
बीकानेर।बीकानेर में पहली बार स्त्री रोग विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर का ऑनलाइन वेबिनार 31 जुलाई और 1 अगस्त को आयोजित होगा। इस वेबीनार में देश और राजस्थान की सभी स्त्रीरोग विशेषज्ञ एवम इस क्षेत्र की सभी सोसाइटी शामिल होगी। परन्तु हमारे डाक्टर्स जो फ्रंट लाईन वर्कस हैं उन्होंने अपने चिकित्सकीय काम के साथ यह मोर्चा भी सम्भाला।
इस संदर्भ में आयोजित पत्रकार वार्ता में डॉ सुदेश अग्रवाल ने बताया कि कोरोना काल में हमारे डाक्टर्स जो फ्रंट लाईन वर्कस हैं उन्होंने अपने चिकित्सकीय काम के साथ हर मोर्चा सम्भाला है। साथ ही चिकित्सक अपनी सेवाओं को निरंतर जारी रखे हुए हैं इसी कड़ी में अपना योगदान देते हुए FOGSI-JOGI और E-PICSEP 2021 के संयुक्त तत्वाधान में एक ऑनलाईन वेबीनार आयोजित किया जा रहा है।
वेबिनार की जानकारियां देने हेतु आयोजित पत्रकार वार्ता में डॉ. सुदेश अग्रवाल, डा. दीप्ति वाहल, डा. स्वाति कोचर, डॉ. गितिका जैन, डॉ. दीपा खत्री और डॉ.शैफाली दाधीच उपस्थित थे। जहां BIGOS प्रेसीडेंट डॉ. सुदेश अग्रवाल ने बताया कि इस राष्ट्रीय स्तर की वेबीनार में देश के जाने माने स्त्री रोग विशेषज्ञ भाग लेंगे।
डॉ. दीपा खत्री ने बताया कि कार्यक्रम का आगाज स्वागत भाषण से होगा जिसमें डॉ. सुदेश राष्ट्रीय स्तर की जानी मानी हस्तियों को आमंत्रित करेंगी तत्पश्चात् वर्चुअल माध्यम से दीप प्रज्वलन व सरस्वती वंदना होगी।
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के पहले दिन पाँच सेशन होंगे। जिनमें देश के कई शहरों से वक्ता शोध के लिए विषय के चुनाव, गाईड की भूमिका, विषय की प्रासंगकिता और समय के प्रबंधन के बारे में बताएंगे। शोध के लिए चुनी जाने वाली विभिन्न अध्ययन शैलियों के बारे में भी बताया जाएगा।
वेबीनार की मुख्य अतिथि होंगी डॉ. गीता बालसरकार जो कि सेठ जी एस मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर है तथा विशिष्ट अतिथि होंगे डॉ. एस डी. गुप्ता जो कि अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त रिसर्चर हैं और आई आई एच एम आर यूनिवर्सिटी जयपुर के डायरेक्टर रह चुके है।
पहले सेशन के अंत में वेबीनार के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डालने के लिए ई-बुक भी रिलीज की जाएगी। शोध मानव ज्ञान को दिशा प्रदान करता है और ज्ञान भन्डार को विकसित एवं परिमार्जित करता है। अनुसंधान के माध्यम से हम चिकित्सा की वैकल्पिक व नवीन पद्धतियों के बारे में जान सकते हैं। इसी क्रम में शोध पत्र लिखने के तरीके शोध पत्र के महत्वपूर्ण साक्ष्यों को ग्राफ और टेबल्स में प्रदर्शित करने के तरीकों के बारे में बताया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यह वेबीनार सिर्फ गायनी ही नहीं वरन् अन्य विभागों के स्नातकोत्तर छात्रों के लिए लाभदायक सिद्ध होगा क्योंकि इसमें अन्य विभागों के फैकल्टी डॉ. एस एन हर्ष, डॉ. पीसी खत्री भी शिरकत कर रहे हैं। वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुदेश अग्रवाल, डॉ. दीप्ति वाहल. डॉ. स्वाति कोचर, डॉ. कमला, डॉ.गीतिका जैन और डॉ. शैफाली भी महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान देगी।
तीसरे सेशन में शोध के लिए काम आने वाले आनलाईन टूल्स के बारे में जानकारी दी जाएगी जो कि वर्तमान समय की माँग है। पी एस एम की डॉ. रेखा आचार्य चिकित्सा सांख्यिकी का मूल समझांएगी।
उन्होंने कहा कि किसी भी शोध की प्रांसगिकता होती है उसका व्यवहारिक उपयोग अतःकिसी भी लेख या शोध पत्र का मूल्यांकन एक महत्वपूर्ण कदम है। इस दौरान पीको टूल के बारे में डॉ. अरूण नायक बताएंगे जो कि सायन मेडिकल कॉलेज मुंबई के प्रोफेसर हैं।
अंतिम दिन के महत्वपूर्ण सेशन डॉ. मधु गुप्ता पीजीआई चंडीगढ़ के एच ओ डी और डॉ. अरूणा निगम (नेशनल फैकल्टी) लेंगे। इस सेशन के महत्वपूर्ण विषय साक्ष्य आधारित चिकित्सा होंगे। शोध से निकले निष्कर्ष का व्यवाहारिक उपयोग और आई सी एम आर गाइडलाईन्स इत्यादि केबारे में प्रकाश डालेंगी ।
दूसरे दिन का सेशन नितांत ही भिन्न होगा जिसमें डॉ. हेमन्त देशपांडे जो कि डी वाय पाटिल इंस्टीट्यूट के डिप्टी डीन हैं, गर्भस्थ शिशु की धड़कन नापने के यंत्र ; कार्डियोट्कोग्राफ के बारे में जानकारी देंगे और डॉ. जे बी शर्मा प्रोजेस्टेरॉन के बारे में बताएंगे। फिर एक रोचक सेशन होगा जिसमें देश के अलग-अलग भागों से और अलग-अलग संकायों की चिकित्सक शोध पत्र पढ़ेगें। अंत में प्रशस्ति पत्र वितरण और धन्यवाद उद्बोधन के साथ समापन होगा।
यह वेबीनार निशुल्क है। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में यह प्रयास और योगदान सराहनीय है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मेडिकल कॉलेज प्राचार्य मुकेश आर्य भी उपस्थित थे।











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