
WRITTEN BY SHIVANGI SHARMA
“ फेसबुक बाबा “ … कोई दूसरी दुनिया का ही होगा जो इन्हें ना जानता हो। आईये विचित्रताओं से भरे इस संसार की बुद्धिजीवी यात्रा प्रारंभ करते हैं।शुरुआत करते हैं पोस्ट से , फेसबुक पोस्ट जिस पर हर फेसबुकिया अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझता है और अपने – अपने तरीके से अपनी वाल पर इसकी लीपापोती करता है। स्त्रियों की सुंदर फ़ोटो और वीडियो वाली पोस्ट गुड़ की भाँति गुण लिये होती हैं जिस पर पुरुष मक्खियों की भाँति टूट पड़ते हैं । “ अब तुम मेरी पहले जैसी तारीफ़ नहीं करते , तुम्हारा मन भर गया है मुझसे “ …जैसे ताने अपनी बीवियों से आये दिन सुनते रहने से बौखलाये पति ; सुंदर स्त्रियों की फ़ोटो – वीडियो वाली पोस्ट पर कमेंट में अपना समस्त प्रेमसागर उड़ेल देते हैं , ऐसी – ऐसी शेरो शायरी डालते हैं कमेंट में कि चचा ग़ालिब भी दाँतों तले उँगली दबा लें। तारीफ़ पाने को आतुर कुढ़ती हुई पत्नियों की अनदेखी कर ये यहाँ चुपके से जीवन रस का पूर्ण आनंद ले रहे होते हैं। हास्य – व्यंग्य वाली पोस्ट चोरी की नई तकनीक कॉपी – पेस्ट द्वारा बहुत चोरी होती हैं । अभी हालिया एक पोस्ट देखी जिसमें किसी महोदय ने लिखा था कि उन्होंने एक महिला मित्र को मात्र इस जुर्म के लिये ब्लॉक कर दिया कि वो उनकी ओरिजिनल हास्यमय पोस्ट को बिना उनकी इज़ाजत के बहुत दिनों से कॉपी -पेस्ट कर अपनी वॉल पर चस्पा कर रही थीं ।
अरे हाँ ! ब्लॉक शब्द का ज़िक्र करते ही याद आया आपको बता दूँ कि ये फेसबुक की दुनिया में दिया जाने वाला सबसे बड़ा दंड है …जिसका वर्णन संविधान के किसी अनुच्छेद , किसी धारा में नहीं मिलेगा। इस दंड को देने और पाने वालों की प्रकृति भी अलग – अलग होती है।ब्लॉक हो जाने वाले कुछ बंधु तो इसे अपना इतना बड़ा अपमान समझते हैं जैसे मंडप में दूल्हे को दुल्हन ने शादी से इंकार कर दिया हो और अपने इस अपमान का बदला फिर ये दूसरे लोगों को ब्लॉक करके लेते हैं ,पर कुछ लोग जैसे बने ही ब्लॉक होने के लिये हों …. अपनी हरकतों की वजह से यहाँ – वहाँ ; जगह – जगह से ब्लॉक होने के बाद भी ये गुलाटी मारना नहीं छोड़ते। पुनः पोस्ट पर आएँ तो अच्छे कवियों – लेखकों की साहित्यिक पोस्ट की किस्मत में तो जैसे चोरी हो जाने की काली गहरी रेखा ऊपरवाले ने इसके सृजन के समय ही बना दी हो और ऊपर से साहित्य चोरों की सीनाजोरी तो देखिये कॉपी – पेस्ट करने के बाद नीचे बतौर लेखक मूल रचयिता का नाम डिलीट कर खुद का नाम चिपका देते हैं ।
पोस्ट को यदि दिल माना जाये तो कमेंट को धड़कन परन्तु कभी – कभी ये धड़कन इस दिल को हार्ट अटैक भी ला सकती है। कुछ पोस्ट के नीचे ऐसे ‘ भड़के हुए कमेंट्स ’ आते हैं जैसे कि कमेंट करने वाले ने पूरे दिन बॉस से गालियाँ खाई हों और फिर घर आकर बीवी से भी ताने सुने हों और किसी के सामने अपना मुँह ना खोल सका हो तो फेसबुक खोलते ही उसे जो सबसे पहली पोस्ट दिखी हो उसी पर ही अपनी बेचारगी की भड़ास निकाल दी हो। सच्ची – झूठी प्रशंसा भरे चाटुकार कमेंट्स , जवाबी कार्यवाही वाले कमेंट्स , मात्र दोस्ती – रिश्तेदारी – सम्पर्क बनाये रखने के लिए किये गए कमेंट्स , मख़ौल उड़ाने वाले कमेंट्स … कुल मिलाकर अच्छी खासी वैरायटी उपलब्ध है इस सेक्शन में।
फेसबुक स्टोरी …अजी इसकी महत्ता का वर्णन कैसे छोड़ा जा सकता है । जो लोग आपकी वॉल पर आपकी पोस्ट चुपके से पढ़कर सीधे बिना लाईक – कमेंट किये निकल जाते हैं , वे यहाँ रंगे हाथों पकड़े जाते हैं ।परंतु इन्हें पकड़ना भी बड़ी चतुराई का काम होता है ; जो कोई बहुत चतुर स्टोरी सृजक ही कर सकता है।करना सिर्फ़ इतना होता है कि इन्हें रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक साथ तीन – चार रोचक स्टोरी क्रम से डाली जाएँ क्योंकि सिंगल स्टोरी के व्यू में इनका नाम मिल भी जाये तो भी ये देखकर अनदेखा करने वाला एटीट्यूड दिखाते हैं पर इन्हें आपमें इंटरेस्ट बड़ा होता है और इसी इंटरेस्ट के चलते ये एक के बाद एक क्रम से डाली गईं आपकी फेसबुक स्टोरी को देखने का मोह नहीं छोड़ पाते , फिर इनकी सारी होशियारी धरी की धरी रह जाती है।
फेसबुक की इस अतरंगी दुनिया में पापा ‘वीडियो’ और छोटी बिटिया रानी ‘रील्स’ भी अपनी धाक जमाये हुए हैं और वायरल होने की होड़ में ऐसे कंटेंट डालते हैं जो खुद वायरल ( वायरल फीवर ) ग्रसित लगते हैं। फ्रेंड – अनफ्रेंड करने की परिवारिक प्रथा से फेसबुकिया वंश की वंशावली घटती – बढ़ती रहती है और इनबॉक्स के मायाजाल के तो क्या ही कहने …..किन्तु ये एक विस्तृत चर्चा का विषय होने के कारण उसकी चर्चा आगे की जायेगी ।फिलहाल फेसबुक के रंगीले संसार के चुनिंदा रंगों से आपके मन को रंगने की ये थी मेरी एक छोटी सी कोशिश।
लेखिका © ® शिवांगी शर्मा
फ़रीदाबाद ( हरियाणा )
स्वतंत्र लेखिका व कवयित्री
(स्वरचित व अप्रकाशित व्यंग्य)







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