..तो आतंकियों की भूमि बनकर रह जाएगा अफगानिस्‍तान, फिर खड़ा हो जाएगा अलकायदा: वैलेस

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ब्रिटेन के रक्षा मंत्री ने अफगानिस्‍तान के ताजा हालातों पर चिंता जताते हुए कहा है यदि तालिबान देश में आ गया तो फिर अफगानिस्‍तान आतंकियों की प्रजनन भूमि बनकर रह जाएगा। ऐसे में दूसरे आतंकी संगठन भी दोबारा खड़े हो जाएंगे।लंदन । ब्रिटेन ने अफगानिस्‍तान के ताजा हालातों पर चिंता जताई है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री ने कहा है कि वो अफगानिस्‍तान में तालिबान की वापसी की आशंका से काफी चिंतित हैं। उन्‍होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो एक असफल राज्‍य के तौर पर अफगानिस्‍तान अलकायदा जैसे आतंकवादियों के लिए प्रजनन स्थल बन सकता है। रक्षा मंत्री बेन वैलेस ने स्‍काई से बात करते हुए इस बात की आशंका जताई कि वहां पर अलकायदा की भी वापसी हो सकती है।वैलेस ने ये भी कहा कि पश्चिमी देश वहां के हालातों को समझ भी रहे हैं और जान भी रहे हैं। लेकिन वो तुरंत कुछ कर पाने की स्थिति में भी नहीं है। इतना जरूरी है कि वो वहां के हालातों को मैनेज जरूर कर सकते हैा। उन्‍होंने ये भी कहा कि तालिबान ने अफगानिस्‍तान के बड़े शहरों को अपने कब्‍जे में ले लिया है। देश के दूसरे बड़े शहर कंधार पर उसका कब्‍जा हो गया है और लश्‍कारगाह भी अब उनके हाथों में चला गया है। तालिबान जिस तेजी के साथ देश में आगे की तरफ बढ़ रहा है वो वास्‍तव में हैरान करने वाली है। इसने अफगानिस्‍तान की सरकार और पश्चिमी देशों को भी हैरानी में डाल दिया है।गौरतलब है कि जब से अमेरिका ने अपनी और नाटो फौज को अफगानिस्‍तान से वापसी का फरमान दिया है तभी से तालिबान ने देश में हमले तेज कर दिया है। देश के करीब दो तिहाई हिस्‍से पर उसका कब्‍जा हो गया है, वहीं सरकार की फौज एक सीमित इलाके तक ही रह गई है।आपको बता दें कि तालिबान ने 1996 से लेकर 2001 तक अफगानिस्‍तान के एक बड़े इलाके पर कब्‍जा कर लिया था। उस वक्‍त यहां पर अलकायदा भी पैर जमा चुका था और उसके सरगना ओसामा बिन लादेन के साथ तालिबान के बेहद करीबी रिश्‍ते भी थे। अमेरिका पर हुए सबसे बड़े आतंकी हमले के बाद जब अमेरिका ने यहां पर कदम रखा तो तालिबान को पीछे हटना पड़ा था। इन दो दशकों के दौरान तालिबान का इलाका काफी सीमित हो चुका था। लेकिन अमेरिका की यहां से वापसी के साथ ही तालिबान के कदम फिर तेजी से आगे की तरफ बढ़ रहे हैं।बता दें कि एक समय में अफगानिस्‍तान में तालिबान, इस्‍लामिक स्‍टेट और अलकायदा का नेटवर्क काफी मजबूत था। बीते दो दशक में जहां आईएस और अलकायदा काफी कुछ खत्‍म हो चुका है वहीं तालिबान का न सिर्फ इस दौरान वजूद बरकरार रहा बल्कि उसने खुद को मजबूत बनाया है।

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