पशुधन आधारित उद्यम परिदृश्य और सम्भावना पर वैज्ञानिक – उद्योग सम्पर्क बैठक आयोजित

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ऊन, दूध, पशु आहार व अन्य उत्पादों की जांच हेतु हाईटैक लैब की आवश्यकता: कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित

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बीकानेर 10 अक्टूबर। वेटरनरी विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय और बीकानेर जिला उद्योग संघ के संयुक्त तत्वावधान में ‘‘बीकानेर में पशुधन आधारित उद्यमः परिदृश्य और सम्भावनाएं‘‘ पर परिचर्चा हेतु ‘‘वैज्ञानिक-उद्योग संपर्क बैठक‘‘ का आयोजन गुरूवार को कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित की अध्यक्षता में किया गया। कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने समन्वित दृष्टिकोण को अपनाते हुए उद्यमियों, विश्वविद्यालयों एवं सरकार को नीति निर्धारण कर कार्य करने की बात कही। कुलपति आचार्य दीक्षित ने कहा कि सभी उद्योग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से एक दूसरे से जुडे होते है जिससे हम आने वाली समस्याओं को सम्मिलित प्रयासों से दूर कर सकते है। कुलपति ने कहा की पी.पी.पी. मोड़ पर ऊन, दूध, पशुआहार व अन्य उत्पादों की जांच हेतु हाईटैक लैब की स्थापना की आवश्यकता है ताकि उद्यमियों को इनकी जांच में लगने वाले खर्च व समय बच सके। कुलपति ने वेटरनरी महाविद्यालय में भ्रूण प्रत्यारोपण प्रयोगशाला जल्दी शुरू होने की बात भी साझा की। विद्यार्थियों में उद्यमिता विकास हेतु इन्क्यूबेशन सेंटर विकसित करने तथा भविष्य के दृष्टिकोण को रखते हुए वर्चुअल प्रयोगशाला एवं रोबोटिक ऑपरेशन थियेटर विकसित करने का भी सुझाव दिया। बैठक में डी.पी. पचीसिया, अध्यक्ष जिला उद्योग संघ ने अपने विचार सांझा करते हुए कहा कि बीकानेर जिला राज्य का बड़ा व्यापारिक केन्द्र है। यहां से दुग्ध, ऊन, मोठ, मूंगफली, ग्वार, दालों आदि का बड़ा व्यापार होता है। लेकिन शहर में कोई मेगा फूड पार्क विकसित नहीं है ना ही मान्यता प्राप्त फुड़ टेस्टींग प्रयोगशाला है जिसके माध्यम से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता निर्धारित हो सके। बीकानेर शहर में मेगा फूड पार्क एवं फूड टेस्टींग प्रयोगशाला स्थापित हो जाने से व्यापार जगत को गति मिलेगी। श्री अशोक मोदी, महाप्रबंधक लोट्स डेयरी, बीकानेर ने सदन में विचार रखते हुए कहा कि बीकानेर पशुपालन आधारित जिला है जहां कृषि एवं दुग्ध व्यवसाय परम्परागत है। दुग्ध की मांग लगातार बढ़ रही है लेकिन मांग आपूर्ति के साथ-साथ गुणवत्ता निर्धारण बहुत आवश्यक है। अशोक मोदी ने शहर में उच्च मानक की दुग्ध टेस्टींग लेब स्थापित करने की जरूरत महसुस की ताकि दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों का निर्यात संभव हो सके। इसके अतिरिक्त उन्होने पशु चारा गुणवत्ता निर्धारण, चारागाह विकास एवं दुग्ध व्यवसाय के आधुनिकरण, कृत्रिम गर्भाधान हेतु सेक्स सोर्टड सीमन के उपयोग को बढावा देने एवं इस व्यवसाय के प्रोत्साहन हेतु सरकारी सहयोग की बात साझा की। ऊन इण्डस्ट्री से श्री कमल कल्ला, संजय राठी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि बीकानेर एशिया की सबसे बड़ी ऊन मण्डी गिनी जाती है लेकिन भेड़ों की संख्या कम होने, चारागाह घटने एवं उत्तम ऊन टेस्टींग एवं संसाधनों की कमी से आज ऊन का आयात भी करना पड़ रहा है। राजस्थान से उत्तम गलीचा ऊन का उत्पादन होता है लेकिन यहां सर्टिफिकेशन के अभाव में निर्यात में बाधा आती है एवं उत्पादों का पूर्ण मूल्य नहीं मिल पाता है। जिला उद्योग संघ के वीरेन्द्र किराडू ने पशुपालकों को ऊन उत्पादन प्रशिक्षण हेतु ब्रीज कोर्स शुरू करने का सुझाव दिया। निदेशक प्रसार शिक्षा प्रो. राजेश कुमार धूड़िया ने विषय प्रवर्तन करते हुए बताया की बैठक में डेयरी, भेड़, बकरी एवं मुर्गी पालन के बहुउपयोगी सेक्टर में क्षमता संवर्द्धन कर उद्यमिता विकास के कार्याे पर भी इस बैठक में विचार-विमर्श किया गया ताकि युवा एवं पशुपालक इस क्षेत्र में स्वरोजगार की ओर अग्रेषित हो सके। सदन में डॉ. आर.के. सांवल, डॉ. बिट्ठल बिस्सा, डॉ. चन्द्रशेखर श्रीमाली, विजय खत्री, डॉ. राहुल, मोहन सिंह आदि ने अपने विचार एवं सुझाव साझा किये। बीकानेर के पशुधन आधारित उद्योगों के नरेश मित्तल, बृजगोपाल, गजेन्द्र पुरोहित, अनन्त वीर जैन, निर्मल मित्तल, श्रीधर शर्मा, परवेश गोयल, पारस डागा, महेश कुमार, पवन व्यास, प्रेम प्रकाश खत्री, सावन पारीक, विपिन मुसरफ, अशोक सुराणा, विजय नवलखा, भंवरलाल चांडक, धैर्य चालानी, अश्वनी माखेचा शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन डॉ. देवीसिंह ने किया।

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