पड़ोसी देश पाकिस्तान, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ वार्ताएं कर आखिर क्या बना रहा मंसूबे ?(पढ़ें विदेश नीति पर एक विश्लेषण

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आंतरिक परिस्थितियों के मद्देनजर जब देश में संकट का दौर हो पड़ोसी देश की विदेश वार्ताएं अंतराष्ट्रीय ही नहीं राष्ट्रीय जगत में संशय का माहौल उत्पन्न करती हैं।पाकिस्तान सदैव से भारतीय आंतरिक परिस्थितियों का लाभ लेने की जुगत में रहा है।
इस काल में जब भारत का पूरा ध्यान केन्द्रण कोरोना की दूसरी लहर पर है ऐसे में पाकिस्तान की अमेरिका और ब्रिटेन के प्रतिनिधियों से लगातार हो रही वार्ताएं मंथन का विषय है।पाकिस्तानी थलसेनाध्यक्ष ने हाल ही में अमेरिका और ब्रिटेन के अधिकारियों से वार्ता की है।
इस क्रम में पाकिस्तान के सेना प्रमुख (सीओएएस) जनरल कमर जावेद बाजवा ने ब्रिटेन के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल सर निकोलस पैट्रिक कार्टर से मुलाकात की।
बैठक के दौरान दोनों मुल्कों के अधिकारियों द्वारा आपसी हित के मामलों, क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति विशेष रूप से अफगान शांति प्रक्रिया में वर्तमान विकास और द्विपक्षीय और रक्षा सहयोग को और बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई। इस बैठक के बाद बाजवा ने एडिनबर्ग के ड्यूक, हिज रॉयल हाइनेस प्रिंस फिलिप के दुखद निधन पर भी शोक व्यक्त किया और कहा कि दुनिया ने एक अत्यधिक सम्मानित मित्र खो दिया है।

जबकि कार्टर ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए पाकिस्तान के गंभीर प्रयासों, विशेष रूप से अफगान शांति प्रक्रिया की सराहना की। उधर बाजवा ने पाकिस्तान में कोविड के खिलाफ लड़ाई में यूके के योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद दिया और कहा कि पाकिस्तानी सेना ब्रिटेन के साथ अपने मैत्रीपूर्ण संबंधों को बहुत महत्व देती है।
इस के अलावा पाकिस्तान में अमेरिकी मामलों की प्रभारी सुश्री एंजेला एगेलर ने भी पाकिस्तानी थल सेनाध्यक्ष (सीओएएस) जनरल कमर जावेद बाजवा से मुलाकात की।
इस बैठक के दौरान, आपसी हित के मामलों, अफगान शांति प्रक्रिया में हालिया विकास और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग सहित समग्र क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की गई।
अमेरिकी मामलों की प्रभारी एगेलर ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने के लिए पाकिस्तान के ईमानदार प्रयासों, विशेष रूप से अफगान शांति प्रक्रिया की सराहना की।
ऐसी स्थिति में जब भारत कोरोना संकट में उलझा हुआ है पड़ोसी देश द्वारा विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से लगातार की जा रही वार्ताओं ने अंतराष्ट्रीय हलकों में अनेक सुगबुगाहटों को जन्म दिया है।
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान सदैव से ही भारतीय स्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश में लगा रहता है ।इसके कई उदाहरण भूतकाल में भी देखने को मिलें हैं जब पाकिस्तान ने परिस्थियों का दोहन किया है।
राजनीति के ज्ञाता चाणक्य के शब्दों में “आपका पड़ोसी कभी आपका अच्छा मित्र नहीं हो सकता क्योंकि आपके और उसके हित सदैव टकराते हैं।”पाकिस्तान की किसी भी गतिविधि को इस समय नजरअंदाज करना इस समय भारत के लिए नुकसान का सौदा हो सकता है । भारत इस समय आंतरिक संकट के दौर से गुजर रहा है ऐसे में अंतराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ पाकिस्तान की राजनैतिक और अंतर्राष्ट्रीय गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

Report by Dr Mudita Popli

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