बीएसएफ के पूर्व डिप्टी कमांडेंट युद्धवीर श्यामसुन्दर सिंह का निधन, शौर्यपूर्ण सेवा और पतंगबाजी में उनकी अनमोल विरासत को याद किया गया

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बीकानेर ।बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के सेवानिवृत्त डिप्टी कमांडेंट श्यामसुन्दर सिंह का मंगलवार को निधन हो गया। 88 वर्षीय श्यामसुन्दर सिंह का जीवन देश के प्रति समर्पण और साहस से भरा हुआ था। उनके निधन की खबर से क्षेत्र में शोक की लहर है, और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए अनेक गणमान्य लोग पहुंचे।

श्यामसुन्दर सिंह का निवास स्थान बीकानेर के मॉर्डन मार्केट के पास है, और वे वहां स्थानीय निवासियों में “मेजर साहब” के नाम से मशहूर थे। पतंगबाजी के प्रति उनके प्रेम ने उन्हें “पतंग उड़ाने वाले मेजर साहब” के रूप में ख्याति दिलाई थी। वे न केवल देश के प्रति समर्पित थे, बल्कि बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

देश सेवा में गौरवशाली करियर

डिप्टी कमांडेंट श्यामसुन्दर सिंह ने भारत-पाक युद्धों में साहस का परिचय देते हुए कई अहम योगदान दिए। 1965 के युद्ध में वे बीएसएफ के संचू आउटपोस्ट के कंपनी कमांडर थे और उस दौरान अपने नेतृत्व में दुश्मनों के खिलाफ मजबूती से खड़े रहे। इसके बाद 1971 के भारत-पाक युद्ध में भी उन्होंने वीरता का परिचय दिया। उनकी इस शौर्यपूर्ण सेवा के लिए उन्हें बीएसएफ में विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने सेवा काल में ईस्टर्न स्टार मेडल और वेस्टर्न स्टार मेडल जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त किए। उनके सेवा-समर्पण और साहसिक कार्यों के कारण उन्हें बीएसएफ में एक विशेष पहचान मिली।

बीएसएफ के पूर्व आईजी पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि उनके पिता का जीवन प्रेरणास्रोत था। पुष्पेन्द्र सिंह, जो स्वयं बीएसएफ से हाल ही में आईजी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, ने कहा कि संचू को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना उनके पिता के बलिदान और सेवा की स्थायी विरासत को सम्मानित करने का एक प्रयास है।

1958 में ‘महफिल पतंग क्लब’ की स्थापना

देश सेवा के अलावा श्यामसुन्दर सिंह का एक और परिचय था – पतंगबाजी का। 1958 में उन्होंने “महफिल पतंग क्लब” की स्थापना की और पतंगबाजी को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाया। बीकानेर में उन्हें पतंगबाजी की लोकप्रियता बढ़ाने का श्रेय दिया जाता है। पतंग उड़ाने की कला को नई पीढ़ी के बीच संरक्षित करने और उसे लोकप्रिय बनाने में उनका योगदान अविस्मरणीय है।

उनके मित्र और पतंग क्लब के अन्य सदस्यों ने कहा कि उनके साथ पतंग उड़ाने का एक अलग ही अनुभव था। उनके द्वारा सिखाए गए पतंगबाजी के हुनर को आज भी बीकानेर के युवा संजोए हुए हैं और यह विरासत हमेशा जीवित रहेगी।

सम्मान और श्रद्धांजलि

बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के महानिदेशक ने श्यामसुन्दर सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उनके योगदान को स्मरण किया। बीएसएफ ने उनके परिवार को संवेदनाएं प्रेषित की हैं और उनके सेवा काल के दौरान उनके द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की है।

अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि सभा

बीकानेर में बुधवार, 30 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। स्थानीय समाजसेवी, बीएसएफ के अधिकारी, परिवारजन और मित्र इस अवसर पर उपस्थित रहकर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। श्यामसुन्दर सिंह की अमूल्य सेवाओं और उनकी अद्वितीय पतंगबाजी कला को याद किया जाएगा।

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