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नन्ही चिरैया को “चिड़िया महल” में आसरा देकर विलुप्त प्रायः हो रही चिरैया को बचाने में जुटी बीकानेर की सुधा आचार्य

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बीकानेर। राजस्थान के रेगिस्तानी प्रांत बीकानेर की समाज सेविका सुधा आचार्य लुप्तप्राय होती छोटी चिड़िया (चिरैया) को बचाने के लिए अपने ही स्तर पर अभियान चला रही है। जिसे उन्होने “चिड़िया का महल” नाम दिया है। ये छोटी प्यारी सी चिड़िया जिसे चिरैया (sparrow) भी कहा जाता है कभी हर घर आँगन की शान हुआ करती थी, लेकिन अब यह लुप्तप्राय सी हो गयी है क्यूंकि हम इंसानों ने इसके लिए अनुकूल पर्यावरण को नष्ट कर दिया है। ये चिड़िया पेड़ो पर या घरो के आँगन मे रहना पसंद करती है। पेड़, शहरो मे अब रहे नही और घर सभी पूरी तरह से बंद बनाए जाते है इसी चीज को महसूस करते हुए सुधा आचार्य ने इनके रहने के लिए मिट्टी से बने कलात्मक घरोंदों का निर्माण करवाया जो इन छोटी चिड़ियाओ के लिए अत्यंत वातानुकूलित साबित हो रहे है तथा इनमें ये चिरैया बहुत जल्दी रहने लग जाती है ।
ये छोटी चिरैया रात को प्राय: पेड़ो पर रहती है, आँधी, तूफान की स्थिति मे ये गिर कर मर जाती है एवं सर्दी, गर्मी मे भी यह बहुत कठिनाई में रहती है । ये मिट्टी के घरोंदे यानि “चिड़िया के महल” इन स्थितियो के लिए आदर्श है ये गर्मी मे ठंडे व सर्दी मे गरम रहते है, इनमे हवा आवागमन का पूर्ण साधन है तथा ये बहुत मजबूत भी है, जिससे चिरैया आँधी तूफान की स्थिति मे इनमे सुरक्षित रहती है ।
इसी कड़ी में सुधा आचार्य ने पुलिस महा निरीक्षक प्रफुल्ल कुमार से भेंट कर उनसे भी कार्यालय परिसर में चिड़िया महल लगाने का आग्रह किया ‌।
(आईजी )प्रफुल्ल कुमार ने भी कार्य की सराहना की और कहा कि आपका प्रयास सराहनीय है इससे समाज में जागृति होगी और लोग चिड़ियों को बचाने के लिए आगे आएंगे।
इसी कड़ी में सुधा आचार्य ने अतिरिक्त संभागीय आयुक्त सुनीता चौधरी से भेंट कर उनको भी चिड़िया महल के बारे में अवगत करवाया। अतिरिक्त संभागीयआयुक्त सुनीता चौधरी ने इस अनूठे सेवा कार्य को सराहते हुए कहा कि यह तो बहुत ही पुण्य का काम है और सभी को चिड़ियों को बचाने की लिए प्रयास करने चाहिए। उन्होंने स्वयं उत्साह पूर्वक संभागीय आयुक्त कार्यालय परिसर में उगे हुए विभिन्न वृक्षों पर चिड़िया के महल लगाएं। सुनीता चौधरी ने कहा कि यह बहुत ही पुण्य का काम है और सभी को चिड़ियों को बचाने की लिए प्रयास करने चाहिए।
साथ ही बीकानेर जिलाधीश नमित मेहता से संपर्क कर सुधा आचार्य ने उन्हें भी चिड़िया महल के उद्देश्य के बारे में बताया और समस्त जानकारियां दी कि किस प्रकार चिड़िया संपूर्ण भारत में तीव्र गति से समाप्त होती जा रही है ।जिलाध्यक्ष ने कहा कि बड़े आश्चर्य की बात है कि चिड़िया इतनी तेजी से समाप्ति की ओर है
उन्होने सुधा आचार्य से कहा कि प्रयास बहुत ही प्रशंसनीय और लीक से हटकर है। “चिड़िया महल”की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि अनबोले,अबोध चिड़ियों को बचाने हेतू चिड़िया महल लगवाने हेतु उनके द्वारा भी प्रयास किए जाएंगे।

उल्लेखनीय है कि सुधा आचार्य अब तक करीब 5000 ऐसे “चिड़िया के महल” लगवा चुकी है ,ये कलात्मकता एवं सुंदरता के कारण आमजन भी बहुत उत्साह से इन्हे अपने घरो मे लगवा रहे है एवं नन्ही चिरैया के आगमन पर बहुत पुलकित होते है इस तरह सुधा जी का यह अभियान गति पकड़ रहा है।
सुधा जी ने इसके सुखद परिणाम को देखते हुए आगामी 20 मार्च 2022 यानि World Sparrow day तक 10000 से अधिक इन “चिड़िया के महलो” को लगाने का लक्ष्य रखा है ।

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