कुत्ता 2-मिनट तक 6 महीने की मासूम को चबाता रहा:मां दौड़ी तो चेहरे पर खून था, पालने में सो रही बच्ची का चेहरा खा गया, डेढ़ घंटे तक तड़पती रही

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कुत्ता 2-मिनट तक 6 महीने की मासूम को चबाता रहा:मां दौड़ी तो चेहरे पर खून था, पालने में सो रही बच्ची का चेहरा खा गया, डेढ़ घंटे तक तड़पती रही

भीलवाड़ा

भीलवाड़ा से 80 किमी दूर गुलाबपुरा थाने के रिमोट एरिया हाजियास गांव में 6 माह की बच्ची के चेहरे को स्ट्रीट डॉग 2 मिनट तक बुरी तरह काटता रहा। उसने घर के पीछे बने नोहरे के बाहर पेड़ से बंधे पालने में सो रही बच्ची का गाल समेत जबड़ा ही उखाड़ दिया। बच्ची की मां 20 मीटर दूर ही बने नोहरे में गाय-भैंसों में चारा देने के बाद बांध रही थी। उसकी मां ने कुत्ते का खून से सना हुआ चेहरा देखा तो उसके होश उड़ गए। भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल जाने तक बच्ची तड़पती रही और 1 घंटे चले ऑपरेशन के बाद बच्ची ने दम तोड़ दिया।

महात्मा गांधी हॉस्पिटल के पीएमओ डॉ अरुण गौड़ के अनुसार, जब बच्ची को उसके चाचा यहां लाए तो अचेत थी और एक तरफ के चेहरे का आधा हिस्सा ही गायब था। कुत्ते ने इतनी बेरहमी से हमला किया था कि बच्ची शॉक में थी।

इस पूरे घटनाक्रम के चश्मदीद बच्ची के चाचा ने हादसे की पूरी घटना बताई-

चिंकी के पिता लहरू जाट मध्य प्रदेश में कंस्ट्रक्शन का काम करते हैं। लहरू की तीन बेटियों में चिंकी सबसे छोटी थी। दो बेटियां अंजलि (10) और चंचल (6) उस वक्त घर के अंदर थीं।

चिंकी के पिता लहरू जाट मध्य प्रदेश में कंस्ट्रक्शन का काम करते हैं। लहरू की तीन बेटियों में चिंकी सबसे छोटी थी। दो बेटियां अंजलि (10) और चंचल (6) उस वक्त घर के अंदर थीं।

कुत्ते का मुंह खून से सना था

चिंकी के चाचा राजमल जाट ने बताया- घर के पीछे ही एक नोहरा बना है जहां गाय-भैंसों को बांधते हैं। सर्दियों की शाम थी तो अंधेरा जल्दी हो जाता है ऐसे में भाभी छोटी देवी 4 बजे के करीब भैसों को चारा देकर उन्हें बांधने गई थी। इससे पहले ही उन्होंने पास ही में पेड़ पर एक चुन्नी के सहारे 6 माह की चिंकी को पालना बना कर सुला दिया था। नोहरा उस जगह से महज 20 मीटर की दूरी पर है। आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई कुत्ता या जानवर में घुसा हो और हमला किया हो। पर अचानक उस दिन ये हादसा हो गया।

बच्ची को डॉग से उसके चाचा राजमल जाट ने ही छुड़वाया था। वहीं चिंकी को भीलवाड़ा अस्पताल ले गए थे।

बच्ची को डॉग से उसके चाचा राजमल जाट ने ही छुड़वाया था। वहीं चिंकी को भीलवाड़ा अस्पताल ले गए थे।

करीब 20 मिनट बाद ही उनको चिंकी के रोने की आवाज सुनाई दी। वो भागकर बाहर आई तो देखा एक कुत्ता 2 फीट ऊंचे बांधे चुन्नी के पालने में मुंह घुसाए गुर्रा रहा था। भाभी शोर मचाते हुए कुत्ते की तरफ दौड़ी। कुत्ते ने कुछ सैकेंड के लिए अपना मुंह बहार किया तो उन्हें मुंह पर खून लगा नजर आया और वो लगातार चुन्नी के पालने में सो रही 6 माह की चिंकी को लगातार नोच रहा था। भाभी ने आवारा कुत्ते को 2 मिनट तक भगाने का प्रयास किया लेकिन उसने मासूम को नहीं छोड़ा।। वो जोर से चिल्लाई और कुत्ते को भगाने की कोशिश करने लगी।

6 माह की मासूम चिंकी इसी पेड़ के सहारे लाल चुन्नी से बने पालने में सो रही थी। घर के पीछे का बाड़ा खुले होने से स्ट्रीट डॉग अंदर घुस आया था।

6 माह की मासूम चिंकी इसी पेड़ के सहारे लाल चुन्नी से बने पालने में सो रही थी। घर के पीछे का बाड़ा खुले होने से स्ट्रीट डॉग अंदर घुस आया था।

इतने में शोर गुल सुना तो मैं भी भाग कर बाहर आया। पहले तो समझ नहीं आया कि हुआ क्या है?

इसके बाद भाभी को कुत्ते से जूझते देखा और चुन्नी की तरफ देखा तो मामला समझ आया। मैंने डंडा उठाकर कुत्ते की तरफ दौड़ा और उसे भगाया। जिस दरवाजे से वो आया था उसी से वापस भाग गया।

मैंने जैसे ही भतीजी चिंकी को देखा तो खून बह रहा था और उसके शरीर में कोई हरकत नहीं थी। मैं तुरंत उसे लेकर भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल की तरफ रवाना हुआ। हमारे गांव से अस्पताल की दूरी लगभग 80 किमी रही होगी। अस्पताल पहुंचते ही चिंकी को डॉक्टर्स ऑपरेशन थिएटर में ले गए। इधर, जैसे ही गांव वालों को घटना की सूचना मिली। वे चिंकी के घर के बाहर आ गए और कुत्ते को ढूंढ कर उसे डंडों से पीट-पीट कर मार डाला।

डॉग इसी रास्ते से अंदर आया था। परिजनों का कहना है कि बाड़े का दरवाजा खुला था और इसी के जरिए डॉग अंदर आ गया।

डॉग इसी रास्ते से अंदर आया था। परिजनों का कहना है कि बाड़े का दरवाजा खुला था और इसी के जरिए डॉग अंदर आ गया।

तड़पती रही, शॉक में थी बच्ची

महात्मा गांधी हॉस्पिटल के पीएमओ डॉ अरुण गौड़ ने बताया- स्ट्रीट डॉग्स की लार में मौजूद वायरस न्यूरोलॉजिकल सिस्टम पर अटैक करता है। इस केस में फेस पर बाइट किया गया है जो खतरे का सबसे बड़ा कारण है। फेस पर बाइट करने से इसका स्प्रेड न्यूरोलॉजिकल सिस्टम को जल्दी इंवॉल्व करता है जिससे बॉडी में ऑटोनॉमिक डिस्टरबेंस हो जाते हैं।

दूसरा फेस पर काटा तो ब्लीडिंग भी हुई थी और बच्ची शॉक में थी। उसके आधा चेहरा खराब हो गया था। यहां पहुंचते-पहुंचते ही वो शॉक में आ गई थी। इससे पहले रास्ते में बच्ची ने कितना दर्द सहा इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है।

डॉग के मासूम को इतनी जोर से जबड़े पर खाया था कि वह बेहोश हो गई। डॉक्टरों के अनुसार, डॉग अटैक के बाद बच्ची शॉक में थी।

डॉग के मासूम को इतनी जोर से जबड़े पर खाया था कि वह बेहोश हो गई। डॉक्टरों के अनुसार, डॉग अटैक के बाद बच्ची शॉक में थी।

इन कारणों से करते हैं स्ट्रीट डॉग्स हमला

डॉक्टर एके सिंह डिप्टी डायरेक्टर पॉलीक्लिनिक कॉलेज भीलवाड़ा का कहना है-

  • शिकारी का नियम है कि वो कमजोर आदमी पर जल्दी अटैक करता है। छोटे बच्चों पर हमले करने का भी यह एक रीजन है। क्योंकि उनको देखने पर बच्चे भागते हैं।
  • इस समय थोड़ा सा ब्रीडिंग सीजन है, फीमेल जो डॉग्स हैं वो बच्चे देती हैं तो सुरक्षा की भावनाओं से और ब्रीडिंग सीजन में थोड़ा डॉग्स एग्रेसिव हो जाते हैं।
  • वहीं इस केस में बच्ची को चुन्नी के पालने सुलाया गया था ऐसे में हो सकता है डॉग उसमें खाने की कोई चीज सूंघते हुए पहुंचा हो।
  • या डॉग के आने पर बच्ची लगातार हाथ-पैर हिला रही हो तो डॉग को खतरा महसूस हुआ और उसने हमला कर दिया। इसमें स्पेसिफिक कोई चीज नहीं कही जा सकती, लेकिन कारण इन्हीं में से एक है।
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