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केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने आज भारत में स्कूली शिक्षा के लिए संयुक्त जिला शिक्षा सूचना प्रणाली प्लस (यूडीआईएसई+) 2019-20 से जुड़ी रिपोर्ट की जारी ::रिपोर्ट स्कूली शिक्षा, छात्र शिक्षक अनुपात, लड़कियों के नामांकन के सभी स्तरों पर सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) में आए सुधार को दिखाता है

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री, श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने आज भारत में स्कूली शिक्षा के लिए संयुक्त जिला शिक्षा सूचना प्रणाली प्लस (यूडीआईएसई+) 2019-20 से जुड़ी रिपोर्ट जारी की।
यूडीआईएसई+ 2019-20 रिपोर्ट के अनुसार, 2019-20 में स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर सकल नामांकन अनुपात में 2018-19 की तुलना में सुधार हुआ है। स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर छात्र शिक्षक अनुपात (पीटीआर) में भी सुधार हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2019-20 में प्राथमिक से उच्च माध्यमिक तक लड़कियों का नामांकन 12.08 करोड़ से अधिक है। इसमें 2018-19 की तुलना में 14.08 लाख की भारी वृद्धि हुई है। 2012-13 और 2019-20 के बीच, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक दोनों स्तरों पर लिंग समानता सूचकांक (जीपीआई) में सुधार हुआ है।

यूडीआईएसई+ रिपोर्ट से पिछले वर्ष की तुलना में 2019-20 में चालू बिजली, चालू कंप्यूटर, इंटरनेट सुविधा वाले स्कूलों की संख्या में उल्लेखनीय सुधार का पता चलता है।

हाथ धोने की सुविधा वाले स्कूलों की संख्या में एक और बड़ा सुधार देखा गया है। वर्ष 2019-20 में, भारत में 90% से अधिक स्कूलों में हाथ धोने की सुविधा थी, जबकि 2012-13 में यह आंकड़ा केवल 36.3% था।

स्कूलों से ऑनलाइन डेटा संग्रह की यूडीआईएसई+ प्रणाली को वर्ष 2018-19 में विकसित किया गया था ताकि पेपर प्रारूप में मैनुअल तरीके से डेटा भरने और ब्लॉक या जिला स्तर पर बाद में फीडिंग से संबंधित समस्याओं को दूर किया जा सके, जिसका 2012-13 से यूडीआईएसई डेटा संग्रह प्रणाली में इस्तेमाल किया जा रहा था। मौजूदा रिपोर्ट संदर्भ वर्ष 2019-20 के लिए यूडीआईएसई+ डेटा से संबंधित है।

शिक्षा के लिए संयुक्त जिला सूचना प्रणाली प्लस (यूडीआईएसई+) 2019-20 रिपोर्ट की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

2019-20 में पूर्व-प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक तक स्कूली शिक्षा में कुल छात्रों की संख्या 26.45 करोड़ के पार पहुंच गई। यह 2018-19 की तुलना में 42.3 लाख अधिक है।
स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर सकल नामांकन अनुपात में 2018-19 की तुलना में 2019-20 में सुधार हुआ है।
2019-20 में (2018-19 से) उच्च प्राथमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात बढ़कर 89.7% (87.7% से), प्रारंभिक स्तर पर 97.8% (96.1% से), माध्यमिक स्तर पर 77.9% (76.9% से) और उच्चमाध्यमिक स्तर पर 51.4% (50.1% से) हो गया।
2012-13 और 2019-20 के बीच माध्यमिक में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) में लगभग 10% का सुधार हुआ है। माध्यमिक के लिए जीईआर 2012-13 के 68.7% की तुलना में 2019-20 में लगभग 78% हो गया।
2012-13 और 2019-20 के बीच उच्च माध्यमिक में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) में 11% से अधिक का सुधार हुआ है। उच्च माध्यमिक के लिए जीईआर 2012-13 के 40.1% की तुलना में 2019-20 में 51.4% हो गया।
2019-20 में 96.87 लाख शिक्षक स्कूली शिक्षा में लगे थे। यह 2018-19 की तुलना में लगभग 2.57 लाख अधिक है।
स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर छात्र शिक्षक अनुपात (पीटीआर) में सुधार हुआ है।
2019-20 में प्राथमिक के लिए पीटीआर 26.5, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक के लिए पीटीआर 18.5 और उच्च माध्यमिक के लिए पीटीआर 26.1 हो गया।
2019-20 में प्राथमिक के लिए पीटीआर 26.5 हो गया, जबकि 2012-13 में यह 34.0 था। 2019-20 में उच्च प्राथमिक के लिए पीटीआर 18.5 हो गया, जबकि 2012-13 में यह 23.1 था।
2019-20 में माध्यमिक के लिए पीटीआर 18.5 हो गया, जबकि 2012-13 में यह 29.7 था।
2019-20 में उच्च माध्यमिक के लिए पीटीआर 26.1 हो गया, जबकि 2012-13 में यह 39.2 था।
शारीरिक रूप से अशक्त लोगों के लिए शिक्षा की सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किए गए हैं। 2018-19 की तुलना में दिव्यांग छात्रों के नामांकन में 6.52% की वृद्धि हुई है।
2019-20 में प्राथमिक से उच्च माध्यमिक तक लड़कियों का नामांकन 12.08 करोड़ से अधिक है। यह 2018-19 की तुलना में 14.08 लाख की वृद्धि है।
2019-20 में (2018-19 से)उच्च प्राथमिक स्तर पर लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात बढ़कर 90.5% (88.5% से), प्राथमिक स्तर पर 98.7% (96.7% से), माध्यमिक स्तर पर 77.8% (76.9% से) और उच्च माध्यमिक स्तर पर 52.4 प्रतिशत (50.8% से) हो गया।
2012-13 से 2019-20 के बीच उच्चतर माध्यमिक स्तर पर लड़कियों के सकल नामांकन अनुपात में 13%की वृद्धि हुई है। 2012-13 में यह 39.4% था और 2019-20 में 52.4% हो गया। वृद्धि लड़कों की तुलना में अधिक है। उच्च माध्यमिक के लिए लड़कों का जीईआर 2019-20 में 50.5% है, जबकि 2012-13 में यह 40.8% था।
2012-13 और 2019-20 के बीच, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक दोनों स्तरों पर लड़कियों के लिए जीईआर लड़कों की तुलना में अधिक बढ़ा है।
माध्यमिक स्तर पर लड़कियों के लिए जीईआर 2019-20 में 9.6% बढ़कर 77.8% हो गया, जबकि 2012-13 में यह 68.2% था।
2012-13 और 2019-20 के बीच, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक दोनों स्तरों पर लिंग समानता सूचकांक (जीपीआई) में सुधार हुआ है। उच्चतर माध्यमिक स्तर पर जीपीआई में सबसे अधिक सुधार हुआ, जो 2012-13 में 0.97 से बढ़कर 2019-20 में 1.04 हो गया।
2019-20 में भारत के 80% से अधिक स्कूलों में चालू बिजली की सुविधा थी। यह पिछले वर्ष 2018-19 की तुलना में 6% से अधिक का सुधार है।
चालू कंप्यूटर वाले स्कूलों की संख्या 2019-20 में बढ़कर 5.2 लाख हो गई, जो 2018-19 में 4.7 लाख थी।
इंटरनेट सुविधा वाले स्कूलों की संख्या 2018-19 में 2.9 लाख से बढ़कर 2019-20 में 3.36 लाख हो गई।
2019-20 में भारत के 90% से अधिक स्कूलों में हाथ धोने की सुविधा थी। यह एक बड़ा सुधार है, क्योंकि 2012-13 में यह प्रतिशत केवल 36.3% था।
2019-20 में 83% से अधिक स्कूलों में बिजली थी, जो पिछले वर्ष 2018-19 की तुलना में लगभग 7% अधिक है। 2012-13 में करीब 54.6% स्कूलों में बिजली थी।
2019-20 में 82% से अधिक स्कूलों ने छात्रों का मेडिकल चेकअप किया, जो पिछले वर्ष 2018-19 की तुलना में 4% से अधिक की वृद्धि है। 2012-13 में करीब 61.1% स्कूलों ने मेडिकल चेकअप किया था।
भारत में 84% से अधिक स्कूलों में 2019-20 में एक पुस्तकालय/रीडिंग रुम/रीडिंग कॉर्नर था, जो इससे पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 4% का सुधार है। 2012-13 में लगभग 69.2% स्कूलों में पुस्तकालय/रीडिंग रुम/रीडिंग कॉर्नर था।

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