बीकानेर। भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा 9 से 13 फरवरी तक आयोजित किए जा रहे वित्तीय साक्षरता सप्ताह के तहत नाल स्थित मां करणी पशुधन सहायक प्रशिक्षण महाविद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों एवं वित्तीय धोखाधड़ी से सुरक्षित रहने के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, ओटीपी धोखाधड़ी, फर्जी कॉल, यूपीआई स्कैम सहित अन्य साइबर अपराधों से बचने के उपायों की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग, पासवर्ड सुरक्षा और सतर्कता के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुएआर बी आई के अग्रणी जिला अधिकारी विंध्याचल सिंह ने कहा कि वित्तीय साक्षरता आज के समय की बड़ी आवश्यकता है। डिजिटल लेन-देन के बढ़ते उपयोग के साथ लोगों को सतर्क रहना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी प्रकार की वित्तीय धोखाधड़ी से बचा जा सके। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल या संदेश पर विश्वास करने से पहले पूरी जांच करें।
डीडीएम नाबार्ड रमेश तांबिया ने अपने संबोधन में बताया कि वित्तीय जागरूकता से ही आर्थिक सशक्तिकरण संभव है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल बैंकिंग और सुरक्षित लेन-देन के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
आरसेटी बीकानेर प्रभारी रूपेश शर्मा ने कहा कि युवाओं को साइबर सुरक्षा के प्रति सजग बनाना समय की जरूरत है और ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं। वहीं स्टेट डायरेक्टर आरसेटी रमेश नायक ने वित्तीय अनुशासन, बचत और जिम्मेदार बैंकिंग व्यवहार पर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं के लिए क्विज प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें वित्तीय जागरूकता और साइबर सुरक्षा से जुड़े प्रश्न पूछे गए। विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर कृष्ण कुमार सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कपिल पुरोहित द्वारा किया गया।
आरबीआई द्वारा वित्तीय साक्षरता सप्ताह के तहत युवाओं को साइबर व फाइनेंशियल फ्रॉड से बचाव की दी जानकारी, क्विज प्रतियोगिता का भी हुआ आयोजन
















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