अब कैंप में ड्यूटी नहीं ले सकेंगे कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर:शासन सचिव बोले- पहले स्कूलों में ड्यूटी दें; बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं करें

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अब कैंप में ड्यूटी नहीं ले सकेंगे कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर:शासन सचिव बोले- पहले स्कूलों में ड्यूटी दें; बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं करें

महात्मा गांधी स्कूल्स में कम्प्यूटर लेब शुरू हो चुके हैं। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar

महात्मा गांधी स्कूल्स में कम्प्यूटर लेब शुरू हो चुके हैं। (फाइल फोटो)

राज्य सरकार ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत कम्प्यूटर इंस्ट्रक्टर को किसी भी सरकारी कैंप में ड्यूटी के लिए रिलीव नहीं करने के आदेश दिए गए हैं। पिछले लंबे समय से स्कूल में नियुक्त कम्प्यूटर इंस्ट्रक्टर मुख्यमंत्री डिजिटल सेवा केंद्रों पर क्लर्क का कार्य कर रहे हैं, जबकि स्कूल में कम्प्यूटर धूल फांक रहे हैं।

ऐसे तो बच्चाें का भविष्य खराब हो जाएगा- शासन सचिव जैन

इस मामले में को शासन सचिव नवीन जैन ने गंभीरता से लेते हुए सभी कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि वो स्कूल में लगे कम्प्यूटर इंस्ट्रक्टर को किसी कैंप में ड्यूटी पर नहीं लगाएं। जैन ने कलेक्टर को लिखा है कि अगर कैंप में कम्प्यूटर इंस्ट्रक्टर नहीं होगा तो काम थोड़ा प्रभावित होगा। लेकिन स्कूल में अगर इंस्ट्रक्टर नहीं होगा तो बच्चों का भविष्य खराब होगा।

जिन विद्यालयों में कम्प्यूटर लैब संचालित हो रहे हैं, वहां से किसी भी इंस्ट्रक्टर को कैंप में आगे से ड्यूटी नहीं दी जाएगी। अगर कलेक्टर स्तर पर इस आशय का आदेश जारी होता है तो प्रिंसिपल इन इंस्ट्रक्टर को रिलीव नहीं करेंगे। आदेश में संभावना छोड़ी गई है कि अगर स्कूल में कम्प्यूटर लैब संचालित नहीं हो रही है और वहां इंस्ट्रक्टर है तो उसे कैंप में लगाया जा सकता है।

खुद ड्यूटी लगवा रहे इंस्ट्रक्टर

बता दें कि राज्य सरकार ने हाल ही में प्रदेशभर में कम्प्यूटर इंस्ट्रक्टर की नियुक्ति की है। खासकर महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में कम्प्यूटर लैब शुरू की गई है लेकिन यहां कार्यरत टीचर्स को प्रशासन कम्प्यूटर इंस्ट्रक्टर के बजाय ऑपरेटर की तरह उपयोग में ले रहा है।

इन टीचर्स की ड्यूटी सरकारी ऑफिस में लग रही है। यहां तक कि जिला शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में भी इनकी ड्यूटी लग रही है। गांवों में स्थित स्कूल में कार्यरत इंस्ट्रक्टर स्वयं इस तरह की ड्यूटी लगवा रहे हैं ताकि स्कूल नहीं जाना पड़े। इसी कारण आदेश शिक्षा निदेशक के बजाय शिक्षा सचिव की ओर से जारी किए गए हैं

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