मृत्यु वरण न करो… :: डॉ नीरू जैन

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मृत्यु वरण न करो… आत्महत्या ना करे, प्रेरणादायक कविता लिखने की कोशिश की है , आशा है आप सब को पसंद आएगी…..
सुसाइड करने के कई कारण होते है,
पर हर मुश्किल का हल होता है, थोड़ा खोजने की की कोशिश की जाए। जिंदगी जीना हमारा एक मिशन है, इसलिए उमर चाहे कोई भी ही, जिंदादिली से कहें, अभी तो बहुत काम करने है, मरने की फुर्सत कहां ….? जिंदगी खुशी से और इस सार्थकता जिए, ताकि मरे तो भी मरने का गम न हो, …
जब कोई राह न हो तो ईश्वर की शरण में जाना चाहिए।
टाइटल* मृत्यु वरण न करो…
माना कि खुशी के बहानें नही,
होटों पे खुशी के तरानें नहीं
पर
इक किरण छुपी है रोशनी की कहीं
आत्म मंथन तो करो,
ये मानव जीवन मिला अमूल्य
यूं मृत्यु वरण न करो…
माना की गम के अंधेरे है,
राह अकेली है, पर तू क्यूं डरे हैं,
इक अनंत प्रकाश मन के भीतर
जागृत तो करो….
ये मानव जीवन मिला अमूल्य
यूं मृत्यु वरण न करो…
कोई राह कोई रास्ता तो जीने का
ज़रूर है,
ज़रा उनकी तरफ़ तो देख
तू जिनकी आंखों का नूर हैं,
खुशी ना दे पाए उन्हे तो
बिलख़ने पे मजबूर न करो
ये मानव जीवन मिला अमूल्य
यूं मृत्यु वरण न करो…
जितना भी मिला
मिल बांट के जी ले,
सबने तुझे ठुकराया,
तो तू ही किसी का हो ले,
जान देने से अच्छा है
लोगो में जीवन प्रेरणा तो भरो,
ये मानव जीवन मिला अमूल्य
यूं मृत्यु वरण न करो…
निराशा के बादल भी छटेंगे
खुशियों के द्वार भी खुलेंगे,
जब कुछ न समझ आए तो,
हे चैतन्य! ईश्वर के समक्ष
खुद का समर्पण तो करो..
ये मानव जीवन मिला अमूल्य
यूं मृत्यु वरण न करो…
डॉ नीरू जैन

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