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वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम:सीमावर्ती गांवों के युवाओं को बीएसएफ दे रहा प्री रिक्रूटमेंट ट्रेनिंग

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वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम:सीमावर्ती गांवों के युवाओं को बीएसएफ दे रहा प्री रिक्रूटमेंट ट्रेनिंग

बीकानेर

पाक की हरकतों को रोकने में मदद करेंगे युवक, सेना में जाने के रास्ते खुलेंगे। - Dainik Bhaskar

पाक की हरकतों को रोकने में मदद करेंगे युवक, सेना में जाने के रास्ते खुलेंगे।

राजस्थान की पश्चिमी सरहद के गांवों में रहने वाले युवाओं को प्री रिक्रूटमेंट ट्रेनिंग दी जा रही है। बीएसएफ ने बीकानेर के सरहदी इलाकों में रहने वाले 80 युवाओं को शारीरिक और दिमागी तौर पर तैयार किया है। ताकि वे सीमा की सुरक्षा में योगदान देने के साथ ही वे अपने लिए एक बेहतर विकल्प चुन सकें। केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत एलएसी के बाद राजस्थान की पश्चिमी सरहद पर बसे युवा भी पाक की नापाक हरकतों को रोकने में बीएसएफ के मददगार बनेंगे।

ऐसा पहली बार है जब बॉर्डर के 5 गांवों के 80 युवाओं को प्री रिक्रूटमेंट ट्रेनिंग के जरिए केंद्रीय सुरक्षा बल और केंद्रीय अर्द्ध सैनिक बलों में जाने की राह दिखाई जा रही है। इसकी जिम्मेदारी बीएसएफ में तीन बटालियनों को दी गई है। अलादीन, 33केजेडी गांव 114 बटालियन, गोकुलगढ़ 124 बटालियन, 16केएनडी और 21 केएनडी के युवाओं को 140 बटालियन के जवान ट्रेनिंग दे रहे हैं।

इस दौरान युवाओं को रोज सुबह फिजिकल एक्सरसाइज, योगासन के बाद जनरल अवेयरनेस, मेंटल एप्टिट्यूड, मैथेमेटिक्स, कंप्यूटर, इंग्लिश ग्रामर भी पढ़ाई जाती है। इनमें स्कूल, कॉलेज छात्रों के अलावा वे युवा भी हैं। बीएसएफ बीकानेर सेक्टर के डीआईजी अजय लूथरा ने बताया कि सिविक एक्शन प्रोग्राम सालभर चलता है, जिसमें गांव के स्कूली बच्चों को अध्ययन सामग्री और खेलकूद के लिए किट दिए जाते हैं। उसी के तहत इन युवाओं को भी स्पोर्ट्स किट और स्टडी मेटेरियल दिया गया है।

फिजिकली फिट होने पर ही चयन होता है
प्री रिक्रूटमेंट ट्रेनिंग के लिए युवाओं के चयन का आधार फिजिकल फिटनेस और मेंटल एप्टिट्यूड है। बीएसएफ के अधिकारी ट्रेनिंग के इच्छुक युवाओं को पहले परखते हैं। परीक्षा में पास होने के बाद ही उसे सलेक्ट किया जाता है।

क्या है विलेज वाइब्रेंट प्रोग्राम
यह एक केंद्रीय वित्तपोषित कार्यक्रम है। जिसे सीमावर्ती गांवों को विकसित करने और वहां के निवासियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लक्ष्य के साथ पिछले साल लागू किया था। इसमें हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्र शामिल किए गए थे। अब इसे राजस्थान की पश्चिमी सीमा पर शुरू किया गया है।

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