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जयपुर नगर निगम ग्रेटर से निलंबित मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, जस्टिस पंकज भण्डारी की बैंच ने खारिज की याचिका

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जयपुर: जयपुर नगर निगम ग्रेटर से निलंबित मेयर डॉक्टर सौम्या गुर्जर को राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) से राहत नहीं मिली है. जस्टिस पंकज भण्डारी की बैंच ने निलंबित मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर (Dr. Soumya Gurjar) की याचिका को खारिज कर दिया है. हाईकोर्ट ने स्थानीय निकाय की क्षेत्रीय उपनिदेशक की जांच को वैध माना है. सरकार ने प्रकरण की न्यायिक जांच कराने का भी निर्णय ले रखा है. विपक्षीगण का पक्ष सुने बिना प्रारंभिक जांच के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है.
आपको बता दें कि निलंबित मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर ने स्वायत्त शासन विभाग के निलंबन आदेश (Suspension order) को अदालत में चुनौती दी थी. इस पर 14 जून को अदालत ने सुनवाई पूरी करके जजमेंट रिजर्व कर लिया था. गुर्जर ने याचिका में नगरपालिका अधिनियम की धारा-39 के प्रावधानों की वैधानिकता को चुनौती देते हुए कहा था कि स्वायत्त शासन विभाग का निलंबन आदेश पूरी तरह से अवैध है. इसे रद्द करते हुए उन्हें बहाल किया जाए. मेयर गुर्जर के बाद उनके साथ निलंबित किये गये तीन अन्य पार्षद भी हाईकोर्ट पहुंच चुके हैं. उनकी याचिका पर सुनवाई अगले माह होगी.
यह है पूरा मामला:
दरअसल, जयपुर नगर निगम में 4 जून को पूर्व मेयर सौम्या गुर्जर के चेंबर में हुई एक बैठक के दौरान ये पूरा विवाद खड़ा हुआ था. तब नगर निगम आयुक्त यज्ञमित्र सिंह ने मेयर के चेंबर में खुद के साथ मारपीट होने और बदसलूकी करने का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार को शिकायत की थी. उन्होंने 3 पार्षदों के खिलाफ ज्योति नगर थाने में मुकदमा भी दर्ज करवाया था. इस पूरे विवाद की सरकार ने एक RAS अधिकारी से जांच करवाकर 6 जून को तीनों पार्षदों अजय सिंह, पारस जैन और शंकर शर्मा के साथ सौम्या गुर्जर को भी पद से निलंबित कर दिया था. साथ ही सरकार ने मेयर के खिलाफ न्यायिक जांच भी शुरू करवा दी. सरकार के इसी निर्णय को सौम्या गुर्जर ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर 14 जून को सुनवाई पूरी हाेने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था.

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