कैलाश मानसरोवर मुक्ति हमारा लक्ष्य के तहत भारत तिब्बत सीमा पर स्थित बुमला में “चीन पछाड़ भैरव” की स्थापना: भाजपा नेत्री सुधा आचार्य ने सीमा रक्षकों को बांधा रक्षा सूत्र

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“कैलाश मानसरोवर मुक्ति हमारा लक्ष्य” वर्तमान में पवित्र कैलाश मानसरोवर की भूमि तिब्बत पर चीन का आधिपत्य है उसको चीन के आधिपत्य से मुक्त करवाना और भारत की सुरक्षा सुदृढ़ करना ही भारत तिब्बत सहयोग मंच का मुख्य उद्देश्य है क्योंकि “चीन की सीमा चीन की दीवार , बाकी सब कब्जा है ” इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु प्रतिवर्ष 18 से 25 नवंबर के मध्य मंच के द्वारा तवांग तीर्थ यात्रा का आयोजन किया जाता है और तवांग में एक भव्य रैली का आयोजन भी किया जाता है जो कि लगभग 2 किलोमीटर लंबी होती है इस वर्ष भी संपूर्ण भारत के 22 राज्यों के लगभग 300 भारतीयों ने इस रैली में हिस्सा लिया। पूर्वोत्तर भारत की इस ऐतिहासिक तेरी तवांग तीर्थ यात्रा का संचालन मंच के राष्ट्रीय महामंत्री साम्माननीय पंकज गोयल द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकारिणी सदस्य माननीय डॉक्टर इंद्रेश कुमार जी,के मार्गदर्शन में किया गया । आयोजन में अरुणाचल प्रदेश के मंच के अध्यक्ष, विधायक त्चेतन चोम्बे सहित अनेक गणमान्य पदाधिकारी भी सम्मिलित हुए। ध्यातव्य है कि इस यात्रा में मंच की राष्ट्रीय पदाधिकारी बीकानेर नगर की साहित्यकार समाजसेविका सुधा आचार्य, राष्ट्रीय सहसंयोजक प्रकृति संरक्षण प्रकोष्ठ भारत तिब्बत सहयोग मंच, ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। सुधा आचार्य ने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य चीन से कैलाश मानसरोवर की मुक्ति और तिब्बत को स्वतन्त्र करवाया जाना है। तिब्बत जिसका प्राचीन नाम “त्रिविष्टिप” है इसका भारत से सदियों से अटूट नाता रहा है । तवांग तीर्थ यात्रा में जाने से पूर्व सुधा आचार्य ने मंच की बीकानेर इकाई के अध्यक्ष दिलीप पुरी और उनकी टोली के साथ स्थानीय कोडमदेसर भैरव जी के मंदिर जाकर के पूजा अर्चना की और फिर वहां का पवित्र रजकण तथा कोडमदेसर सरोवर का पवित्र जल लेकर भारत तिब्बत सीमा पर स्थित बुमला जाकर मंच के राष्ट्रीय महामंत्री सम्माननीय पंकज गोयल जी के हाथों वहां “चीन पछाड़ भैरव” की स्थापना की। सुधा आचार्य ने यह भी बताया कि भारत तिब्बत सीमा पर स्थित गुमला में -35° डिग्री तापमान में भी हमारे भारतीय सैनिक मातृभूमि की रक्षार्थ अपना कर्तव्य निभा रहे हैं सुधा आचार्य के नेतृत्व में वहां पर सीमा रक्षकों को रक्षा सूत्र बांधकर उनका मुंह मीठा करवाया गया और उनके दीर्घायु होने की मंगल कामना भी की गई।

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