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एनआरसीसी में ऊँट उत्सव-2026 बना आकर्षण का केंद्र, उमड़ा जनसैलाब…

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अंतर्राष्ट्रीय ऊँट उत्सव पर एनआरसीसी द्वारा कृषि एवं पशुधन प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी कार्यक्रम आयोजित

बीकानेर, 10 जनवरी 2026 । भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा ऊँट उत्सव–2026 के उपलक्ष्‍य पर कैमल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में उन्नत कृषि एवं पशुधन प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया । साथ ही राजस्थान पर्यटन विभाग एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में एनआरसीसी में ऊँट उत्‍सव-2026 के उपलक्ष्‍य पर ‘ऊँटां री बातां’ कार्यक्रम के अंतर्गत ऊँट से संबंधित विभिन्न आकर्षक प्रतियोगिताएं जैसे- ऊँट दौड़, ऊँट नृत्य, ऊँट सजावट तथा उष्ट्र फर कटिंग आयोजित की गई तथा लगभग 20 हजार से अधिक देशी-विदेशी पर्यटकों एवं आमजन ने एनआरसीसी में ऊँट उत्सव का आनंद लिया।

इस अवसर पर एनआरसीसी द्वारा आयोजित तकनीकी प्रदर्शनी कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि डॉ. सुमन्त व्यास, कुलगुरु, राजुवास, बीकानेर द्वारा किया गया। उन्‍होंने प्रतिभागी संस्थानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि ऊँट पालकों, पशुपालकों एवं किसानों के हित में विकसित नूतन प्रौद्योगिकियों एवं नवाचारों का व्‍यापक एवं प्रभावी प्रदर्शन किया जाना समय की मांग है, इस दिशा में व्‍यावहारिक प्रयास, अधिकाधिक किसानों की आय वृद्धि, आजीविका सुदृढ़ीकरण एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। डॉ. व्यास ने कहा कि ऊँट आधारित तकनीकों एवं उद्यमों के प्रोत्साहन से ऊँट पालन व्‍यवसाय के संरक्षण के साथ-साथ इसके मार्फत स्थायी रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

केन्द्र निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने ऊँट उत्‍सव-2026 के तहत ‘ऊँटां री बातां’ कार्यक्रम हेतु एनआरसीसी को चयनित किए जाने पर जिला प्रशासन एवं पर्यटन विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऊँटों की घटती संख्या भले ही चिंता का विषय हो, परंतु पर्यटकों एवं आमजन का इस प्रजाति के प्रति बढ़ता आकर्षण इसके उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। उन्होंने कहा कि ऊँट अब पारंपरिक उपयोग तक सीमित न रहकर अपनी बहुआयामी उपयोगिता के माध्यम से उद्यमिता एवं आजीविका संवर्धन की मजबूत संभावनाएँ प्रस्तुत कर रहा है। डॉ. पूनिया ने कहा कि ऊँट उत्‍सव के तहत एनएनआरसीसी द्वारा आयोजित प्रदर्शनी कार्यक्रम के माध्यम से पशुपालकों एवं किसानों को उन्नत कृषि एवं पशुधन प्रौद्योगिकियों की उपयोगी जानकारी प्रदान करवाई गई ताकि कृषि एवं पशुधन की बहुआयामी उपयोगिता एवं विशेषकर कैमल इको-टूरिज्म को आजीविका के नए विकल्प के रूप में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकें।
इस अवसर पर डॉ.आर.के.सावल, पूर्व निदेशक, एनआरसीसी, डॉ. आर.के. धूरिया, निदेशक प्रसार शिक्षा, राजुवास, बीकानेर, डॉ. निर्मला सैनी, प्रभागाध्‍यक्ष, भाकृअनुप-सीएसडब्‍ल्‍यूआरआई, बीकानेर, श्री वी. चन्नमल्लिकार्जुन, डीआईजी सह सीएससी, जयपुर, तथा जिला प्रशासन एवं पर्यटन विभाग के श्री रमेश देव, एडीएम सिटी, बीकानेर, श्री अनिल राठौड़, संयुक्‍त निदेशक, श्री महेश व्‍यास, सहायक निदेशक, श्री पवन शर्मा आदि ने प्रदर्शनी कार्यक्रम का अवलोकन किया।

केन्द्र द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी कार्यक्रम में प्रथम स्थान पर संस्थानों की श्रेणी में भाकृअनुप-सीआईएएच, बीकानेर, द्वितीय स्‍थान पर भाकृअनुप-सीएसडब्‍ल्‍यूआरआई, बीकानेर तथा तृतीय स्‍थान पर संयुक्‍त रूप से राजुवास, बीकानेर एवं एसकेआरएयू, बीकानेर एवं गैर सरकारी संगठनों की श्रेणी में प्रथम स्थान पर अमूल बीकानेर तथा द्वितीय स्थान पर कैमल ढाणी बीकानेर तथा तृतीय माजीसा राजीविका स्‍वयं सहायता समूह, पारवा, बीकानेर रहे । इन सभी विजेताओं को अतिथियों द्वारा पुरस्‍कृत किया गया ।
केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं ऊँट उत्‍सव कार्यक्रम समन्‍वयक (एनआरसीसी) डॉ. राकेश रंजन ने इस उत्‍सव की सफलता को ऊँट की बढ़ती बहुआयामी उपयोगिता से जोड़ते हुए बताया कि एनआरसीसी द्वारा आयोजित प्रदर्शनी कार्यक्रम में एनआरसीसी एवं बीकानेर में स्थित आईसीएआर के संस्‍थानों, विश्‍वविद्यालयों एवं गैर-सरकारी संगठनों (कुल 23 ने) यथा- सीआईएएच, सीएसडब्‍ल्‍यूआरआई, काजरी, डीजीआर, आईआईपीआर, एनआरसीई, राजुवास, एसकेआरएयू, हिन्‍दुस्‍तान पेट्रोलियम, कैमल ढाणी, उरमूल, अमूल, नाबार्ड आदि ने कृषि व पशुधन आधारित अपनी उन्‍नत प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया।

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