घुड़सवारी में गोल्ड लाने वाली दिव्यकृति को अर्जुन अवॉर्ड:पैरा ऐथ्लैटिक्स कोच महावीर प्रसाद को द्रोणाचार्य सम्मान; राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

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राष्ट्रपति भवन में मंगलवार 9 जनवरी को राष्ट्रीय खेल पुरस्कार दिए गए। इसमें 5 कोच को द्रोणाचार्य तो 26 खिलाड़ियों को अर्जुन पुरस्कार दिया गया। 3 लोगों को लाइफ टाइम सम्मान से नवाजा गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राजस्थान के सूरतगढ़ के पैरा ऐथ्लैटिक्स कोच महावीर प्रसाद सैनी को द्रोणाचार्य व नागौर की घुड़सवार दिव्यकृति सिंह को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।

हॉर्स राइडिंग में अर्जुन अवॉर्ड पाने वाली पहली महिला दिव्यकृति

हॉर्स राइडिंग में अर्जुन अवॉर्ड पाने वाली दिव्यकृति सिंह पहली महिला बन गई हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को उन्हें सम्मानित किया। दिव्यकृति ने एशियन गेम्स-2023 में देश को घुड़सवारी में 41 साल के लंबे इंतजार के बाद स्वर्ण पदक दिलाया। इसी वजह से उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

नागौर के छोटे से गांव पीह की निवासी दिव्यकृति सिंह घुड़सवारी ड्रेसाज टीम की सदस्य हैं। उन्होंनें दिल्ली विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान की पढ़ाई की है। पीजी के दौरान 2 साल उन्होंने किसी भी प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया। उनके पास प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए घोड़ा नहीं था।

मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में हुए समारोह में दिव्यकृति सिंह को अर्जुन अवार्ड देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू।

मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में हुए समारोह में दिव्यकृति सिंह को अर्जुन अवार्ड देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू।

दिव्यकृति के पिता ने बेटी का हुनर पहचाना और जर्मनी से एक घोड़ा खरीदकर दिया। घोड़ा मिलने के बाद दिव्यकृति ने ट्रेनिंग पूरी की। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एशियन गेम्स में भारतीय घुड़सवारी टीम में रहते हुए उन्होंने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया।

दिव्यकृति ने बताया कि उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के जीसस एंड मैरी कॉलेज से पढ़ाई के दौरान ही नीदरलैंड्स, बेल्जियम, जर्मनी और ऑस्ट्रिया में घुड़सवारी की ट्रेनिंग ली। साथ ही वेलिंगटन फ्लोरिडा, संयुक्त राज्य अमेरिका में भी ट्रेनिंग ली।

युवा मामले और खेल मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय खेल पुरस्कार हर साल दिए जाते हैं। राजस्थान की दिव्यकृति के अलावा मध्य प्रदेश की तीन खिलाड़ियों को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

दिव्यकृति के अलावा एशियन गेम्स में इन्हें भी गोल्ड मिला।

दिव्यकृति के अलावा एशियन गेम्स में इन्हें भी गोल्ड मिला।

एशियन गेम्स में घुड़सवारी करना था सपना

दिव्यकृति के परिवार में उनके माता-पिता और बड़ा भाई हैं। सभी जयपुर में ही रहते हैं और यहीं काम करते हैं। दिव्यकृति इस वक्त यूरोपीय देश ऑस्ट्रिया में रह रही हैं और अपनी ट्रेनिंग जारी रखे हुए हैं। घोड़े हमेशा से ही उनके परिवार के इंटीग्रल पार्ट रहे हैं। पिता विक्रम सिंह पोलो क्लब जयपुर से जुड़े हैं और पदाधिकारी हैं। उन्होंने घुड़सवारी मेयो स्कूल अजमेर से स्टार्ट की, तब वे 7वीं क्लास में थीं। वहां स्पोट्‌र्स में घुड़सवारी ऑफर किया गया था। तभी से उनका इससे लगाव शुरू हुआ।

इसके बाद उन्होंने कई साल तक भारत में होने वाले हॉर्स राइडिंग कॉम्पिटिशन में पार्टिसिपेट किया। जूनियर और फिर सीनियर लेवल पर नेशनल टूर्नामेंट्स में भाग लेने के बाद 2020 में वे यूरोप शिफ्ट हो गईं। एशियन गेम्स में घुड़सवारी करना उनका सपना था। वहां एक साल उन्होंने डेनमार्क और 2 साल जर्मनी में ट्रेनिंग ली।

राष्ट्रपति भवन में समारोह के बाद अर्जुन अवॉर्ड के साथ दिव्यकृति सिंह।

राष्ट्रपति भवन में समारोह के बाद अर्जुन अवॉर्ड के साथ दिव्यकृति सिंह।

एशियन गेम्स के दौरान घुड़सवारी करतीं दिव्यकृति सिंह।

एशियन गेम्स के दौरान घुड़सवारी करतीं दिव्यकृति सिंह।

अर्जुन अवॉर्ड की घोषणा के बाद की थी खास बातचीत…

दिव्यकृति को अर्जुन अवॉर्ड दिए जाने की घोषणा के बाद उन्होंने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की थी। अवॉर्ड की घोषणा पर उन्होंने कहा था- मैं बहुत खुश हूं। इसे मैं अपने जीवन में खुद के लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद मानती हूं। साल 2022 में जब मेरा इंडियन टीम में सिलेक्शन नहीं हुआ था और उसके बाद कोरोना के चलते एशियन गेम्स भी नहीं हुए थे। ऐसे में एशियन गेम्स साल 2023 में शिफ्ट हुए। यह साल मेरे लिए स्वीटेस्ट है, क्योंकि सबसे पहले टीम में सिलेक्शन और इसके बाद मैंने एशियन गेम्स में गोल्ड जीता और अब अर्जुन अवॉर्ड मिला। ये इतना जल्दी मेरे लिए कभी भी एक्सपेक्टेड नहीं था।

राष्ट्रपति भवन में पदत विजेताओं ने राष्ट्रपति के साथ फोटो खिंचवाया।

राष्ट्रपति भवन में पदत विजेताओं ने राष्ट्रपति के साथ फोटो खिंचवाया।

घुड़सवार दिव्यकृति सिंह।

घुड़सवार दिव्यकृति सिंह।

कोच महावीर प्रसाद सैनी को द्रोणाचार्य अवॉर्ड

सूरतगढ़ निवासी अंतरराष्ट्रीय कोच महावीर प्रसाद सैनी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया। नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में यह सम्मान दिया गया। पैरा ऐथ्लैटिक्स प्रशिक्षक महावीर प्रसाद सैनी ने 2021 टोक्यो (जापान) में आयोजित पैरालिंपिक खेलों में कांस्य पदक, भाला फेंक F46 लेने वाले सुंदर सिंह गुर्जर और 2023 में हांग शू (चीन) में आयोजित पैरा एशियाई खेलों में कांस्य पदक, पुरुषों की 1500 मीटर T46 के राकेश भेड़ा जैसे पैरा ऐथ्लैटिक्स को ट्रेनिंग दी थी। कोचिंग की महावीर की उपलब्धियों के लिए उन्हें वर्ष 2023 का द्रोणाचार्य पुरस्कार दिया गया है।

कोच महावीर सैनी को पहले भी राजस्थान का प्रतिष्ठित गुरु वशिष्ठ अवॉर्ड दिया जा चुका है। सैनी ने दो ओलंपियन सहित कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार किए हैं। उन्होंने एशियाड व राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले करीब 100 एथलीट को ट्रेनिंग दी है। वे 30 साल से ज्यादा समय से पैरा सामान्य कैटेगरी के एथलीट को प्रशिक्षण दे रहे हैं। इनमें सुंदर गुर्जर ओलिंपिक व एशियाई खेलों में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुके हैं। सुंदर ने चीन में हुए पैरा ओलिंपिक खेलों में विश्व रिकॉर्ड बनाया था।

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