विश्व हिंदी दिवस की मनाने की उपादेयता: संदर्भ विश्व हिंदी दिवस(10 जनवरी)
BY DR MUDITA POPLI DIRECTOR T.I.N NETWORK
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।
अमर कवि भारतेन्दु हरिश्चंद्र की ये पक्तियाँ हिंदी पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं।भारत में व्यापक रूप से प्रचलित हिंदी देश के बाहर नेपाल, सूरीनाम, मॉरीशस, त्रिनिदाद और टोबैगो, गुयाना एवं फिजी में भी बोली जाती है। देश में हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया है।वैश्विक स्तर पर हिंदी दिवस का आयोजन प्रतिवर्ष 10 जनवरी को किया जाता है। वर्ष 2006 में भारत के तत्कालीन प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह के द्वारा प्रतिवर्ष 10 जनवरी को वैश्विक स्तर पर हिंदी दिवस मनाने की घोषणा की गयी थी। इसके पश्चात प्रतिवर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। विश्व हिंदी दिवस के प्रथम सम्मेलन का आयोजन 10-14 जनवरी 1975 में नागपुर में तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्रीमती इंदिरा गाँधी द्वारा किया गया था।
विश्व हिंदी दिवस मनाने का औचित्य यही है कि वैश्विक स्तर पर हिंदी के प्रचार प्रसार को बढ़ावा दिया जा सके,संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी भाषा को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थापित किया जा सके,हिंदी के प्रति जागरूकता पैदा करने हेतु कार्य हों,हिंदी को प्रमुख वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित किया जा सके,हिंदी की त्रुटियों को दूर करके हिंदी भाषा में सुधार किया जाए और
वैश्विक स्तर पर हिंदी के महत्व को बढ़ाया एवं प्रसार किया जाए।
अतः ये समझना ही होगा कि अपनी भाषा के प्रति लगाव और अनुराग राष्ट्र प्रेम का ही एक रूप है।संविधान सभा ने हम सबको यह संवैधानिक और प्रशासनिक उत्तरदायित्व सौंपा है कि हम संविधान के अनुच्छेद 343 और 351 के अनुसार राजभाषा हिंदी का अधिकतम प्रयोग करते हुए प्रचार प्रसार बढ़ाएं। अनुच्छेद 351 के अनुसार संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे। इससे वह भारत की संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके। साथ ही उसकी प्रकृति में हस्तक्षेप किए बिना हिन्दुस्तानी में और आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट भारत की अन्य भाषाओं में प्रयुक्त रूप, शैली को आत्मसात करे।
तो आइए प्रण लें हिंदी को ताकतवर बनाएंगे क्योंकि वक्ताओं की ताकत भाषा,लिखने वाले का अभिमान हैं भाषा इसीलिए भाषाओं के शीर्ष पर बैठी मेरी प्यारी हिंदी भाषा।








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