बीकानेर तकनीकी विश्व विद्यालय के कुलपति पर लाखों रूपये के गबन का केस दर्ज

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बीकानेर तकनीकी विश्व विद्यालय के कुलपति पर लाखों रूपये के गबन का केस दर्ज
बीकानेर। बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अंबरीष शरण विद्यार्थी के खिलाफ पिथौरागढ़(उत्तराखंड) में 15.35 लाख रुपए के गबन का मामला दर्ज हुआ है। हालांकि कुलपति ने इन आरोपों को गलत बताया है। बीटीयू कुलपति प्रोफेसर अंबरीष शरण विद्यार्थी पर भ्रष्टाचार, वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितता के आरोप लगे हैं। मामला वर्ष 2018 से 2021 के बीच का बताया जा रहा है। प्रोफेसर विद्यार्थी तब पिथौरागढ़ स्थित नन्ही परी सीमांत इंजीनियरिंग संस्थान के निदेशक थे।मामले की शिकायत संस्थान के कुलसचिव डॉ. हेमन्त कुमार जोशी ने की थी, जिस पर वर्तमान में संस्थान के प्रशासक और निदेशक जिलाधिकारी ने जांच की, जिसमें पूर्व निदेशक अम्बरीश शरण विद्यार्थी को 15, लाख 35 हजार 111 रुपए के गबन को दोषी पाया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रोफेसर विद्यार्थी के खिलाफ पिथौरागढ़ के कोतवाली थाने में आईपीसी की धारा 409 के तहत गबन का मुकदमा दर्ज हुआ है। बताया जाता है कि प्रो. विद्यार्थी के खिलाफ वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के संबंध में पहले से शिकायतें मिल रही थीं। प्रशासन ने जांच कराने के बाद शासन को अपनी आख्या भेजी, जिसके बाद यह कार्यवाही आगे बढ़ी। वर्ष 2011-12 से शुरू हुए इस संस्थान का पूर्व में नाम सीमान्त प्रौद्यागिकी संस्थान था। केएनयू जीआईसी पिथौरागढ़ के पास वर्तमान में यह संस्थान संचालित है।
भवन निर्माण के लिए दो करोड़ मिले थे, पूरा हिसाब है
बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अंबरीश शरण विद्यार्थी ने गबन के आरोपों को बेबुनियाद करार देते हुए कहा है कि संस्थान के नए भवन निर्माण के लिए सरकार ने केवल दो करोड़ रुपए मंजूर किए थे। उस बजट से कुछ निर्माण कराया गया था। बीओजी की मीटिंग में उसकी अनुमति जारी हुई थी। बीओजी की अप्रूवल बिना कोई काम नहीं हुआ। भवन का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए हमने सरकार को भी लिखा था। हालांकि यह काम मेरी नियुक्ति से पहले का है।
विवादों में रहा कुलपति का कार्यकाल
बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय कुलपति के पद पर प्रोफेसर अंबरीश शरण विद्यार्थी की नियुक्ति 2021में हुई थी। तभी से उनका कार्यकाल विवादों में रहा है। परीक्षा संबंधी कार्यों में वित्तीय अनियमितता के आरोप लग चुके हैं। इसे लेकर तत्कालीन कुलसचिव से विवाद भी रहा। परीक्षा समय पर नहीं कराने के कारण छात्रों ने 16 दिन तक आंदोलन किया। कुलपति के पास यूसीईटी के प्रिंसिपल का भी अतिरिक्त चार्ज है। चहेते व्याख्याताओं को महत्वपूर्ण पदों पर लगाने को लेकर शिकायतें हो रखी हैं।

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