करप्शन के आरोपी नेता BJP में गए और जांच रुकी:सबसे ज्यादा नेता महाराष्ट्र के, पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर

‘आज आनंद का दिन है। राज्य के एक वरिष्ठ नेता BJP में शामिल हो रहे हैं। अशोक चव्हाण दो बार सांसद रहे हैं। उनके आने से महाराष्ट्र में BJP और महायुति मजबूत हुई है। ये रातोंरात लिया फैसला नहीं है। बहुत दिनों से सोच-विचार चल रहा था। अब अशोक चव्हाण का क्या रोल होगा, ये केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा।’
महाराष्ट्र के डिप्टी CM देवेंद्र फडणवीस ने ये बात कांग्रेस से BJP में आए सीनियर लीडर अशोक चव्हाण के लिए कही। तारीख थी 13 फरवरी। 14 फरवरी को BJP ने अशोक चव्हाण को राज्यसभा के लिए कैंडिडेट घोषित कर दिया।
अशोक चव्हाण आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाले में आरोपी हैं और ED-CBI उनके खिलाफ जांच कर रही हैं। 8 दिसंबर, 2008 से 9 नवंबर, 2010 तक महाराष्ट्र के CM रहे अशोक चव्हाण को इसी घोटाले की वजह से कुर्सी छोड़नी पड़ी थी।
उस वक्त महाराष्ट्र सरकार ने युद्ध में शहीद सैनिकों और रक्षा मंत्रालय के स्टाफ के लिए रिहायशी बिल्डिंग बनाने का फैसला लिया था। इसे कोलाबा में आदर्श हाउसिंग सोसायटी नाम से बनाया गया।
RTI से खुलासा हुआ कि इसके फ्लैट अफसरों और नेताओं को बहुत कम कीमत पर दे दिए गए। 8 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में भारतीय अर्थव्यवस्था पर श्वेत पत्र पेश कर UPA की सरकार में हुए जो बड़े घोटाले बताए, उसमें भी आदर्श घोटाले का जिक्र था।
अब प्रधानमंत्री के दो बयान पढ़िए, जो उन्होंने अशोक चव्हाण पर दिए थे
पहला बयान
तारीख: 6 अप्रैल, 2019, जगह: नांदेड, महाराष्ट्र
‘महाराष्ट्र में किस तरह इन्होंने एक ‘आदर्श सोसायटी’ बनाने की कोशिश की है। शहीदों के परिवार को धोखा दिया था। इससे नांदेड और पूरा भारत भली-भांति परिचित है। आप जानते हैं न वो कौन है। इस तरह के घोटालों पर नजर रखने के लिए ही हमारी सरकार ने रेरा कानून बनाया है। इससे पहले जैसे काले धन का खेल होता था, वह भी कम हुआ है।’
दूसरा बयान
तारीख: 30 मार्च, 2014, जगह: नांदेड, महाराष्ट्र
‘अशोक चव्हाण को लोकसभा का टिकट देना क्या कोई कार्रवाई है। इनकी ‘बेशर्मी’ की हद तो देखो कि कांग्रेस पार्टी कह रही है कि उन्हें (अशोक चव्हाण को) कोई चुनाव लड़ने से नहीं रोक सकता। कांग्रेस के पास सारे ‘आदर्श’ उम्मीदवार हैं।’
‘इन्होंने मां भारती की रक्षा करने वाले शहीदों की विधवाओं को लूटने का काम किया। मैं नांदेड और गुरु गोबिंद सिंह की पवित्र भूमि पर आज शपथ लेकर जाता हूं कि करगिल के शहीदों के परिवार को जिन्होंने लूटा है, उनको नई सरकार छोड़ेगी नहीं।’
प्रधानमंत्री के अलावा महाराष्ट्र के मौजूदा डिप्टी CM देवेंद्र फडणवीस भी कई बार मंच से अशोक चव्हाण पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा चुके थे। उन्होंने ही BJP ऑफिस में चव्हाण को पार्टी की सदस्यता दिलवाई।
सिर्फ अशोक चव्हाण ही नहीं, बीते कुछ साल में कई नेता दूसरी पार्टियों से BJP में शामिल हुए, जिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप थे। ED, CBI और दूसरी सेंट्रल एजेंसियां उनकी जांच कर रहीं थीं।
अब विपक्ष आरोप लगा रहा है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस पॉलिसी की बात करने वाली BJP दागियों को अपनी वॉशिंग मशीन में धोकर पार्टी में शामिल कर रही है। उनके खिलाफ चल रही जांच ठंडे बस्ते में डाली जा रही है।
दैनिक भास्कर ने 15 ऐसे नेताओं और उनसे जुड़े केस की डिटेल निकाली। फिर केस का स्टेटस पता किया। पढ़िए ये रिपोर्ट।
सबसे पहले महाराष्ट्र के नेता
महाराष्ट्र के मौजूदा डिप्टी CM अजित पवार का नाम 70 हजार करोड़ रुपए के सिंचाई घोटाले के आरोपियों में शामिल था। ये घोटाला 1999 से 2009 तक अजित पवार के सिंचाई मंत्री रहते हुआ था। एंटी करप्शन ब्यूरो ने नवंबर, 2018 में अजित पवार को इस घोटाले के लिए जिम्मेदार ठहराया था।
23 नवंबर, 2019 को अजित पवार ने चाचा शरद पवार से बगावत कर BJP से गठबंधन कर लिया और डिप्टी CM बन गए। हालांकि, ये गठबंधन 80 घंटे ही चल पाया और सरकार गिर गई। अजित पवार वापस अपनी पार्टी NCP में लौट गए। इसके बाद अक्टूबर, 2020 में सिंचाई घोटाले से जुड़ी सारी फाइलें बंद कर दी गईं।
अक्टूबर, 2022 को इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने कोर्ट में कहा कि वे फिर से घोटाले की जांच करना चाहते हैं। ED ने भी महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले में अजित पवार के खिलाफ केस दर्ज किया और पूछताछ के लिए नोटिस भेजा।
2 जुलाई, 2023 को अजित पवार NCP तोड़कर मौजूदा शिंदे सरकार में शामिल हो गए। इस बार भी उन्हें डिप्टी CM का पद मिला। केस दर्ज होने के बावजूद ED ने उन्हें कभी पूछताछ के लिए नहीं बुलाया।
महाराष्ट्र के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री और NCP नेता छगन भुजबल महाराष्ट्र विकास अघाड़ी सरकार में इसी पद पर थे। वे अजित पवार के साथ 2 जुलाई, 2023 को महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार का हिस्सा बने। BJP सांसद किरीट सोमैया ने भुजबल पर महाराष्ट्र सदन घोटाले का आरोप लगाया था।
किरीट सोमैया की शिकायत पर छगन भुजबल और उनके भतीजे समीर भुजबल को 2016 में गिरफ्तार भी किया गया था। भुजबल 18 महीने जेल में रहे। हालांकि, सबूत न मिलने पर 9 सितंबर, 2021 को उन्हें बरी कर दिया। 2019 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उन पर अब भी 7 केस दर्ज हैं, जिसमें धोखाधड़ी और डकैती जैसे गंभीर मामले हैं।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे कांग्रेस में थे, तब BJP नेता उन्हें राज्य का सबसे भ्रष्ट नेता कहते थे। 2016 में BJP सांसद किरीट सोमैया ने ED के जॉइंट डायरेक्टर सत्यब्रत कुमार को लेटर लिखकर राणे और उनके परिवार की कंपनियों की जांच की मांग की थी।
नारायण राणे पर अविघना ग्रुप के मालिक और बिल्डर कैलाश अग्रवाल के साथ मिलकर 300 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप था। ED ने मामले में जांच शुरू की और कांग्रेस छोड़ने से पहले नारायण राणे को पूछताछ के लिए नोटिस भी दिया था।
राणे ने 21 सितंबर, 2017 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। फिर महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष नाम से एक संगठन बनाया और 15 अक्टूबर, 2019 को इसका विलय BJP में कर दिया। इससे पहले 9 अप्रैल, 2019 को ED ने अविघना समूह के खिलाफ चल रही जांच बंद कर दी थी।
ED ने अपनी प्राइमरी रिपोर्ट में कहा कि अविघना ग्रुप और नारायण राणे के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत नहीं मिले हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि राणे को BJP में लाने के लिए केस बंद किया गया। राणे के खिलाफ ED की जांच तेज करने के लिए सोशल एक्टिविस्ट केतन तिरोड़कर ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी।
2009 से 2014 तक महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के विधायक रहे प्रवीण दरेकर पर 2015 में मुंबई कोऑपरेटिव बैंक में 123 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगा था। केस की जांच फाइनेंशियल ऑफेंस ब्रांच को सौंपी गई।
प्रवीण दरेकर पर आम आदमी पार्टी के नेता धनंजय शिंदे की शिकायत पर केस दर्ज किया गया था। आरोप था कि दरेकर खुद को मजदूर बताकर लेबर फेडरेशन का चुनाव लड़ते रहे और अध्यक्ष चुने गए। ऐसा करके उन्होंने सरकार और मुंबई जिला केंद्रीय सहकारी बैंक को धोखा दिया है। उनके कार्यकाल में 123 करोड़ रुपए की गड़बड़ी हुई।
2016 में दरेकर BJP में शामिल हो गए। उन्हें पार्टी ने विधान परिषद भेज दिया। 2022 में दरेकर को क्लीन चिट मिल गई। वे अभी मुंबई कोऑपरेटिव बैंक सोसायटी के अध्यक्ष हैं।
कांग्रेस-NCP की सरकार में मंत्री रहे विजय कुमार गावित पर 2004 से 2012 के बीच आदिवासी विकास विभाग की योजनाओं में 6 हजार करोड़ रुपए के गबन का आरोप था। महाराष्ट्र के एंटी करप्शन ब्यूरो ने गावित के खिलाफ जांच शुरू की और उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा। 2014 में गावित BJP में शामिल हो गए।
उनकी बेटी डॉ. हिना गावित को BJP ने नंदूरबार लोकसभा सीट से टिकट दिया था। 15 अप्रैल, 2015 को महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया कि एंटी करप्शन ब्यूरो ने सबूतों के अभाव में विजय कुमार गावित को क्लीन चिट दे दी है।
NCP में रहे बबनराव पचपुते 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले सितंबर में BJP में शामिल हो गए थे। फिलहाल वे अहमदनगर की श्रीगोंडा सीट से विधायक हैं। 2019 में चुनाव आयोग को दिए हलफनामे के मुताबिक, बबनराव पर 27 क्रिमिनल केस दर्ज हैं।
BJP सांसद किरीट सोमैया ने आरोप लगाया था कि भारी रिटर्न देने के नाम पर राज्य में 26 पोंजी स्कीम चलाकर बबनराव ने 10 लाख लोगों को ठगा। उन पर हत्या की कोशिश जैसे आरोप भी हैं, पर उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना में शामिल मंत्री संजय राठौड़ को BJP ने पहले मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री बनाया था। संजय राठौड़ का नाम पुणे की टिकटॉक स्टार पूजा चव्हाण के सुसाइड केस में आया था। मरने से पहले पूजा ने संजय से फोन पर बात की थी।
संजय राठौड़ तब वन मंत्री थे। उन्होंने 28 फरवरी, 2021 को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। संजय राठौड़ उद्धव ठाकरे की महाविकास अघाड़ी सरकार में मंत्री थे। 30 जून, 2022 को राठौड़ ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ मंत्री पद की शपथ ली। 10 जुलाई, 2022 को एकनाथ शिंदे ने मीडिया में दिए बयान में कहा कि राठौड़ को महाराष्ट्र पुलिस ने क्लीन चिट दे दी है।
24 मई, 2022 को शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और BMC के पूर्व चेयरमैन यशवंत जाधव और उनकी पत्नी विधायक यामिनी जाधव को फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, यानी फेमा के तहत ED ने पूछताछ के लिए बुलाया था।
इससे पहले 25 फरवरी, 2022 को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने भी जाधव के घर पर रेड की थी। इसके बाद महाराष्ट्र में सरकार बदली, तो जाधव और उनकी पत्नी BJP के साथ आ गए। इसके बाद उन्हें ED ने कभी पूछताछ के लिए नहीं बुलाया और न ही इनकम टैक्स की टीम उनके घर पहुंची।
अब बंगाल के नेता
अभी पश्चिम बंगाल में BJP के सबसे बड़े चेहरे शुभेंदु अधिकारी कभी ममता सरकार में कद्दावर मंत्री थे। इसी दौरान CBI ने शारदा घोटाले में उनसे पूछताछ शुरू की थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने शारदा ग्रुप के डायरेक्टर सुदीप्त सेन से फेवर लिया था। शुभेंदु बाद में पत्रकार सैमुअल मैथ्यू के नारदा स्टिंग ऑपरेशन में भी पैसा लेने के आरोप में फंसे थे। 2017 में ED ने उनके खिलाफ जांच शुरू की थी।
तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि शुभेंदु जब TMC में थे, तब एजेंसियां उनके खिलाफ जांच कर रही थीं। 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले BJP में जाते ही उन्हें क्लीन चिट मिलने लगी। नारदा स्टिंग मामले में ED ने सितंबर, 2021 में चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें शुभेंदु अधिकारी का नाम नहीं था।
2022 में ममता बनर्जी की सरकार बनने के बाद बंगाल पुलिस ने शुभेंदु के खिलाफ शारदा घोटाले में जांच शुरू की। शुभेंदु अभी पश्चिम बंगाल विधानसभा में BJP विधायक दल के नेता, यानी नेता प्रतिपक्ष हैं।
आसनसोल के कद्दावर नेता और पूर्व मेयर जितेंद्र तिवारी को CBI ने नवंबर, 2020 में कोयला तस्करी केस में आरोपी बनाया था। इसके बाद ED ने प्रिवेंशन मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज कर उनके खिलाफ जांच शुरू की।
2 मार्च, 2021 को जितेंद्र TMC छोड़ BJP में शामिल हो गए। वे 2011 से TMC में थे। उनके BJP में शामिल होने से पहले तब केंद्र में मंत्री रहे बाबुल सुप्रियो ने इसका विरोध किया था। सुप्रियो ने कहा था कि कोयला चोर और तस्करों को पार्टी में लाने से नुकसान होगा।
सुप्रियो ने फेसबुक पर लिखा था कि कोयला तस्करी केस में CBI की कार्रवाई के बाद कुछ नेता BJP में आने की जुगत लगा रहे हैं। मैं ऐसा होने नहीं दूंगा। इसके बावजूद BJP हाईकमान ने तिवारी की एंट्री को हरी झंडी दे दी थी।
2015 में पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय पर पैसे लेकर शारदा घोटाले में फंसी चिटफंड कंपनी का फेवर करने का आरोप लगा था। मार्च, 2017 को कोलकाता हाईकोर्ट ने केस CBI को सौंप दिया। जांच शुरू ही हुई थी कि मुकुल ने नवंबर, 2017 को BJP जॉइन कर ली। उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया।
2019 में मुकुल रॉय ने दावा किया कि CBI ने इस मामले में उन्हें क्लीन चिट दे दी है और गवाह के तौर पर सिर्फ पूछताछ की थी। 2021 में मुकुल रॉय BJP छोड़कर फिर से तृणमूल में शामिल हो गए।
कोलकाता के मेयर रह चुके सोवन चटर्जी 2014 में हुए नारदा स्टिंग ऑपरेशन के आरोपी थे। CBI उनके खिलाफ जांच कर रही थी। 14 अगस्त, 2019 को सोवन चटर्जी BJP में शामिल हो गए। करीबन दो साल तक BJP में रहे। विधानसभा चुनाव का टिकट न मिलने पर नाराजगी जताते हुए 21 मार्च, 2021 को उन्होंने BJP छोड़ दी।
इसके बाद 22 मई, 2021 को उन्हें CBI ने हाउस अरेस्ट कर लिया था। हालांकि, एक दिन में ही उन्हें जमानत मिल गई थी। कांग्रेस और तृणमूल ने आरोप लगाया कि BJP में रहने के दौरान सोवन पर कार्रवाई नहीं हुई। पार्टी छोड़ते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
गुजरात, कर्नाटक और असम के नेता
पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल पर BJP सरकार के दौरान राजद्रोह समेत 30 केस दर्ज हुए थे। इसकी वजह से हार्दिक को तड़ीपार भी रहना पड़ा था। हार्दिक गुजरात चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल हो गए थे।
कांग्रेस का आरोप है कि राजद्रोह केस में बचने के लिए हार्दिक ने BJP जॉइन की है। ज्यादातर केस में वे बरी हो चुके हैं। देशद्रोह केस में गुजरात हाईकोर्ट ने 21 अक्टूबर, 2023 को उनका अरेस्ट वारंट खारिज कर दिया था। जनवरी, 2024 में सबूत न मिलने पर हार्दिक को हेट स्पीच के एक केस से बरी कर दिया गया था। हार्दिक अभी वीरमगाम से विधायक हैं।
कांग्रेस की तरुण गोगोई सरकार में वित्त मंत्री रहे हिमंत बिस्वा सरमा को CBI ने शारदा चिटफंड घोटाले में आरोपी बनाया था। सरमा पर आरोप था कि उन्होंने शारदा ग्रुप के डायरेक्टर सुदीप्त सेन से हर महीने 20 लाख रुपए लिए, ताकि ग्रुप का कामकाज बेरोकटोक चलता रहे।
अगस्त, 2014 में हेमंत के गुवाहाटी वाले घर पर CBI ने रेड मारी थी। CBI की एक टीम गुवाहाटी के एक मीडिया हाउस के दफ्तर में भी गई। इस संस्थान की प्रमुख हेमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भूयान सरमा हैं।
हेमंत से आखिरी बार CBI ने 27 नवंबर, 2014 को पूछताछ की थी। इसके बाद उन्होंने अगस्त, 2015 में BJP जॉइन कर ली। तब कांग्रेस नेता शशि थरूर ने आरोप लगाया था कि BJP ने हेमंत की फाइल बंद कर दी है। हेमंत बिस्वा सरमा अभी असम के मुख्यमंत्री हैं। BJP में शामिल होने के बाद CBI ने उन्हें कभी पूछताछ के लिए नहीं बुलाया।
2008 में कर्नाटक में BJP की सरकार बनी और बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बने। येदियुरप्पा पर 2011 में 40 करोड़ रुपए लेकर अवैध खनन को शह देने का आरोप लगा था। लोकायुक्त ने उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया था। इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। मई 2012 में हाईकोर्ट ने येदियुरप्पा के खिलाफ CBI जांच का आदेश दिया।
2012 में येदियुरप्पा BJP से अलग हो गए। 2013 का चुनाव उन्होंने अलग पार्टी बनाकर लड़ा था। इससे BJP को बहुत नुकसान पहुंचा और पार्टी सिर्फ 40 सीटें जीत पाई। 2008 के चुनाव में उसे 110 सीटें मिली थीं।
2014 के लोकसभा चुनाव से पहले येदियुरप्पा वापस BJP में आ गए। इसके बाद 2016 में CBI की स्पेशल कोर्ट ने येदियुरप्पा समेत 13 आरोपियों को क्लीन चिट दे दी। येदियुरप्पा के दो बेटे भी इस केस में आरोपी थे।
संजय राऊत बोले- BJP कांग्रेस का शुद्धिकरण कर रही
अशोक चव्हाण के BJP में शामिल होने पर उद्धव गुट के नेता संजय राऊत कहते हैं, ‘प्रधानमंत्री ने नांदेड में शहीदों के अपमान के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की बात कही थी। आज उन्हीं अशोक चव्हाण को BJP ने पार्टी में शामिल कर लिया है।’
‘सारे भ्रष्टाचारियों को अपने साथ शामिल करके BJP नई तरह की राजनीति कर रही है। उसे अब कांग्रेस मुक्त भारत की घोषणा बदल देनी चाहिए। कांग्रेस में जिन-जिन लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, उन्हें अपने साथ करके BJP ने कांग्रेस का शुद्धिकरण शुरू कर दिया है।
NCP ने कहा- दागी नेता BJP में शामिल हुए और सारे सवाल बंद
NCP (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो कहते हैं, ‘BJP उन लोगों पर ज्यादा दबाव बनाती है, जिन पर पहले से करप्शन के आरोप हैं। महाराष्ट्र में उनके नेता किरीट सोमैया सभी दागियों पर सवाल उठाते रहे हैं।’
दैनिक भास्कर ने अशोक चव्हाण के BJP में शामिल होने पर किरीट सोमैया से बात की, पर उन्होंने सवाल सुनकर फोन काट दिया।
ED अधिकारी बोले- जांच के दौरान कभी पॉलिटिकल प्रेशर नहीं पड़ा
विपक्ष आरोप लगाता है कि सेंट्रल एजेंसियां केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रही हैं। इन आरोपों पर हमने ED के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर सतेंद्र सिंह से बात की। वे कहते हैं, ‘मैंने UPA और NDA, दोनों की सरकार में नौकरी की और 2019 में रिटायर हुआ। मैं 2G स्कैम जैसे हाई प्रोफाइल कैस से भी जुड़ा रहा, लेकिन मुझ पर कभी पॉलिटिकल प्रेशर नहीं पड़ा।’
अशोक चव्हाण के पास जेल और BJP में से एक को चुनने की मजबूरी थी
सीनियर जर्नलिस्ट अशोक वानखेड़े कहते हैं, ‘ED और CBI की वजह से ही अशोक चव्हाण ने BJP जॉइन की है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के अलावा अशोक चव्हाण को सभी पद दिए थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने पाला बदला है।’












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