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राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने बीकानेर में पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में की शिरकत, पशुधन को बताया ग्रामीण भारत की समृद्धि का आधार

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बीकानेर। एमजीएसयू के मीरा बाई सभागार में राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (RAJUVAS) के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। साथ में पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत भी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने पशुधन की महत्ता को रेखांकित करते हुए इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ और ‘राष्ट्र की महत्वपूर्ण निधि’ बताया।राज्यपाल बागड़े ने कहा कि भारत का ग्रामीण समाज पशुधन पर आश्रित है, और पशुपालन न केवल रोजगार का साधन है, बल्कि कुपोषण उन्मूलन, महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और टिकाऊ कृषि के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा विज्ञान का क्षेत्र आधुनिक विज्ञान और परंपरागत ज्ञान के समन्वय से ग्रामीण भारत की दिशा और दशा बदलने की क्षमता रखता है।
समारोह में ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी स्तर तक कुल 515 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान की गईं। उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए 8 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल तथा कुल 10 विद्यार्थियों को विभिन्न श्रेणियों में मेडल देकर सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के कुलगुरू आचार्य डॉ. मनोज दीक्षित ने यह जानकारी दी और बताया कि विश्वविद्यालय निरंतर अनुसंधान, नवाचार और ग्रामीण सेवा के क्षेत्र में प्रगति कर रहा है।
इस ऐतिहासिक समारोह का विशेष आकर्षण रहा कर्नाटक के मूर्तिशिल्पी अरुण योगीराज को मानद उपाधि (डॉक्टरेट) से सम्मानित किया जाना। योगीराज वही कलाकार हैं जिन्होंने अयोध्या में रामलला की मूर्ति का निर्माण किया है। उनकी कला और संस्कृति के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान को मान्यता देते हुए यह सम्मान प्रदान किया गया।
मंच पर राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े के साथ कुलगुरु डॉ. मनोज दीक्षित, पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत और विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता भी उपस्थित रहे। समारोह को भव्यता प्रदान करते हुए परंपरागत शैक्षणिक वेशभूषा में छात्रों ने दीक्षांत की गरिमा को जीवंत किया। राज्यपाल बागड़े ने अंत में विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और नवाचार की भावना लेकर आगे बढ़ें, ताकि पशुपालन और ग्रामीण विकास के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाया जा सके।

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