
बीकानेर। राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी) में अनुसंधान सलाहकार समिति (आरएसी) की वार्षिक बैठक हाईब्रिड मोड में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता गुरु काशी यूनिवर्सिटी, पंजाब के वाइस चांसलर डॉ. रामेश्वर सिंह ने की। इसमें विभिन्न वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और किसान प्रतिनिधियों ने भाग लेकर ऊँट संरक्षण, अनुसंधान गतिविधियों और भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।
केन्द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने एनआरसीसी की शोध उपलब्धियों और चल रही परियोजनाओं की जानकारी देते हुए अनुसंधान कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु मार्गदर्शन मांगा। समिति अध्यक्ष ने ऊँट पालन के आधुनिक मॉडल विकसित करने, कैमल डेयरी को व्यवसायिक रूप देने और ऊँट उत्पादों को न्यूट्रास्यूटिकल फूड के रूप में बढ़ावा देने पर जोर दिया।
बैठक में विशेषज्ञों ने घटती ऊँट आबादी पर चिंता जताते हुए संरक्षण योजनाओं, नस्ल पंजीकरण, क्षमता संवर्धन, पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण तथा ऊँट उत्पादों के बाजार विस्तार की आवश्यकता बताई। अंत में समिति सदस्य सचिव डॉ. राकेश रंजन ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।













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