बीकानेर। राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र बीकानेर ने राष्ट्रीय पशु संसाधन ब्यूरो, करनाल के वैज्ञानिको के साथ मिल कर स्वदेशी घोड़ों की डीएनए-बेस्ड “एक्सिओम–अश्व एसएनपी चिप“ बनाने में सफलता प्राप्त की है।
केंद्र के प्रभागाध्यक्ष डॉ एस सी मेहता ने बताया कि यह तकनीक स्वदेशी घोड़ों के अध्ययन में सबसे अधिक उपयोगी सिद्ध होगी एवं लम्बे समय तक उपयोग में आएगी । साथ ही इससे अब विदेशी चिप का उपयोग कम होगा ।
केन्द्र की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में इस केंद्र ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की अनेक उपलब्धियां हासिल की है । इस केंद्र ने ही देश को घोड़ों की आठवीं नस्ल “भीमथड़ी” दी है। मारवाड़ी घोड़ों के संरक्षण पर राष्ट्रीय स्तर का “नस्ल संरक्षण पुरस्कार” जीता गया एवं अभी हाल ही में “राज शीतल” नाम की बच्ची का जन्म विट्रीफाइड भ्रूण प्रत्यर्पण तकनीक से हुआ । उन्होंने केंद्र की उपलब्धियों के साथ-साथ घोड़े को आम जनता से जोड़ने के पिछले 5 – 6 वर्षों में किए गए प्रयासों के बारे में बताते हुए कहा कि यहां अश्व पर्यटन प्रारंभ किया गया, अश्व प्रतियोगिताएं को “अंतर राष्ट्रीय ऊंट उत्सव” में सम्मिलित करवाया गया एवं एनसीसी के साथ अश्व खेलों का आयोजन भी करवाया गया है।
आज यहां अश्व पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु एक इंटरफ़ेस मीटिंग का आयोजन भी किया गया।जिसमें आगंतुकों ने केन्द्र के नए संग्रहालय, सेंड ड्यून व बांस झोपड़ी, लकड़ी का पूल, हर्बल गार्डन एवं विभिन्न नस्लों के घोड़े भी देखे साथ ही अश्व एवं बग्गी सवारी का आनन्द भी लिया।
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