रेवंत रेड्डी, जिनकी शुरुआत ABVP से हुई थी:अब तेलंगाना के सीएम; एक शादी में देखकर पत्नी को दिल दे बैठे थे
2015 की बात है। अनुमुला रेवंत रेड्डी नोट के बदले वोट मामले में जमानत पर रिहा हुए। उन्होंने तेलंगाना के तत्कालीन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को चुनौती देते हुए कहा- मैं इसे भूलूंगा नहीं और एक दिन आपको कुर्सी से हटाकर ही दम लूंगा।
8 साल बाद यानी 2023। वही रेवंत रेड्डी अपनी चुनौती को पूरा करते हुए हैदराबाद के एलबी स्टेडियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। वो देश के सबसे नए राज्य तेलंगाना के दूसरे मुख्यमंत्री बन गए हैं। रेवंत के लिए इन 8 सालों का सफर आसान नहीं रहा।
तेलंगाना के नए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की जिंदगी के सुने-अनुसने किस्से…
किसान परिवार में जन्म, रियल एस्टेट से पैसे बनाए और ABVP से राजनीति
अनुमुला रेवंत रेड्डी का जन्म आंध्र प्रदेश के महबूबनगर में 8 नवंबर 1969 को हुआ था। मूलत: वे एक किसान परिवार से आते हैं। रेवंत का परिवार इतना सक्षम नहीं था कि हर महीने उन्हें खर्च के लिए पैसे भेज सके। अपना खर्च पूरा करने के लिए रेवंत कॉलेज के दिनों में पेंटिंग बनाकर बेचते थे।
इसके बाद रेवंत ने अपने भाई के साथ मिलकर रियल एस्टेट में हाथ आजमाया और खूब दौलत कमाई। रेवंत ने अपने काॅलेज के दिनों से ही राजनीति में रुचि दिखानी शुरू कर दी थी। उन्होंने हैदराबाद के एवी कॉलेज से फाइन आर्ट्स में ग्रेजुएशन किया है। इसी दौरान वे एबीवीपी से जुड़े। बाद में चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी जॉइन कर ली।
उन्होंने तेलंगाना आंदोलन में एक्टिवली पार्टिसिपेट किया। उन्हें जिला परिषद के चुनाव में टिकट देने का वादा किया गया था। जब उनका टिकट किसी और को दे दिया गया तो उन्होंने टीडीपी छोड़ दी और पहली बार 2006 में जिला परिषद चुनाव निर्दलीय लड़ा और जीता। बाद में टीडीपी ने उन्हें वापस पार्टी में शामिल करा लिया।

रेवंत रेड्डी तेलंगाना के दूसरे सीएम होंगे। इससे पहले 2014 से के. चंद्रशेखर राव मुख्यमंत्री थे। रेवंत ने इस चुनाव के लिए पदयात्रा भी की थी और पूरे तेलंगाना में घूम-घूमकर प्रचार किया था।
टीडीपी में तेजी से कद बढ़ा, सदन के नेता बन गए
रेड्डी ने टीडीपी के टिकट पर पहली बार 2009 में आंध्र प्रदेश की कोडांगल सीट से विधानसभा का इलेक्शन लड़ा था और जीता था। तब तक वो टीडीपी के जाने-पहचाने चेहरे बन चुके थे। 2014 में रेवंत को टीडीपी ने तेलंगाना विधानसभा में सदन का नेता नियुक्त किया था।
हैदराबाद में दशकों से पत्रकारिता कर रहे सीपीएन कार्तिक बताते हैं कि रेवंत का भाषण हमेशा गजब का हाेता है। जब वो भाषण देते हैं तो देशज मुहावरों और जुमलों का प्रयोग करते हैं। यही वो बात है जो उनके भाषण को रोचक बनाती है। इस कारण से लोग उनसे कनेक्टिविटी महसूस करते हैं।
वोट के बदले घूस मामले में जेल गए, 12 घंटे की जमानत मिली तो कर पाए कन्यादान
कार्तिक बताते हैं कि रेवंत रेड्डी वोट के बदले घूस मामले में जेल जा चुके हैं। 31 मई 2015 को उन्हें कैमरे पर रिश्वत देते हुए एक वीडियो जारी हुआ था।
रेड्डी ने विधान परिषद चुनाव में टीडीपी प्रत्याशी के पक्ष में वोट करने के लिए मनोनीत विधायक एल्विस स्टीफेंसन को पांच करोड़ की रिश्वत दी थी। इसकी पहली किश्त 50 लाख रुपए देने वे स्टीफेंसन के सिकंदराबाद वाले घर गए थे। तब स्टीफेंसन ने मुख्यमंत्री केसीआर के कहने पर इस घटना का वीडियो बना लिया था।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद रेवंत रेड्डी को जेल जाना पड़ा था। रिश्वत की शिकायत वीडियो बनाने वाले विधायक स्टीफेंसन ने ही की थी।
रेड्डी ने कहा था कि मुझे सीएम के चंद्रशेखर राव ने साजिश करके फंसाया है। कुछ ही दिनों बाद 11 जून को रेड्डी की बेटी की शादी थी। उस वक्त रेड्डी जेल में थे। कोर्ट ने बेटी की शादी के लिए 12 घंटे की जमानत दी थी।
कोर्ट ने कहा था कि आप केवल बेटी का कन्यादान करेंगे ओर फोटो खिचवाएंगे। इस दौरान ऑफिसर आपके साथ रहेंगे। इस तरह रेवंत रेड्डी बेटी का कन्यादान कर पाए थे।
नोट के बदले वोट मामले में लगभग एक महीने बाद रेड्डी को जमानत मिली थी। वे आज भी इस मामले पर जमानत पर हैं। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन किया था। उन्होंने मुख्यमंत्री केसीआर को संबोधित करते हुए मूंछ पर ताव देकर, जांघ पर ताल ठोक कर कहा था कि मैं इसे याद रखूंगा और केसीआर को हटाकर ही दम लूंगा।

2015 में वोट के बदले घूस मामले में रेवंत रेड्डी न्यायिक हिरासत में थे। उन्हें बेटी की शादी के लिए 12 घंटे की बेल मिली थी, लेकिन इस दौरान पूरे समय उनके साथ ऑफिसर मौजूद थे। फोटो में रेवंत रेड्डी, उनकी पत्नी गीता, बेटी निमिषा और दामाद सत्यनारायण।
चंद्रबाबू नायडू से नहीं पटी तो टीडीपी छोड़ कांग्रेस जॉइन की
इस बीच उनकी चंद्रबाबू नायडू से नहीं पटी और टीडीपी ने तेलंगाना में चुनाव भी नहीं लड़ा तो उन्होंने 2017 में कांग्रेस का दामन थाम लिया। ये रेवंत के करियर के लिए ठीक नहीं हुआ, क्योंकि अभी तक रेवंत ने हार का मुंह नहीं देखा था। 2018 में विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़े, लेकिन हार गए।
फिर 2019 में मल्काजगिरी से कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने। 2021 में रेवंत को तेलंगाना कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। इसका जबरदस्त विरोध हुआ। कई नेताओं ने ये तक कह दिया कि हम रेवंत के अंडर में काम नहीं करेंगे। कुछ ने तो सोनिया गांधी को इस्तीफे भी भेज दिए थे। कई सीनियर नेताओं ने सेव कांग्रेस नाम से कैंपेन भी चलाया था, लेकिन कांग्रेस हाईकमान अपने फैसले पर अड़ा रहा।

रेवंत की ताकत उनकी उनकी भाषण कला है। वे अपने भाषण में लोकल शब्दों और मुहावरों का उपयोग करते हैं। इससे लोग उनसे कनेक्टिविटी महसूस करते हैं।
कांग्रेस आलाकमान ने रेवंत रेड्डी को कांग्रेस का चेहरा बनाया
रेवंत रेड्डी पूरे तेलंगाना विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस का चेहरा बने रहे। जहां भी प्रचार में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी नजर आते थे, उनके साथ रेवंत रेड्डी जरूर होते थे। चुनाव प्रचार के दौरान वो इस बात को दोहराते रहे कि तेलंगाना का गठन कांग्रेस ने ही किया था।
रेवंत रेड्डी ने कोडांगल और कामारेड्डी से चुनाव लड़ा था। कामारेड्डी से वह हार गए, लेकिन कोडांगल से जीत गए। उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते कांग्रेस ने पहली बार तेलंगाना में पूर्ण बहुमत भी हासिल किया। 2-3 दिन की मंत्रणा के बाद कांग्रेस आलाकमान ने तय किया कि रेवंत रेड्डी ही तेलंगाना के नए मुख्यमंत्री होंगे।
केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी की भतीजी को एक शादी में देखकर दिल दे बैठे थे
तेलंगाना के सीनियर जर्नलिस्ट और टीवी 9 के एडिटर रहे दिनेश अकुला बताते हैं कि रेवंत रेड्डी ने गीता रेड्डी से लव मैरिज की है। रेवंत और गीता की लव स्टोरी किसी फिल्म के सच होने जैसी है। ये प्रेम कहानी तब शुरू हुई जब रेवंत और गीता टीएन ऐज में थे और दोनों 12वीं कक्षा में पढ़ते थे। रेवंत ने पहली बार गीता को एक शादी में देखा था।
देखते ही उन्हें गीता से प्यार हो गया था। रेवंत ने प्रेम का प्रस्ताव रखा जिसे गीता ने स्वीकार कर लिया था। कुछ दिन चोरी-छिपे सब चलता रहा, लेकिन एक दिन ये बात गीता के पिता को पता चल गई। इसके बाद रेवंत ने गीता के पिता के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। गीता का परिवार बेहद अमीर था और रेवंत उस समय गरीब थे। गीता के पिता ने अमीरी-गरीबी की खाई को देखते हुए शादी से साफ मना कर दिया था, जबकि रेवंत उनकी ही जाति के थे।
इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी को अपने भाई जयपाल रेड्डी के घर दिल्ली भेज दिया था। ये वही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयपाल रेड्डी हैं जो यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। दोनों के बीच संपर्क टूट चुका था। फिर एक दिन रेवंत ने जयपाल रेड्डी से मुलाकात की और उन्हें शादी के लिए मना लिया। कुछ सालों बाद धीरे-धीरे रेवंत ने गीता के पिता को भी मना लिया। इसके बाद दोनों परिवारों की सहमति से रेवंत और गीता ने 1992 में धूमधाम से शादी कर ली।

अपने युवावस्था के दौरान रेवंत रेड्डी और गीता।

पत्नी गीता और बेटी निमिषा के साथ रेवंत रेड्डी। दोनों की एक ही बेटी निमिषा है। निमिषा ने इसी साल अप्रैल में एक बेटे को जन्म दिया है। रेवंत ने इसकी फोटो भी शेयर की थी।
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