डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए गोपाल रत्न पुरस्कार

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गाय-भैंस की देशी नस्लों के संरक्षण के लिए दिया जाएगा पुरस्कार

गोपाल रत्न पुरस्कार, डेयरी किसान जीत सकते हैं रूपये 5 लाख

30 सितंबर से पहले करें आवेदन 

डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए गोपाल रत्न पुरस्कार

गाय-भैंस की देशी नस्लों के संरक्षण के लिए दिया जाएगा पुरस्कार

गोपाल रत्न पुरस्कार, डेयरी किसान जीत सकते हैं रूपये 5 लाख

30 सितंबर से पहले करें आवेदन 

जयपुर 23 सितम्बर, 2022। पशुपालन, मत्स्य और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार के अनुसार देश में पिछले कुछ सालों में दुग्ध उत्पादन बढ़ा है, ऐसे में दुग्ध उत्पादन क्षेत्र को और बढ़ावा दिया जा सके, इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से हर साल डेयरी किसानों, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन और दुग्ध उत्पादक कंपनियों को गोपाल रत्न पुरस्कार दिया जाता है। 

यह जानकारी देते हुए पशुपालन मंत्री श्री लालचन्द कटारिया ने बताया कि गाय एवं भैंसों की प्रमाणित स्वदेशी नस्लों की डेयरी करने वाले किसानों, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन और सहकारी व दुग्ध उत्पादक कंपनियों को पशुपालन, मत्स्य और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत प्रति वर्ष गोपाल रत्न पुरस्कार दिया जाता है। पशुपालन, मत्स्य और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा इस वर्ष भी गोपाल रत्न पुरस्कार के लिए 30 सितम्बर तक ऑनलाईन आवेदन आमंत्रित किये गये है। 

श्री कटारिया ने बताया कि योजना के प्रमुख उददेश्य स्वदेशी दुधारू गायों में वैज्ञानिक तरीके से उत्पादकता बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना, राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियनों को 100 प्रतिशत ए.आई. कवरेज लेने के लिए प्रेरित करना तथा सहकारी और दुग्ध उत्पादक कंपनियों को विकसित होने और प्रतिस्पर्धी भावना पैदा करने के लिए प्रेरित करना है।

योजनान्तर्गत गाय एवं भैंसों की डेयरी करने वाले वही किसान पात्र हैं, जो गाय की प्रमाणित स्वदेशी 50 नस्लों अथवा भैंस की 17 देशी प्रमाणित नस्लों में से किसी एक का पालन करता हों। इसी प्रकार सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन हेतु राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड, दुग्ध फेडरेशन, गैर सरकारी संगठन अथवा निजी क्षेत्र का कोई भी कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन जिसने इस कार्य के लिए कम से कम 90 दिनों का प्रशिक्षण प्राप्त किया हो। दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में सहकारी कम्पनी अधिनियम के तहत ग्राम स्तर पर स्थापित सहकारी समिति, एमपीसी या एफपीओं दुग्ध उत्पादक कम्पनी जो प्रतिदिन 100 लीटर दूध का उत्पादन करती है, और उनके साथ कम से कम 50 किसान सदस्य हो, पात्र होंगें। 

श्री कटारिया ने बताया कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत गोपाल रत्न पुरस्कार के लिए तीनों श्रेणी में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के लिए क्रमशः 5 लाख, 3 लाख एवं 2 लाख रूपये की राशि पारितोषिक स्वरूप प्रदान की जायेगी। उन्होंने बताया कि पशुपालन, मत्स्य एवं डेयरी विभाग, भारत सरकार द्वारा विजेताओं को पुरस्कार राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर 26 नवम्बर, 2022 को समारोह आयोजित कर प्रदान किये जायेंगे।

सभी इच्छुक किसान, कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन और सहकारी व दुग्ध उत्पादक कम्पनियां इस गोपाल रत्न पुरस्कार के लिए आवेदन पशुपालन, मत्स्य और डेयरी विभाग, भारत सरकार की वेबसाइट https://awards.gov.in  पर 30 सितम्बर, 2022 तक ऑन लाईन आवेदन कर सकते हैं। 

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