जयपुर के सरकारी हॉस्पिटल की हालत खराब:अधिकारी के दौरे के बाद भी जयपुरिया में जगह-जगह कचरे के ढेर, तीन दिन से लिफ्ट खराब

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जयपुर के सरकारी हॉस्पिटल की हालत खराब:अधिकारी के दौरे के बाद भी जयपुरिया में जगह-जगह कचरे के ढेर, तीन दिन से लिफ्ट खराब

जयपुर

हॉस्पिटल परिसर में बने कचरा डिपो के बाहर फैला बायोवेस्ट कचरा। - Dainik Bhaskar

हॉस्पिटल परिसर में बने कचरा डिपो के बाहर फैला बायोवेस्ट कचरा।

सरकार और मेडिकल हेल्थ डिपार्टमेंट भले ही प्रदेश के तमाम हॉस्पिटल में बुनियादी सुविधाएं (साफ-सफाई, पीने का पानी, मरीजों के लिए लिफ्ट, दवाईयों की उपलब्धता आदि) बेहतर करने पर जोर दे रहा है। लेकिन राजधानी जयपुर के दूसरे सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल रूक्मिणी देवी बेनी प्रसाद जयपुरिया हॉस्पिटल के हालात अब भी बुरे हैं। यहां एक सप्ताह पहले ही जॉइंट सेक्रेटरी ने दौरा किया था, लेकिन उसका भी कोई असर नहीं है। यहां ओपीडी ब्लॉक की लिफ्ट तीन दिन से खराब है, जबकि हॉस्पिटल परिसर में जगह-जगह बायोवेस्ट कचरा फैला पड़ा है, जिससे संक्रमण बढ़ने का खतरा है।

जॉइंट सेक्रेटरी इकबाल खान ने 10 फरवरी को यहां 3 घंटे से ज्यादा समय तक दौरा कर यहां एक-एक जगह देखी और वहां साफ-सफाई बेहतर करने और मरीजों के लिए सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए थे। लेकिन यहां की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। सुपरिटेंडेंट ऑफिस के ठीक सामने लगी लिफ्ट शनिवार से खराब पड़ी है, इस कारण बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को अब सीढ़ियों या रैम्प से चढ़कर पहली मंजिल पर जाकर ओपीडी में डॉक्टरों को दिखाना पड़ रहा है।

पहली मंजिल पर कार्डियोलॉजी, जनरल मेडिसिन और जनरल सर्जरी की ओपीडी रहती है, जहां इन दिनों सबसे ज्यादा मरीज आ रहे है। जनरल मेडिसिन में इन दिनों खांसी-जुकाम, बुखार समेत मौसमी बीमारियों के मरीज बड़ी संख्या में आ रहे है, जिनमें बुजुर्ग भी शामिल है। कार्डियक ओपीडी भी यहां सप्ताह में तीन दिन चलती है।

जयपुरिया हॉस्पिटल के ओपीडी ब्लॉक में ग्राउंड फ्लोर पर लगी लिफ्ट जो खराब हो गई।

जयपुरिया हॉस्पिटल के ओपीडी ब्लॉक में ग्राउंड फ्लोर पर लगी लिफ्ट जो खराब हो गई।

बायोवेस्ट का कचरा जगह-जगह फैला
हॉस्पिटल परिसर में ही इन दिनों बायोवेस्ट कचरा जगह-जगह फैला है, जिससे यहां मरीजों और स्वस्थ्य लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा है। यहां की सफाई व्यवस्था इन दिनों बहुत खराब है। कचरा को एक जगह रखने के लिए स्टेशन बना रखा है, लेकिन यहां मॉनिटरिंग के लिए कोई कर्मचारी नहीं है। इस कारण कई बार यहां श्वान (कुत्ते) आकर कचरा मुंह में दबाकर इधर-उधर फैला देते है।

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