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केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन इरानी और शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने टॉयकैथॉन-2021 के ग्रैंड फिनाले का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया: टॉयकैथॉन-2021 का लक्ष्य भारत को 100 बिलियन अमरीकी डॉलर के वैश्विक खिलौना विनिर्माण बाजार में स्थान दिलाना है

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केंद्रीय महिला एवं बाल विकास और वस्त्र मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन इरानी और शिक्षा राज्य मंत्री श्री संजय धोत्रे ने आज टॉयकैथॉन-2021 के ग्रैंड फिनाले का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। श्री अमित खरे, सचिव, उच्च शिक्षा, शिक्षा मंत्रालय; श्री उपेंद्र प्रसाद सिंह, सचिव, कपड़ा मंत्रालय; प्रो. अनिल डी. सहस्रबुद्धे, अध्यक्ष, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद-एआईसीटीई; डॉ. अभय जेरे, मुख्य इनोवेशन अधिकारी, इनोवेशन इकाई, शिक्षा मंत्रालय; डॉ. एम.पी. पूनिया, उपाध्यक्ष, एआईसीटीई और डॉ. मोहित गंभीर, निदेशक, इनोवेशन इकाई, शिक्षा मंत्रालय, उद्घाटन सत्र में उपस्थित थे।टॉयकैथॉन-2021 का आयोजन शिक्षा मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से पांच अन्य मंत्रालयों-महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय के समन्वय से किया जा रहा है। यह अंतर-मंत्रालयी टॉयकैथॉन स्थानीय सामग्रियों का उपयोग करके नए और अभिनव खिलौनों की अवधारणा पर केंद्रित है जो भारतीय और वैश्विक, दोनों बाजारों के लिए असाधारण उच्च गुणवत्ता के साथ किफायती, सस्ते, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल हैं।इस अवसर पर अपने सम्बोधन में श्रीमती स्मृति जुबिन इरानी ने उस क्षण को ऐतिहासिक बताया जब देश का पहला खिलौना हैकैथॉन दुनिया को समर्पित किया जा रहा है। बाल विकास मंत्री ने टॉयकैथॉन 2021 में विचार प्रस्तुत करने वाली 17749 व्यक्तिगत टीमों की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस टॉयकैथॉन ग्रैंड फिनाले के दौरान प्रस्तुत किए गए बहुत सारे विचारों का व्यवसायीकरण किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि खिलौनों का बच्चों की साइकोमोटर क्षमताओं पर बहुत प्रभाव पड़ता है, उनकी स्मृति कौशल पर प्रभाव पड़ता है और बच्चे की भविष्य की स्वायत्तता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ी जिम्मेदारी पैदा होती है।उन्होंने चिंता व्यक्त की कि हमारे बच्चे जिन 85 प्रतिशत खिलौनों के साथ खेल रहे हैं, वे आयातित हैं और मुख्य रूप से प्लास्टिक से बने हैं। सतत विकास के लिए प्रधानमंत्री की वैश्विक प्रतिबद्धता से प्रेरणा लेते हुए, श्रीमती इरानी ने स्थायी खिलौने बनाने के लिए अनुसंधान निकायों और खिलौना निर्माताओं को आमंत्रित किया। उन्होंने यह भी सलाह दी कि भारत अपनी अभियांत्रिकी क्षमता के लिए जाना जाता है और हमारे प्रौद्योगिकीविदों को इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के लिए खिलौना क्षेत्र को पर्याप्त और नवीन तकनीकों से सुसज्जित करना चाहिए।शिक्षा राज्य मंत्री श्री धोत्रे ने कहा कि भारतीय खिलौना बाजार लगभग 1.5 बिलियन अमरीकी डॉलर का है और वर्तमान में हम विदेशों से एक बड़ा हिस्सा आयात कर रहे हैं। वैश्विक खिलौना बाजार 100 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। हमें इन क्षेत्रों में अपना हिस्सा रखने के लिए अपनी रचनात्मक, नवीन और विनिर्माण शक्ति को दिशा प्रदान करना चाहिए। यह टॉयकैथॉन हमारे युवा नवोन्मेषी लोगों को दुनिया के लिए भारत में खिलौने बनाने का मार्ग प्रशस्त करने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि खिलौनों के उपयोग से विज्ञान और अन्य विषयों को रटने के बोझ को कम किया जा सकता है।इस अवसर पर अपने सम्बोधन में श्री उपेंद्र प्रसाद सिंह ने हमारे इतिहास और संस्कृति के बारे में मूल्यों, लोकाचार और जागरूकता को विकसित करने में खिलौनों के व्यावसायिक और शैक्षणिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारे पास बहुत बड़ी संख्या में समूह और बहुत अच्छे कारीगर हैं, लेकिन एक चीज जो आवश्यक है, वह है न केवल अपने देश की बल्कि विदेशों की भी बदलती आवश्यकता के अनुसार नवाचार करना। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस टॉयकैथॉन में प्रस्तुत किए गए विचार इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए बहुत उपयोगी साबित होंगे।श्री अमित खरे ने अपनी चिंता व्यक्त की कि आयातित खिलौनों का आर्थिक मूल्य बहुत अधिक है और यह आत्मनिर्भर भारत के लिए एक बाधा है। उन्होंने कहा, खिलौनों के आयात पर रोक से हमारे कारीगरों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि 2020 की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 5+3+3+4 प्रणाली की वकालत करती है और यह खिलौनों और खेलों के माध्यम से बच्चों के लिए गतिविधि-आधारित सीखने पर ध्यान केंद्रित करती है, यहां क्षेत्रीय भारतीय खिलौनों की भूमिका युवा दिमागों को हमारे इतिहास और संस्कृति से जोड़ने में बहुत महत्वपूर्ण है।समारोह के उद्घाटन अवसर पर एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. अनिल डी. सहस्रबुद्धे ने कहा कि प्रारंभिक बाल शिक्षा तनावपूर्ण नहीं होनी चाहिए और इसे खिलौनों, कहानियों और खेलों के माध्यम से मजेदार रूप से सीखने पर केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने कहा, एडुटेनमेंट की आवश्यकता है, जो एक ही समय में मनोरंजन और शिक्षा दोनो प्रदान करती है। उन्होंने एक मजबूत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने के लिए आयोजन टीम की प्रशंसा की, जो प्रतिभागियों, मूल्यांकनकर्ताओं और आयोजकों को इस टॉयकैथॉन की सुविधा के लिए एक मंच पर लाने में सफल हुए हैं।शिक्षा मंत्रालय में नवाचार प्रकोष्ठ के मुख्य नवाचार अधिकारी डॉ. अभय जेरे ने गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया और प्रतिभागियों को उनकी क्षमता के अनुसार सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।उद्घाटन समारोह में प्रमुख भूमिका निभाने वाले शिक्षा मंत्रालय में नवाचार प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. मोहित गंभीर ने जमीनी स्तर पर नवाचार के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में यह अच्छी तरह से समझा जाता है कि भविष्य के नवाचार पिरामिड के आधार से निकलेंगे – जहां आम पुरुष-महिलाएं अपनी जरूरतों के लिए नवाचार करेंगे। पिरामिड का यह आधार समाज के समग्र विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और इसे प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है।शुरुआत में हैकथॉन की अवधारणा भौतिक रूप के साथ-साथ ही डिजिटल मोड में भी प्रस्तुत की गई थी। मौजूदा कोविड-19 महामारी के कारण और प्रतिभागियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भौतिक संस्करण को स्थगित कर दिया गया है और अब केवल डिजिटल संस्करण 22 जून से 24 जून 2021 तक आयोजित किया जा रहा है। टॉयकैथॉन 2021 प्रमुख रूप से स्थानीय सामग्रियों का उपयोग करके नए और अभिनव खिलौनों की अवधारणा पर केंद्रित है जो किफायती, सस्ते, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल, भारतीय और वैश्विक बाजार के लिए असाधारण रूप से उच्च गुणवत्ता वाले हैं।

मौजूदा टॉय हैकाथॉन में 3 ट्रैक शामिल हैं:

ट्रैक 1 जूनियर स्तर के प्रतिभागियों के लिए अर्थात, मुख्य रूप से स्कूल के छात्र। वे मुख्य रूप से 0-3 वर्ष और 4-10 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए खिलौने डिजाइन करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

ट्रैक 2, वरिष्ठ स्तर के प्रतिभागियों यानी उच्च शिक्षा संस्थानों के छात्रों और शिक्षकों के लिए। यह समूह 0-3 वर्ष, 4-10 और 11 वर्ष और उससे अधिक के लिए अवधारणाओं को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करता है। यह खंड मुख्य रूप से एआई और एमएल दृष्टिकोण, एआर-वीआर-एक्सआर और रोबोटिक्स पर आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, मेक्ट्रोनिक्स जैसे खिलौनों पर केंद्रित है।

ट्रैक 3, स्टार्टअप-पेशेवर स्तर के लिए, जिसमें समग्र नवाचार और प्रारूपों का विकास शामिल है। इन प्रारूपों से भारतीय बाजार में खिलौनों की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ उत्पादन बढ़ाने में खिलौना उद्योग को सक्षम बनाने की उम्मीद है।

तीन दिवसीय टॉयकैथॉन 2021 फाइनल राउंड के लिए, भाग लेने वाली टीमों को सुबह-सुबह एक विशेष मार्गदर्शन सत्र के माध्यम से निर्देशित किया जाएगा और पहले दो दिनों के लिए मूल्यांकन किया जाएगा, इसके बाद टॉयकैथॉन 2021 डिजिटल संस्करण के लिए विजेताओं की घोषणा करने के लिए चयन दौर होगा। इस उद्देश्य के लिए, शिक्षा मंत्रालय के नवाचार प्रकोष्ठ ने 1567 भाग लेने वाली टीमों के लिए 645 परामर्शदाताओं और मूल्यांकनकर्ताओं को नियुक्त किया है। शिक्षा मंत्रालय के नवाचार प्रकोष्ठ और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की सहायता के लिए 85 नोडल केंद्रों का चयन किया गया है, जो इस अंतर-मंत्रालयी टॉयकैथॉन के लिए आयोजन एजेंसियां ​​हैं।


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