एमजीएसयू : ट्रांसफाॅरमैंटिक जर्नी ऑफ भारत ड्यूरिंग लास्ट डिकेड विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आगाज

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ट्रांसफाॅरमैंटिक जर्नी ऑफ भारत ड्यूरिंग लास्ट डिकेड विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आगाज शनिवार को महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय प्रांगण में हुआ। कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के माल्यार्पण के साथ की गयी। अध्यक्षीय संबोधन में महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित द्वारा ट्रांसफाॅरमैशन शब्द के अर्थ व प्रयोग के बारे में बताया ।
यूनिवर्सिटी मीडिया प्रभारी डाॅ. मेघना शर्मा ने प्रेस को बताया कि अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति ने साझा किया कि भारत आज विभिन्न मंचों पर अपनी शक्ति के अनुभव को प्रदर्शित कर रहा है। उन्होंने संगोष्ठी में होने वाली चर्चाओं से सहभागियों को प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इस अवसर पर संगोष्ठी स्मारिका का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, सिरसा के कुलपति प्रो. अजमेर सिंह मलिक ने भारत के स्थापना की परंपरा सांस्कृतिक वातावरण में निरंतर व्याप्त रही है, उन्होंने कहा कि भारत अनाधिकाल से सनातन रहा हैं और कुरूतियों को समाप्त कर अच्छाईयों की ओर अग्रसर हैं। हमारी संस्कृति इतिहास परंपरा पर किसी एक विचारधारा का आधिपत्य नहीं हैं। हम अपने दायित्वों को बखूबी से निर्वहन कर रहे हैं।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता एवं भारतीय राजनीति विज्ञान के महासचिव प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने अपने उदबोधन में कहा कि राजनीति विज्ञान परिषद के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए आजादी के बाद भारत के विकास की अवधारणा पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी के विशिष्ठ अतिथि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शिक्षाविद् प्रो. कौशल किशोर मिश्रा ने थार इंडिया से भारत की यात्रा पर प्रकाश डाला, उन्होने कहा कि भारत का रामराज्य, भारत की चेतना, आत्मा, विकास एवं ज्ञान की खोज ही नहीं अपितु आध्यात्मिक मानवता को कोशता हैं। बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अम्बरीशशरण विद्यार्थी ने कहा कि विश्व ने भारत को जो आज महत्व दिया हैं, यह उसकी दक्षता के फलस्वरूप मिला हैं। इस बात की आवश्यकता हैं कि हम अपने समाज को बढावा दें, अपने संसाधनों को नयी दृष्टि से उपयोग करे।
संगोष्ठी के प्रारंभ में आयोजन सचिव डाॅ. बबिता जैन ने अतिथियों का स्वागत करते हुये संगोष्ठी की रूपरेखा पर प्रकाश डाला तथा धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी समन्वयक प्रो. साधना भंडारी द्वारा किया गया। संगोष्ठी में आज चार तकनीकी सत्र आयोजित हुये।

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