पीबीएम का पुराना सीवरेज सिस्टम बंद:पीबीएम से रोज निकलता है 800 केएल लिक्विड वेस्ट, अल्ट्रावायलेट किरणों से 99.9 फीसदी साफ होगा

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पीबीएम का पुराना सीवरेज सिस्टम बंद:पीबीएम से रोज निकलता है 800 केएल लिक्विड वेस्ट, अल्ट्रावायलेट किरणों से 99.9 फीसदी साफ होगा

बीकानेर

सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज ग्राउंड में हॉस्पिटल सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट(एचएसटीपी) ऑपरेशनल हो गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल से इसका उद्घाटन कराने की तैयारी की जा रही है।

पीबीएम हॉस्पिटल का लिक्विड मेडिकल वेस्ट अब अल्ट्रावायलेट किरणों से शुद्ध किया जाएगा। उसका उपयोग बागवानी, वॉशिंग, टॉयलेट आदि कार्यों में किया जा सकेगा। एसबीआर तकनीक (सीक्वेंसिग बैच रिएक्टर) से बने एसटीपी को अल्ट्रावायलेट यानी पैराबैंगनी किरणों की तकनीक से लैस किया गया है। इंजीनियरों का दावा है कि इससे लिक्विड वेस्ट 99.9% तक साफ होगा। इसका मानक बीओडी 10 से भी कम रहेगा। इस पानी का उपयोग पीने में नहीं किया जा सकता, लेकिन अन्य कार्यों में लिया जा सकेगा।

एसटीपी को फिलहाल टेस्टिंग मोड पर रखा गया है। इसका विधिवत उद्घाटन संभवतया 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री से कराने की तैयारी की जा रही है। एचएसटीपी तैयार होने के बाद पीबीएम हॉस्पिटल का 40 साल पुराना सीवरेज सिस्टम बंद कर दिया गया है। पूरे परिसर में 4.4 किलोमीटर नई सीवरेज लाइन बिछाई गई है।

नया सिस्टम शुरू हो गया है। इससे रोज औसत 800 किलोलीटर पानी एसटीपी में जा रहा है, जिसका ट्रीटमेंट कर कुछ पानी बागवानी में काम लिया जा रहा है। जबकि अधिकांश पानी नगर निगम की सीवरेज में बहा दिया जाता है। इस पानी के कंज्यूम करने का फिलहाल कोई प्लान हॉस्पिटल प्रशासन के पास नहीं है। इसके लिए भविष्य में अलग से पाइप लाइन डालकर पीबीएम के टॉयलेट्स को जोड़ा जा सकता है। हॉस्पिटल के एचएसटीपी के लिए करीब 9 करोड़ का बजट मंजूर हुआ था। अब तक सात करोड़ खर्च हो चुके हैं। जीनियस इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड ने इसका निर्माण कराया है। कंपनी दस साल तक इसे चलाएगी। उसके बाद हॉस्पिटल को हैंडओवर कर दिया जाएगा।

मेडिकल कॉलेज ग्राउंड में 1.5 एमएलडी का एचएसटीपी ऑपरेशनल हुआ, पीबीएम का पुराना सीवरेज सिस्टम बंद

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आठ एचएसटीपी पूर्व सरकार में मंजूर किए गए थे। उनके लिए करीब 40 करोड़ से अधिक का बजट स्वीकृत हुआ था। बीकानेर सहित, महात्मा गांधी हॉस्पिटल जोधपुर, जयपुर में एसएमएस, आरयूएचएस, जनाना अस्पताल, कोटा का सेटेलाइट और एनएमसी तथा अजमेर के सरकारी अस्पताल में एचएसटीपी का निर्माण हुआ है। इनमें से जनाना जयपुर और एनएमसी कोटा को छोड़कर शेष सभी ऑपरेशनल हो गए हैं। इन सभी का सीएम के हाथों एक साथ उद्घाटन कराने की योजना है।

एसबीआर तकनीक का तीसरा प्लांट

शहर में एसबीआर तकनीक का तीसरा सीवरेज प्लांट मेडिकल कॉलेज ग्राउंड में बना है। इससे पहले बल्लभ गार्डन और सुजानदेसर में भी इसी तकनीक से एसटीपी बनाए गए थे। उनमें भी पानी को साफ करने के लिए यूवी तकनीक का उपयोग किया जा जा रहा है

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