सूडसर गाँव का बीए पास प्रकाश कुमावत मात्र 21 वर्ष की उम्र में बना सॉफ्टवेर इंजिनियर, अपने गुरु पुखराज प्रजापत को दिया अपनी सफलता का श्रेय

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बीकानेर। शरीर से दिव्यांग और अनपढ़ किसान राजू राम जी ने कभी ये नहीं सोचा होगा की उसकी कोई संतान शहरों से दूर बसे इन गाँवों से निकलकर कभी टेक्नोलॉजी की दुनिया में दस्तक देगी लेकिन ये कारनामा कर दिखाया उनके तीनों बेटों में सबसे छोटे बेटे प्रकाश ने | BA पास राजू ने मात्र 20 वर्ष की उम्र में जयपुर की प्रोविस टेक्नोलॉजीस बतौर सॉफ्टवेर इंजिनियर ज्वाइन किया है | इतनी कम उम्र में और बिना सॉफ्टवेर या इंजीनियरिंग की डिग्री लिए प्रकाश ने जो किया है वो ये साबित करता है इंसान चाहे तो वो क्या नहीं कर सकता | लेकिन प्रकाश इसका सारा अपने गुरु श्री पुखराज प्रजापत को देते हैं वो कहते हैं की हमारे गुरु ही है जो हमारे द्वारा इस प्रकार के कारनामे करवा सकते हैं वरना हम अकेले ऐसा कुछ नहीं कर सकते | प्रकाश बताते हैं की उनको सबसे पहली बार बाबूलाल जी ने पुखराज सर से मिलवाया था और कहा था की अगर वाकई में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक शानदार करियर बनाना है तो पुखराज सर पूरे मनोयोग से अनुसरण करना और उनके द्वारा कई वर्षों की रिसर्च के आधार पर बनाये गए ट्रेनिंग प्रोग्राम को फॉलो करना | गौरतलब है की श्री बाबूलाल स्वयं पुखराज सर से ट्रेनिंग लेकर आज मास्टर इंडिया कंपनी में एक बड़े पद पर कार्यरत है एवं वो स्वयं भी मात्र 12 वीं पास है |
प्रकाश बताते हैं की मैं रोजाना गाँव सूडसर से रेल में बीकानेर आता था और वहाँ से कभी टैक्सी तो कभी पैदल की क्लास की तरफ जाता | क्लास पूरी होने का बाद मैं शाम को फिर रेल से ही गाँव जाता | लगभग डेढ़ साल चला ये सफ़र बहुत ही थका देने वाला था | कई बार परिवार वालों को ऐसा लगा की मैं किसी दिवास्वप्न के पीछे भाग रहा हूँ, ऐसा शायद ही होता होगा लेकिन मेरा विश्वास कभी भी नहीं डगमगाया | टेक्नोलॉजी एक ऐसा क्षेत्र है जिसको सीखने और सफलतापूर्वक काम करने के लिए एक विशेष प्रकार की मानसिक दक्षता चाहिए, लेकिन पुखराज सर के नेतृत्व और मार्गदर्शन में इतनी मजबूती है की जहाँ भी हमें समस्या आती पुखराज सर हमें अपने अलग ही अंदाज में उस समस्या से सामना करना सिखाते | अपने ट्रेनिंग पीरियड के दौरान मैंने वेब टेक्नोलॉजीज में कई प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज और प्लेटफॉर्म्स सीखे और देखते ही देखते मैं एक फुल स्टैक डेवलपर बन गया | आज मैं किसी भी वेब एप्लीकेशन के सर्वर साइड और फ्रंट एंड पर काम करके उसको सफलतापूर्वक बना सकता हूँ |

प्रकाश के साथ ही प्रोविस टेक्नोलॉजीस बतौर सॉफ्टवेर इंजिनियर ज्वाइन करने वाले रविन्द्र गेधर भी कला संकाय में स्नातक है और बताते हैं की मेरी जॉब लगने पर एक बार को परिवार में किसी को भी विश्वास नहीं हुआ, लेकिन मेरी बहनों और मेरे गुरु श्री पुखराज प्रजापत को हमेशा से ही मुझपर विश्वास था | प्रशिक्षण काल के दौरान एक-दो बार मेरा विश्वास डगमगाया था लेकिन पुखराज सर ने मुझे हौंसला दिया | आज मेरा परिवार मेरी इस सफलता से बहुत खुश है | लेकिन मैं इसे सफलता नहीं बल्कि सफलता की राह में एक सौपान मानता हूँ क्योंकि मेरे सपने काफी बड़े हैं | और अब बड़े सपने देखने से मुझे डर नहीं लगता ना ही आत्मविश्वास की कमी महसूस होती है |

टेक्नोलॉजी इंस्ट्रक्टर श्री पुखराज प्रजापत ने बातचीत के दौरान बताया की इंजीनियरिंग करते हुए मुझे समझ आया की अगर सही से पढाया और प्रशिक्षित किया जाए तो टेक्नोलॉजी को हर कोई सीख सकता है और इस पर महारत हासिल करके अपना करियर बना सकता है, और जब मझे ये पता चला की विश्व की सबसे बड़ी सॉफ्टवेर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के मालिक बिल गेट्स स्वयं 12 वीं पास है तब तो मेरा इरादा और भी पक्का हो गया | बाद में मुझे पता चला की एप्पल कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स भी मात्र 12 वीं पास है लेकिन उन्होंने पूरे विश्व को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बहुत बड़ी सौगातें दी है |

बीकानेर की शीर्ष सॉफ्टवेर कंपनी सनआर्क टेक्नोलॉजी में कभी टीम लीड रहे श्री पुखराज प्रजापत ने बताया की मेरा मानना है की शिक्षा प्रैक्टिकल और रोजगार परक होनी चाहिए साथ ही पढ़ने और प्रशिक्षण के तरीकों पर भी शौध होना चाहिए | हम देख रहे हैं की भारत में शिक्षा का स्तर काफी गिरा हुआ है | हाल ही में विश्व की बड़ी सॉफ्टवेर कंपनियों में से एक इनफ़ोसिस के संस्थापक श्री नारायणमूर्ति ने हल ही में अपने एक इंटरव्यू में कहा था की हर साल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले विद्यार्थियों में मात्र 20% ही कुछ काम करने लायक बन पाते हैं | वहीँ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ते जा रहे हैं लेकिन अभी भी भारत में कुशल सॉफ्टवेर इंजिनियर्स की कमी है जो हमारी इकॉनमी के लिए भी काफी नुकसानदायक है | कॉलेज में सिर्फ परीक्षा पास करने के लिए पढ़ाया जा रहा है लेकिन कौशल विकास नहीं हो पा रहा | स्केलर अकैडमी के संस्थापक अंशुमन सिंह, जो मार्क जकर्बर्ग के साथ facebook में काम कर चुके हैं बताते हैं की भारत के कई महाविद्यालयों में आज भी 17 साल तक पुराना syllebus पढाया जा रहा है जो स्टूडेंट और युवा पीढ़ी के साथ एक धोखे की तरह है |
सॉफ्टवेर कंपनी जी-एक्सॉन के संस्थापक एवं एन्ग्रामर्स इंस्टिट्यूट में एजुकेशन डायरेक्टर श्री पुखराज प्रजापत ने बताया की मैं मानता हूँ की हमें युवा पीढ़ी के साथ उसको सही तरह से शिक्षित एवं प्रशिक्षित करके उसे सफलता की राह दिखानी चाहिए | जब हम किसी को जीवन में आगे बढ़ने के लिए मदद करते हैं को हम समाज में समृद्धि, खुशहाली और परिवारों में एक दिया जलाने का काम करते हैं | प्रकाश के माता-पिता आज इस बात को अच्छी तरह से अनुभव कर रहे होंगे |
पुखराज प्रजापत ने बताया की किसी भी युवा को अगर किसी भी प्रकार के मार्गदर्शन की आवश्यकता हो तो वो मुझसे कभी भी संपर्क कर सकता है |

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