड से पीने से पानी दिया जा रहा है।

दरअसल नहरबंदी 20 मार्च से शुरू हाेनी थी। 20 मार्च से 19 अप्रैल तक आंशिक और 20 अप्रैल से 19 मई तक पूर्ण मगर इसके लिए पंजाब से अधिकृत नाेटिफिकेशन जारी हाेना था जाे अब तक जारी नहीं हुआ। बिना किसी आदेश के नहरबंदी ना करने का निर्णय लागू हाे गया।

19 अप्रैल तक पीने के लिए 3000 क्यूसेक पानी देने का एक पत्र चीफ इंजीनियर हनुमानगढ़ ने जारी किया। हरिके बैराज से राजस्थान काे 3000 क्यूसेक पानी मिलना शुरू हाे गया। अफसाेस की बात ये है कि पीने के पानी से हनुमानगढ़ जाेन काे चीफ इंजीनियर मनमानी कर रहे हैं। 800 क्यूसेक पानी भाखड़ा में सिंचाई के काम लिया जा रहा।

बचेे 2200 क्यूसेक में पीने की रोजमर्रा की जरूरत पूरी हाे रही लेकिन दिक्कत वहां ज्यादा है जहां नहराें की वरीयता 20 दिन पहले आई थी। बीकानेर, चूरू, नागाैर, जैसलमेर, बाड़मेर और जाेधुपर के गांवाें काे पानी की कमी पूरी करने के लिए पाैंड खाली किए जाने लगे। सवाल उठता है कि पीने के पानी का उपयाेग सिंचाई में क्याें हाे रहा। इसपर मुख्यमंत्री और सिंचाई मंत्री क्यों खामोश हैं। जयपुर में मुख्य सचिव से लेकर जल संसाधन विभाग के अधिकारियाें ने भी यहां के हालात जानने बंद कर दिए। इस सबके बीच बीकानेर के किसानाें सर्वाधिक परेशानी हो रही है।

नहरी पानी से सियासत बदलने का लंबा इतिहास
नहरी पानी का पूरा हाेल्ड हनुमानगढ़ चीफ इंजीनियर के पास हाेता है। इसलिए बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जाेधपुर, चूरू, नागाैर और सीकर तक इसका असर हाेता है। भाखड़ा और अनूपगढ़ सिर्फ श्रीगंगानगर तक ही असर छाेड़ती है। ऐसे में अगर पीने के पानी का दाे तिहाई हिस्सा वहां उपयाेग में आया ताे बाकी सीटाें पर गहरा असर हाेगा। पानी पर सियासत का लंबा इतिहास रहा है। घड़साना आंदाेलन उसकी बानगी है।

ब्यूराेक्रेसी काे अनूपगढ़ की ज्यादा चिंता

पीने के पानी से एक तरफ ताे भाखड़ा में सिंचाई हाे रही ऊपर से अब अनूपगढ़ ब्रांच में पानी चलाने का दबाव नहर अभियंताओं पर है। 800 क्यूसेक भाखड़ा सिंचाई में उपयाेग कर रहा। जबकि एक बड़े ब्यूराेक्रेट अनूपगढ़ ब्रांच में 1500 क्यूसेक पानी चलाने का दबाव बना रहे हैं।

अगर अनूपगढ़ में 1500 क्यूसेक पानी चला गया ताे बाकी 9 जिलों के लोग पानी के लिए तरस जाएंगे। अगर ऐसा हुआ तो चलते लाेकसभा चुनाव में भाजपा काे बीकानेर, जाेधपुर, बाड़मेर, नागाैर, चूरू और सीकर लाेकसभा सीट पर असर डालेगा। राहत सिर्फ एक श्रीगंगागनर सीट के लाेगाें काे मिलेगी।

“भाखड़ा काे ताे 1200 क्यूसेक पानी चाहिए। हम 800 इसलिए दे रहे हैं। उनकी बारी है। देना मजबूरी है। अनूपगढ़ मुद्दे को रेग्युलेशन विंग को देखना है। मैं मानता हूं कि कुछ जगह पाैंड से निकालकर पीने का पानी दिया जा रहा है। रेग्युलेशन विंग वालाें काे इस बारे में निर्णय करना होगा।”
-अमरजीत मेहरड़ा, चीफ इंजीनियर हनुमानगढ़

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